अब जो कारें लॉन्च हो रही हैं उनमें कई सारे एडवांस फीचर्स देखने को मिलती हैं. ऐसे में जब आप कार खरीदने से पहले ऐड्स और रिव्यू देखते होंगे, तब आपके सामने SUV, ADAS और DRL जैसे कई टेक्निकल शब्द सामने आते हैं. ये शब्द अब आम बातचीत का हिस्सा तो बन चुके हैं, लेकिन जो लोग कारों के बहुत ज्यादा शौकीन नहीं हैं, उन्हें अक्सर समझ नहीं आता कि आखिर इनका मतलब होता क्या है.
अगर आपको ये सारे टर्म्स ठीक से समझ में आ जाएं, तो नई कार में मिलने वाले फीचर्स को लेकर कन्फ्यूजन नहीं रहेगा और आप आराम से सही फैसला ले पाएंगे. तो आइए फिर डिटेल में जानते हैं इन टर्म्स का मतलब.
SUV का क्या मतलब है?
SUV का मतलब होता है स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (Sport Utility Vehicle). आसान शब्दों में कहें तो ये ऐसी गाड़ियां होती हैं जो सड़क पर आरामदायक ड्राइव के साथ-साथ खराब रास्तों पर भी ठीक-ठाक चलने के लिए बनाई जाती हैं. नॉर्मल हैचबैक या सेडान के मुकाबले SUV की ग्राउंड क्लीयरेंस ज्यादा होती है, इसलिए गड्ढों या उबड़-खाबड़ सड़कों पर इन्हें चलाना काफी आसान होता है. इनमें बैठने की पोजिशन भी थोड़ी ऊंची होती है, केबिन ज्यादा आपको खुला-खुला मिलता है. भारत में SUV छोटे कॉम्पैक्ट मॉडल से लेकर बड़े सात-सीटर तक आती हैं.
ADAS क्या होता है?
ADAS का मतलब होता है एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (Advanced Driver Assistance Systems). आसान शब्दों में कहें तो ये कार में मिलने वाले ऐसे स्मार्ट सेफ्टी फीचर्स होते हैं, जो ड्राइविंग को ज्यादा सेफ बनाने और हादसों से बचाने में मदद करते हैं. ADAS में सेंसर, कैमरे और रडार लगे होते हैं. इनकी मदद से आप सड़क और आसपास की चीजों पर लगातार नजर रख पाते हैं.
इसमें ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग होता है, मतलब खतरा दिखते ही गाड़ी खुद ब्रेक लगा लेती है. अगर गाड़ी लेन से बाहर जाने लगे तो तुरंत आपको अलर्ट मिल जाता है. स्पीड भी कई बार ये सिस्टम खुद कंट्रोल कर लेता है और ब्लाइंड स्पॉट में कोई गाड़ी हो तो पहले ही चेतावनी दे देता है. खासकर हाईवे पर लंबी ड्राइव हो, या फिर ट्रैफिक ज्यादा हो, या पार्किंग करनी हो तो ऐसे टाइम पर ये फीचर्स ड्राइवर के लिए एक एक्स्ट्रा सेफ्टी की तरह काम करते हैं.
DRL क्या होता है?
DRL का मतलब होता है डेटाइम रनिंग लाइट्स (Daytime Running Lights). ये ऐसी लाइट्स होती हैं जो गाड़ी स्टार्ट होते ही दिन के समय अपने आप जल जाती हैं. इइनका काम सड़क को रोशन करना नहीं, बल्कि आपकी गाड़ी को दूसरों के लिए आसानी से दिखना बनाना है. यानी ट्रैफिक में लोग आपकी गाड़ी जल्दी देख लें और एक्सीडेंट का खतरा कम हो. खासकर कम रोशनी, धुंध या क्लॉउडी वाले मौसम में ये काफी काम आती हैं. आसान शब्दों में कहें तो DRL गाड़ी की विजिबिलिटी बढ़ाती हैं. इससे दिन के समय होने वाले एक्सीडेंट का खतरा कम हो जाता है.
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