Ola को पछाड़कर TVS बनी नंबर-1, 212km रेंज वाले iQube का जलवा, बिक्री में बनाया बड़ा रिकॉर्ड

TVS मोटर कंपनी ने बिक्री के मामले में Ola Electric को पीछे छोड़ दिया है, जो देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता बन गई है. iQube और Orbiter मॉडल की सफलता ने इस बढ़त में अहम भूमिका निभाई है. यह बदलाव भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बाजार की बदलती तस्वीर को दर्शाता है.

TVS मोटर कंपनी ने भारत में कुल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e2W) बिक्री के मामले में ओला इलेक्ट्रिक को पीछे छोड़ दिया है. TVS iQube 5.1kWh बैटरी वाला वेरिएंट 212 किलोमीटर रेंज देता है. TVS अब देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी बन गई है. वाहन डेटा के मुताबिक TVS ने 11,27,873 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन कराया है. वहीं ओला इलेक्ट्रिक का आंकड़ा 11,17,031 यूनिट्स का है. इस तरह TVS 10,842 यूनिट्स की बढ़त बना चुका है. 

TVS ने बिक्री में तेजी से बनाई बढ़त

TVS इलेक्ट्रिक स्कूटर सेल्स में यह बदलाव बहुत कम समय में हुआ है. जुलाई 2026 के अंत तक ओला TVS से 15,996 यूनिट्स आगे थी. तब ओला का कुल रजिस्ट्रेशन 11,08,565 था और TVS का 10,92,569 था. हालांकि, अगस्त के शुरुआती 24 दिनों में TVS ने 35,304 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बेचे, जबकि ओला सिर्फ 8,466 यूनिट्स ही रजिस्टर कर पाई.

इस वजह से TVS ने पुरानी कमी को खत्म कर पहली जगह हासिल कर ली. TVS ने इस साल (YTD) अब तक 3,42,958 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन किया है. यह 2025 के इसी समय के मुकाबले 75 परसेंट ज्यादा है. यह आंकड़ा 2025 की पूरी बिक्री (3,15,081 यूनिट्स) से भी आगे निकल चुका है.

TVS iQube और Orbiter का जलवा 

अप्रैल 2025 से TVS हर महीने बिक्री में नंबर-1 पर बनी हुई है. कंपनी की इस तेजी में iQube और Orbiter मॉडल की बड़ी भूमिका है. जून 2026 में TVS ने 55,783 यूनिट्स बेचकर अपनी सबसे ज्यादा मंथली सेल का रिकॉर्ड बनाया. इसने Ola के मई 2024 के 53,647 यूनिट्स के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. रोजाना लगभग 1,673 यूनिट्स की बिक्री के हिसाब से TVS 2026 में पहली बार 5 लाख सालाना बिक्री के आंकड़े को पार कर सकती है.

TVS को अपनी पहली 1 लाख गाड़ियां बेचने में 3 साल से ज्यादा का समय लगा था. इसके बाद कंपनी की ग्रोथ बहुत तेजी से बढ़ी. अप्रैल 2024 में 3 लाख का आंकड़ा पार हुआ. फिर 3 लाख से 7 लाख यूनिट्स तक पहुंचने में सिर्फ 17 महीने लगे.

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Ola इलेक्ट्रिक स्कूटर पांचवें नंबर पर

यह बदलाव काफी अहम है, क्योंकि दो साल पहले ओला मार्केट में सबसे आगे थी. ओला ने 2024 में 4,29,187 गाड़ियां बेची थीं और मार्केट में उसकी 35 परसेंट हिस्सेदारी थी. एक साल में 4 लाख बिक्री का आंकड़ा पार करने वाली ओला पहली कंपनी थी. लेकिन 2025 में इसकी परफॉर्मेंस कमजोर हो गई. बिक्री 52 परसेंट गिरकर 2,04,542 यूनिट्स रह गई और मार्केट शेयर घटकर 15 परसेंट पर आ गया.

2026 में भी हो रहा नुकसान

Ola की बिक्री में यह गिरावट 2026 में भी जारी है. 1 जनवरी से 24 अगस्त के बीच ओला ने 88,910 गाड़ियां बेची हैं. इस साल कुल 13 लाख से ज्यादा के मार्केट में उसकी हिस्सेदारी सिर्फ 7 परसेंट के करीब बची है. जनवरी 2025 में आखिरी बार नंबर-1 रहने वाली ओला अब इस साल की कुल बिक्री में TVS, बजाज ऑटो, एथर एनर्जी और हीरो मोटोकॉर्प से भी पीछे चल रही है.

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TVS और ओला ही ऐसी दो कंपनियां हैं जिन्होंने 10 लाख से ज्यादा गाड़ियां बेची हैं. दोनों ने मिलकर कुल 22.45 लाख गाड़ियां बेची हैं. 2020 से अब तक भारत में बिकी कुल इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इन दोनों की हिस्सेदारी 40 परसेंट है.




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By शिवांश शेखर

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शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

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शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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