आधे दाम पर नए ऑटोरिक्शा, टैक्सी और छोटे कमर्शियल व्हीकल, जानिए कौन सी राज्य सरकार दे रही सब्सिडी?

रोजगार को लेकर कई राज्य सरकारें अपने राज्य के लिए प्रतिबद्ध हैं ऐसे में कई राज्य सरकारें कमर्शियल वाहनों में सब्सिडी मुहैया करा कर गरीबों के लिए नए रोजगार का सृजन करती है. दक्षिण का एक ऐसा राज्य है जो नई ऑटोरिक्शा, टैक्सी और छोटे कमर्शियल व्हीकल पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है.

यह योजना कर्नाटक में शुरू की गयी है. जहां मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने वाहन की खरीद पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को 3 लाख रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा की है. यह योजना 2023-24 वित्तीय वर्ष के लिए है. इस योजना के तहत, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग 8 लाख रुपये तक की कीमत वाले वाहन खरीद सकते हैं. सरकार वाहन की कीमत का 50% या अधिकतम 3 लाख रुपये की सब्सिडी देगी.

गरीबों को मिलेगी मदद 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ मंत्री ज़मीर अहमद खान ने कहा, “एक ड्राइवर को ड्राइवर बनकर नहीं रहना चाहिए. उसे वाहन का मालिक भी बनना चाहिए. वह अपनी पसंद का 8 लाख रुपये तक का चार पहिया वाहन खरीद सकता है. सरकार 3 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी.”

इस योजना के लाभार्थियों को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा: 

  • लाभार्थी कर्नाटक के निवासी होने चाहिए.

  • उनकी वार्षिक आय 4.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए.

  • वे किसी भी धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य होने चाहिए.

दोबारा शुरू होगी योजना 

इस योजना की अंतिम तारीख 25 सितंबर थी जो अब पार हो चुकी है , वहीं योजना दोबारा से शुरू होने के कयास भी लगाए जा रहे हैं. जिसके लिए बजट आबंटन किया जाएगा.

विपक्ष ने लगाया तुष्टीकरण का आरोप 

इधर योजना के शुरुआत से ही इस पर विवाद भी शुरू हो गया है. कर्नाटक की मुख्य विपक्षी दल बीजेपी दल ने राज्य सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है.

राज्य सरकार का तर्क 

इस योजना के पक्ष में तर्क दिया जा रहा है कि यह अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करेगी. इससे उन्हें रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में आसानी होगी.

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By Abhishek Anand

'हम वो जमात हैं जो खंजर नहीं, कलम से वार करते हैं'....टीवी और वेब जर्नलिज्म में अच्छी पकड़ के साथ 10 साल से ज्यादा का अनुभव. झारखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के साथ-साथ विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में रिपोर्टिंग. राजनीतिक और क्षेत्रीय पत्रकारिता का शौक.

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