फुल चार्ज में 535km रेंज का दावा, 4.5 सेकंड में 100kmph स्पीड... भारत में इस इलेक्ट्रिक कार की बुकिंग हुई शुरू

रेंज रोवर का ऑल-इलेक्ट्रिक मॉडल भारत में बुकिंग के लिए आ गया है. जानिए इसकी 535 किमी रेंज, शानदार स्पीड और चार्जिंग की पूरी जानकारी. यह कार 4.5 सेकंड में 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है.

भारत में रेंज रोवर इलेक्ट्रिक की बुकिंग 10 लाख रुपये की टोकन राशि के साथ शुरू हो गई है. ऑटोबायोग्राफी ट्रिम में रेंज रोवर इलेक्ट्रिक के स्टैंडर्ड व्हीलबेस और SV, SV अल्ट्रा और SV ब्लैक वर्जन में लॉन्ग-व्हीलबेस के लिए बुकिंग चालू है. कंपनी स्टैंडर्ड व्हीलबेस रेंज रोवर इलेक्ट्रिक फर्स्ट एडिशन के लिए भी ऑर्डर ले रही है. इस ऑल-इलेक्ट्रिक रेंज रोवर में 118.5kWh का बैटरी पैक दिया गया है जो WLTP साइकिल के हिसाब से 600 किमी तक की रेंज देता है. वहीं, कंपनी का दावा है कि रियल वर्ल्ड में यह 535 किलोमीटर की रेंज देगी.

Range Rover Electric: रेंज और चार्जिंग टाइम

कंपनी के मुताबिक, इसका बड़ा बैटरी पैक दो इलेक्ट्रिक मोटरों को पावर देता है, जो एकसाथ मिलकर 551hp की ताकत और 850Nm का टॉर्क जनरेट करते हैं. कंपनी का दावा है कि यह कार 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार महज 4.5 सेकेंड में पकड़ लेती है. 350kW के DC फास्ट चार्जर से इसकी बैटरी को सिर्फ 22 मिनट में 10 से 80 परसेंट तक चार्ज किया जा सकता है. वहीं, 10 मिनट की चार्जिंग में यह कार 220 किमी तक की रेंज दे सकती है.

Range Rover Electric: इंटेलिजेंट ड्राइवलाइन डायनेमिक्स सिस्टम 

सिंगल-पेडल ड्राइविंग मोड़ में यह इलेक्ट्रिक SUV 45 डिग्री तक की ढलान पर चढ़ सकती है. इस EV में कंपनी का इंटेलिजेंट ड्राइवलाइन डायनेमिक्स सिस्टम दिया गया है, जो ग्रिप खोने से रोकने के लिए पिछले पहियों में टॉर्क को सही तरीके से बांटता है. इसके अलावा, कार का ट्रैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम 50 मिलीसेकेंड के भीतर मोटर की स्पीड को कंट्रोल करता है और नॉर्मल पेट्रोल-डीजल कार के मुकाबले 100 गुना तेजी से पहियों की फिसलन को संभालता है. नॉर्मल इंजन वाली कार की तरह इसकी पानी में चलने की क्षमता (वेडिंग कैपेसिटी) 900 मिमी रखी गई है.

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Range Rover Electric: एक्सटीरियर की खासियतें

रेंज रोवर इलेक्ट्रिक की जब बाहरी डिजाइन की बात आती है, तो JLR ने इसमें ज्यादा बड़े बदलाव करने के बजाय इसे नॉर्मल इंजन वाले मॉडल जैसा ही रखा है. यह EV मुख्य रूप से अपने एयरो-ऑप्टिमाइज्ड फ्रंट ग्रिल और नए व्हील डिजाइन की वजह से अलग दिखती है. रियलिटी में, कार की बॉडी पर कहीं भी इलेक्ट्रिक नहीं लिखा गया है, ताकि इसे पेट्रोल-डीजल मॉडल से अलग न किया जा सके.

रेंज रोवर इलेक्ट्रिक पुरानी नॉर्मल कार जैसी ही दिखती है, जिसे लेकर रेंज रोवर की ग्लोबल प्रोडक्शन मैनेजर रेचेल हॉग ने कहा, "हमें अपने किसी भी ट्रायल मॉडल को छिपाने या ढंकने की जरूरत ही नहीं पड़ी."

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Range Rover Electric: इंटीरियर और फीचर्स

केबिन के अंदर रेंज रोवर इलेक्ट्रिक को नॉर्मल कार से अलग पहचानना और भी मुश्किल है. इसका स्टीयरिंग व्हील, डैशबोर्ड, ड्राइव मोड़ सेलेक्टर, सेंटर कंसोल और स्क्रीन सब कुछ जाने-पहचाने से लगते हैं. नॉर्मल मॉडल की तरह ही इसमें 13.7 इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले और 13.1 इंच की टचस्क्रीन मिलने की उम्मीद है. इसके साथ ही इस EV में AI बेस्ड रेंज बताने वाला सिस्टम मिलता है. रेंज रोवर इलेक्ट्रिक के सभी मॉडल्स में एक डिजिटल-ट्विन फीचर स्टैंडर्ड मिलेगा जो बैटरी की सेहत और बाकी जरूरी चीजों पर नजर रखेगा.

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By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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