2028 से केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन, दिल्ली की नई EV नीति लागू दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने नई दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2026 लागू कर दी है. इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को टैक्स में राहत मिलेगी, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी दी जाएगी और आने वाले वर्षों में पेट्रोल, सीएनजी और डीजल वाहनों की जगह धीरे-धीरे ईवी को प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे राजधानी में प्रदूषण कम होगा, चार्जिंग नेटवर्क मजबूत होगा और लोगों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना पहले से आसान बनेगा.
1 जुलाई से लागू हुई नई दिल्ली ईवी नीति
दिल्ली सरकार ने आधिकारिक तौर पर दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2026 अधिसूचित कर दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद इसे उपराज्यपाल की स्वीकृति भी मिल गई. नई नीति 1 जुलाई 2026 से लागू हो गई है और यह 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी.
सरकार का कहना है कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना, वायु प्रदूषण कम करना और साफ-सुथरे परिवहन तंत्र को बढ़ावा देना है.
इलेक्ट्रिक कार खरीदारों को मिलेगा बड़ा फायदा
नई नीति के तहत जिन इलेक्ट्रिक कारों की एक्स-शोरूम कीमत 30 लाख रुपये या उससे कम होगी, उन्हें सड़क कर (रोड टैक्स) और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी छूट मिलेगी. इससे नई ईवी खरीदने वालों की शुरुआती लागत काफी कम हो जाएगी.
सरकार का मानना है कि टैक्स में यह राहत मिड-सेगमेंट ईवी कारों की बिक्री बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी.
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सब्सिडी और पेट्रोल वाहनों पर बड़ा फैसला
दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को भी नई नीति का बड़ा हिस्सा बनाया है. इसके तहत ईवी खरीदने वाले ग्राहकों को पहले वर्ष 30,000 रुपये, दूसरे वर्ष 20,000 रुपये और तीसरे वर्ष 10,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी.
इसके साथ ही सरकार ने पेट्रोल और सीएनजी दोपहिया वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना भी बनाई है. नई नीति के अनुसार 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का ही नया पंजीकरण किया जाएगा.
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ऑटो-रिक्शा और चार्जिंग नेटवर्क पर भी रहेगा फोकस
दिल्ली सरकार ने यह भी तय किया है कि 1 जनवरी 2027 से राजधानी में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा का ही नया रजिस्ट्रेशन होगा. इससे सार्वजनिक परिवहन में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है.
सरकार अगले चार वर्षों में लगभग 15,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. इसके तहत पूरे दिल्ली में 30,000 से अधिक ईवी चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए जाएंगे ताकि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो और लोगों को चार्जिंग की परेशानी का सामना न करना पड़े.
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दिल्ली की ईवी रणनीति क्यों है अहम?
देश की राजधानी लंबे समय से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है. ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली यह नीति केवल वाहन खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे स्वच्छ ऊर्जा आधारित बनाना है. यदि चार्जिंग नेटवर्क और सब्सिडी का लाभ सही तरीके से लोगों तक पहुंचता है, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब के रूप में उभर सकती है.
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