पिछले कुछ वर्षों में कार खरीदने वालों की पसंद में बड़ा बदलाव आया है. अब लोग सिर्फ माइलेज या फीचर्स नहीं देखते, बल्कि ऐसी कार चाहते हैं जो सड़क पर दमदार दिखे और प्रीमियम वाली फीलिंग दे. यही वजह है कि नई कारों का डिजाइन लगातार बदल रहा है. लेकिन इस बदलाव के साथ एक नयी चुनौती भी सामने आ रही है. आज की कारें सिर्फ लंबी या ऊंची ही नहीं हो रही हैं, बल्कि उनकी चौड़ाई भी तेजी से बढ़ रही है. इसका असर अब रोजमर्रा की ड्राइविंग और पार्किंग में साफ दिखाई देने लगा है.
पार्किंग में बढ़ रही मुश्किल
कई साल पहले तक बड़ी लग्जरी सेडान कारों को भी पार्क करना कुछ आसान माना जाता था. लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. नयी एसयूवी और सेडान पहले से ज्यादा चौड़ी हो गई हैं, जिससे पुराने पार्किंग स्लॉट छोटे लगने लगे हैं.
कार को पार्क करते समय अब ड्राइवर को शीशे मोड़ने, सटीक एंगल बनाने और दोनों तरफ पर्याप्त जगह छोड़ने पर पहले से ज्यादा ध्यान देना पड़ता है. यही कारण है कि कई नई कारें आकार में बहुत बड़ी न होने के बावजूद पार्किंग के दौरान ज्यादा चुनौतीपूर्ण महसूस होती हैं.
क्यों बढ़ रही है कारों की चौड़ाई?
ऑटोमोबाइल कंपनियां अब ऐसे डिजाइन पर जोर दे रही हैं जो कार को मजबूत, प्रीमियम और आकर्षक दिखाए. चौड़ा स्टांस, बड़े व्हील, फ्लैट बोनट और मस्कुलर बॉडी लाइनें कार को सड़क पर ज्यादा प्रभावशाली बनाती हैं.
भारतीय ग्राहकों में भी रोड प्रेजेंस का क्रेज तेजी से बढ़ा है. चौड़ी कारें देखने में अधिक महंगी और प्रीमियम लगती हैं. यही वजह है कि निर्माता लगभग हर सेगमेंट में चौड़े डिजाइन को अपनाने लगे हैं.
लंबाई से ज्यादा चौड़ाई डाल रही असर
कार की लंबाई बढ़ने पर ड्राइवर कुछ समय में उसकी आदत डाल लेता है. लेकिन चौड़ाई बढ़ने का असर हर दिन महसूस होता है. संकरी गलियां, बेसमेंट पार्किंग, अपार्टमेंट पार्किंग स्लॉट और भीड़भाड़ वाले बाजारों में चौड़ी कारें चलाना और खड़ा करना अधिक मुश्किल हो जाता है.
भारत का अधिकांश शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर कई साल पहले तैयार हुआ था, जब वाहन अपेक्षाकृत छोटे होते थे. ऐसे में आधुनिक चौड़ी कारें मौजूदा ढांचे के साथ पूरी तरह फिट नहीं बैठतीं.
एसयूवी ट्रेंड ने बढ़ाया बदलाव
भारत में एसयूवी की लोकप्रियता ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है. आज छोटी एसयूवी भी खुद को बड़ी और दमदार दिखाने की कोशिश करती हैं. चौड़ा फ्रंट, उभरे हुए व्हील आर्च और मजबूत बॉडी डिजाइन अब लगभग हर नये मॉडल में दिखाई देता है.
धीरे-धीरे यही डिजाइन भाषा हैचबैक और सेडान कारों तक भी पहुंच गई है. नतीजा यह हुआ कि शहरों के लिए बनाई गई कारें भी पहले की तुलना में ज्यादा चौड़ी दिखने और महसूस होने लगी हैं.
तकनीक दे रही राहत
कार कंपनियां भी इस चुनौती को समझ रही हैं. यही कारण है कि अब 360-डिग्री कैमरा, पार्किंग सेंसर, ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग और सेल्फ-पार्किंग जैसे फीचर्स तेजी से आम होते जा रहे हैं.
ये तकनीक ड्राइवर को तंग जगहों में कार संभालने में मदद करती हैं. दिलचस्प बात यह है कि आधुनिक कार डिजाइन से पैदा हुई समस्या का समाधान भी अब तकनीक के जरिये ही किया जा रहा है.
बदलती कारों के साथ बदलनी होगी सोच
नयी कारें पहले से ज्यादा सुरक्षित, प्रीमियम और फीचर-लोडेड हो चुकी हैं. लेकिन इनके बढ़ते आकार और चौड़ाई ने भारतीय सड़कों और पार्किंग ढांचे के सामने नयी चुनौती खड़ी कर दी है. आने वाले वर्षों में यह सवाल और महत्वपूर्ण होगा कि क्या हमारे शहर और पार्किंग स्पेस भविष्य की चौड़ी कारों के लिए तैयार हैं.
यह भी पढ़ें: 10 साल तक बदलने की जरूरत नहीं, ऐसी हैं ₹15 लाख से सस्ती ये 5 कारें
यह भी पढ़ें: Fortuner से Brezza तक, भारत में सबसे ज्यादा रीसेल वैल्यू देने वाली 5 SUVs
