गाड़ी का इंश्योरेंस खरीद रहे हैं? जान लें 5 ऐसे टर्म्स जो हर ड्राइवर को पता होने चाहिए

Car Insurance Buying Guide: गाड़ी का इंश्योरेंस लेते समय अक्सर सिर घूम जाता है, लेकिन टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं. आज हम आपको 5 ऐसे जरूरी इंश्योरेंस टर्म्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें हर ड्राइवर को पता होना चाहिए. इन्हें जानकर आप सही कवर चुन पाएंगे और क्लेम पर झटका भी नहीं लगेगा.

Car Insurance Buying Guide: गाड़ी का इंश्योरेंस हर कार मालिक के लिए जरूरी है. लेकिन सच कहूं तो ये थोड़ा उलझाने वाला भी होता है. पॉलिसी के कागजों में इतने टेक्निकल शब्द होते हैं कि अगर आप पहली बार इंश्योरेंस ले रहे हैं तो सिर घूम जाए. लेकिन घबराने की कोई बात नहीं. अगर आप कुछ जरूरी बातें समझ लेंगे, तो सही कवर चुनना और क्लेम के टाइम कोई झटका ना लगना आसान हो जाएगा. तो आइए, जानते हैं 5 ऐसे कॉमन कार इंश्योरेंस टर्म्स बिलकुल आसान भाषा में.

डिडक्टिबल (Deductible)

एक शब्द जो आप अक्सर सुनेंगे वो है डिडक्टिबल. आसान शब्दों में समझें तो ये वो रकम है जो हर बार क्लेम करने पर आपको अपनी जेब से चुकानी पड़ती है. जैसे मान लीजिए आपका डिडक्टिबल ₹500 है और रिपेयर का बिल आया ₹2,000, तो आप पहले ₹500 देंगे और बाकी के ₹1,500 इंश्योरर उठाएगा.

अब सवाल आता है कि ज्यादा डिडक्टिबल लेना ठीक है या कम? दरअसल, ज्यादा डिडक्टिबल चुनो तो प्रीमियम कम होता है, और कम डिडक्टिबल रखने पर प्रीमियम बढ़ जाता है. यानी अपफ्रंट पैसे बचाना और क्लेम पर खर्च बढ़ना, ये दोनों चीजों का संतुलन बनाना पड़ता है.

भारत में हर कार इंश्योरेंस पॉलिसी में IRDAI के हिसाब से मैनडेटरी डिडक्टिबल तय होता है. 1,500cc से कम वाली कार में ये ₹1,000 और 1,500cc से ऊपर वाली कार में ₹2,000 होता है. इसके अलावा, अगर आप चाहो तो इंश्योरर वॉलंटरी डिडक्टिबल भी ऑफर करते हैं. यानी थोड़ा ज्यादा अपनी जेब से डालो और प्रीमियम कर लो.

प्रीमियम (Premium)

प्रीमियम वो रकम होती है जो आप अपनी इंश्योरेंस कंपनी को अपने पॉलिसी को चालू रखने के लिए देते हैं. इसे आप साल में एक बार या फिर किस्तों में भी भर सकते हैं. प्रीमियम कितना होगा ये कई चीजों पर डिपेंड करता है. जैसे आपकी उम्र, ड्राइविंग हिस्ट्री, शहर, कार का टाइप और कार कितनी पुरानी है. आसान भाषा में कहें तो, जितना ज्यादा रिस्क, उतना ज्यादा प्रीमियम. अगर आप ये समझ जाएं कि आपके प्रीमियम को क्या-क्या चीजें असर डालती हैं, तो आपको ये भी समझ आएगा कि कैसे दो लोग जिनकी कारें एक जैसी हैं, उन्हें अलग-अलग प्रीमियम देना पड़ सकता है.

लायबिलिटी कवरेज (Liability coverage)

लायबिलिटी कवरेज को तीसरे पक्ष का इंश्योरेंस भी कहते हैं. यह हर कार वाले को पता होना चाहिए क्योंकि ये इंडिया में कानून के हिसाब से जरूरी है. इसका मतलब ये है कि अगर आपकी गलती से किसी और की कार या प्रॉपर्टी को नुकसान हो जाए या किसी को चोट लगे, तो ये इंश्योरेंस आपके पैसे बचाता है. इसमें बॉडीली इंजरी लाइबिलिटी शामिल है. यह इलाज और मेडिकल खर्चों का ध्यान रखता है, और प्रॉपर्टी डैमेज लाइबिलिटी, जो किसी और की गाड़ी या प्रॉपर्टी को हुए नुकसान का पैसा देता है. लेकिन हां, आपकी अपनी कार का नुकसान ये कवर नहीं करता.

कंप्रिहेंसिव कवरेज (Comprehensive coverage) 

कंप्रिहेंसिव कवरेज यानी फुल कवरेज लेना जरूरी तो नहीं है, लेकिन लेना बड़ा ही बढ़िया आइडिया है. ये इंश्योरेंस आपकी गाड़ी को उन नुकसानों से भी बचाता है जो एक्सीडेंट में नहीं होते. मतलब चोरी, आग, बाढ़, भूकंप, जानवरों से हुए नुकसान या कोई शरारती इंसान जो गाड़ी को नुक्सान पहुंचा दे, सब कवर हो जाता है. और हां, अगर आपकी कार फाइनेंस या लीज पर है, तो बीमा कंपनी या बैंक अक्सर इसे लेना मस्ट कर देती है.

कोलिजन कवरेज (Collision Coverage)

आखिर में बात करते हैं कोलिजन कवरेजकी. ये कवर उस समय काम आता है जब आपकी गाड़ी एक्सीडेंट में डैमेज हो जाए. चाहे एक्सीडेंट में किसकी गलती हो. मतलब अगर आपकी गाड़ी किसी और कार से टकरा जाए, किसी चीज से टकरा जाए या पलट ही जाए, तो ये पॉलिसी रिपेयर का खर्चा उठाती है.

जरूरी नहीं कि हर किसी के लिए हो, लेकिन नयी गाड़ियों के लिए ये बड़ा काम का है. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके रिपेयर के खर्चे आसमान छू सकते हैं. वैसे भारत में ऐसा कोई अलग से पॉलिसी नहीं मिलता. ये आमतौर पर कंप्रिहेंसिव कवरेज के अंदर ही शामिल होता है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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