6 Airbags और ADAS तो ले लिया, पर क्या आपकी कार में Crumple Zones सही हैं? जानें सेफ्टी का ये जरूरी सच

नई कार खरीदते समय सिर्फ एयरबैग्स और ADAS पर ध्यान देना काफी नहीं है. आपकी सुरक्षा का असली हीरो कार का क्रम्पल जोन होता है, जिसके बारे में ज्यादातर लोग अनजान हैं. जानिए क्या है यह फीचर और आपकी कार कितनी सुरक्षित है.

आजकल जब भी कोई नई कार खरीदने जाता है, तो सबसे पहले यही पूछता है, कि इसमें कितने एयरबैग्स हैं? क्या इसमें ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) फीचर है? ऑटो कंपनियां भी इन फीचर्स का जमकर प्रचार करती हैं. लेकिन सच यह है कि आपकी जान सिर्फ एयरबैग्स या हाई-टेक कैमरों से नहीं बचती. कार की मजबूती और आपकी सुरक्षा का असली हीरो क्रम्पल जोन (Crumple Zone) होता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. आइए इसके बारे में हम आपको बताते हैं. 

क्या होता है क्रम्पल जोन?

क्रम्पल जोन कार के आगे और पीछे का वो हिस्सा होता है, जो एक्सीडेंट के समय खुद पिचक जाता है. हालांकि, कार का पिचकना कोई खराबी नहीं, बल्कि एक सुरक्षा तकनीक है. जब तेज रफ्तार कार किसी चीज से टकराती है, तो बहुत भारी झटका यानि काइनेटिक एनर्जी पैदा होता है. अगर कार का आगे का हिस्सा बिल्कुल सख्त लोहे का होगा और नहीं पिचकेगा, तो वो पूरा झटका सीधे अंदर बैठे यात्रियों को लगेगा. इससे अंदर बैठे लोगों की गर्दन, छाती और सिर में गंभीर चोट आ सकती है. क्रम्पल जोन उस झटके को खुद सोख लेता है और अंदर बैठे लोगों तक असर को बहुत कम कर देता है.

एयरबैग्स और ADAS अकेले क्यों काफी नहीं हैं?

एयरबैग्स का काम सिर्फ इतना है कि टक्कर के वक्त आपका सिर डैशबोर्ड या स्टेयरिंग से न टकराए. लेकिन अगर कार का केबिन (अंदर बैठने वाली जगह) ही पिचक गया या टूट गया, तो एयरबैग्स भी आपको नहीं बचा पाएंगे. वहीं, ADAS आपको एक्सीडेंट से बचाने की कोशिश करता है, जैसे अपने आप ब्रेक लगाना या लेन बदलना. लेकिन अगर किसी वजह से टक्कर हो ही जाए, तो आपको सिर्फ कार की मजबूती ही बचा सकती है. इसलिए 6 एयरबैग्स और ADAS होने के बाद भी कार का क्रम्पल जोन सही होना बेहद जरूरी है.

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कैसे पता करें कि आपकी कार सुरक्षित है?

कार कंपनियों के सिर्फ दावे पर न जाएं. किसी भी कार की असली मजबूती जानने का सबसे आसान तरीका है उसकी NCAP सेफ्टी रेटिंग. भारत में अब Bharat-NCAP और ग्लोबल लेवल पर Global-NCAP कारों का क्रैश टेस्ट करते हैं.

इस टेस्ट में कार को स्पीड में दीवार से टकराया जाता है और देखा जाता है कि क्रम्पल जोन ने झटका सही से सोखा या नहीं, और अंदर बैठे डमी पुतलों को कितनी चोट आई. 5-स्टार रेटिंग वाली कारों का क्रम्पल जोन और केबिन स्ट्रक्चर सबसे मजबूत माना जाता है.

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कार खरीदते समय क्या ध्यान रखें?

सिर्फ टचस्क्रीन, सनरूफ या एयरबैग्स की गिनती देखकर कार न चुनें. हमेशा चेक करें कि जिस कार को आप ले रहे हैं, उसकी क्रैश टेस्ट रेटिंग क्या है. याद रखें, एक्सीडेंट के वक्त कार का बाहर से पिचकना अच्छा है, लेकिन अंदर का केबिन सही-सलामत रहना चाहिए. सही जानकारी के साथ चुनी गई कार ही आपको और आपके परिवार को रास्ते पर सुरक्षित रख सकती है.


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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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