गर्मियों में कार का AC सिर्फ आराम नहीं, बल्कि जरूरत बन जाता है. लेकिन तेज धूप, ट्रैफिक और धूल की वजह से इसका असर धीरे-धीरे कम होने लगता है. हालांकि, AC की ये दिक्कत अचानक नहीं आती. कई बार AC पहले ही संकेत देने लगता है, जैसे कमजोर एयरफ्लो, कम कूलिंग या अजीब बदबू, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में अगर समय रहते सही देखभाल की जाए, तो कार का AC लंबे समय तक शानदार कूलिंग देते रहेगा. यहां जानिए कुछ आसान टिप्स, जिसकी मदद से AC को लंबे समय तक दमदार और ठंडा रखा जा सकता है.
कैसे काम करता है कार का AC सिस्टम?
कार का AC सिस्टम रेफ्रिजरेंट गैस की मदद से काम करता है. यह गैस कंप्रेस होकर गर्मी बाहर निकालती है और फिर इवेपोरेटर के जरिए केबिन की गर्म हवा को ठंडी करती है. इसके बाद ब्लोअर उस ठंडी हवा को कार के अंदर पहुंचाता है. इसी एयरफ्लो के बीच में केबिन एयर फिल्टर होता है, जो धूल और गंदगी को रोकता है.
अगर रेफ्रिजरेंट कम हो जाए, फिल्टर गंदा हो या कंडेंसर में धूल जम जाए, तो AC की कूलिंग कम होने लगती है. इसलिए सिस्टम के हर हिस्से का सही तरीके से काम करना जरूरी है.
AC ऑन करने से पहले कार को वेंटिलेट करें
धूप में खड़ी कार के अंदर का तापमान 50 से 60 डिग्री तक पहुंच सकता है. ऐसे में कार स्टार्ट करते ही AC को फुल स्पीड पर चलाना सिस्टम पर ज्यादा दबाव डालता है. ऐसे में बेहतर तरीका यह है कि पहले सभी खिड़कियां खोल दें. अगर सनरूफ है तो उसे भी खोलें. एक-दो मिनट तक गर्म हवा बाहर निकलने दें. इसके बाद खिड़कियां बंद करके AC चालू करें. इससे केबिन जल्दी ठंडा होगा और कंप्रेसर पर कम दबाव पड़ेगा.
शुरुआत में फैन स्पीड कम रखें
अक्सर लोग AC ऑन करते ही ब्लोअर को हाई स्पीड पर चला देते हैं, लेकिन इससे शुरुआत में गर्म हवा ही ज्यादा बाहर आती है. इसलिए पहले फैन स्पीड लो या मीडियम रखें. जब वेंट्स से अच्छी ठंडी हवा आने लगे, तब जरूरत के हिसाब से स्पीड बढ़ाएं. इससे कूलिंग बेहतर होती है और सिस्टम पर कम लोड पड़ता है.
रीसर्क्युलेशन मोड का सही इस्तेमाल करें
कार के AC में दो मोड होते हैं एक फ्रेश एयर और दूसरा रीसर्क्युलेशन. जब केबिन ठंडा हो जाए, तब रीसर्क्युलेशन मोड इस्तेमाल करना बेहतर रहता है. इसमें सिस्टम बाहर की गर्म हवा की बजाय अंदर की पहले से ठंडी हवा को दोबारा ठंडा करता है. इससे कूलिंग तेजी से बनी रहती है और फ्यूल की बचत भी होती है. हालांकि, इसे लगातार लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे केबिन की हवा बंद और भारी लग सकती है.
रेफ्रिजरेंट लेवल की जांच जरूरी
रेफ्रिजरेंट AC सिस्टम की सबसे अहम चीजों में से एक है. समय के साथ इसमें लीकेज हो सकता है, जिससे कूलिंग कमजोर होने लगती है. कई बार यह बदलाव धीरे-धीरे होता है और लोगों को देर से पता चलता है. गर्मी शुरू होने से पहले साल में कम से कम एक बार रेफ्रिजरेंट लेवल जरूर चेक करवाना चाहिए. अगर लीकेज हो, तो सिर्फ गैस भरवाने की बजाय पहले उसे ठीक करवाना जरूरी है.
केबिन एयर फिल्टर समय पर बदलें
सड़कों पर धूल ज्यादा होने की वजह से केबिन एयर फिल्टर जल्दी गंदा हो जाता है. गंदा फिल्टर एयरफ्लो कम कर देता है, जिससे AC की हवा कमजोर लगने लगती है.
ऐसे में हर 6 महीने में फिल्टर की जांच करवाना अच्छा रहता है. अगर फिल्टर बहुत ज्यादा गंदा दिखे, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए.
कंडेंसर की सफाई भी जरूरी
कंडेंसर कार के फ्रंट हिस्से में लगा होता है और इसका काम गर्मी को बाहर निकालना होता है. अगर इसमें धूल, मिट्टी या कीड़े फंस जाएं, तो कूलिंग पर असर पड़ता है.
इसलिए AC सर्विस के दौरान कंडेंसर की सफाई जरूर करवानी चाहिए. इससे सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है.
गर्मी शुरू होने से पहले AC सर्विस कराएं
ज्यादातर लोग तब सर्विस करवाते हैं जब AC खराब होने लगता है, जबकि सही समय फरवरी या मार्च होता है. गर्मियों में सर्विस सेंटर पर काफी भीड़ होती है और कई बार पार्ट्स भी आसानी से नहीं मिलते. एक अच्छी AC सर्विस में रेफ्रिजरेंट चेक करना, कंप्रेसर की जांच, कंडेंसर और इवेपोरेटर की सफाई, फिल्टर बदलना और सिस्टम टेस्टिंग शामिल होनी चाहिए.
बदबू को नजरअंदाज न करें
अगर AC वेंट्स से सीलन जैसी बदबू आए, तो यह फंगस या फफूंदी का संकेत हो सकता है. वहीं मीठी या केमिकल जैसी गंध रेफ्रिजरेंट लीकेज की ओर इशारा करती है. ऐसी समस्या से बचने के लिए गाड़ी बंद करने से कुछ मिनट पहले AC ऑफ कर दें, लेकिन फैन चालू रखें. इससे इवेपोरेटर सूख जाता है और नमी जमा नहीं होती.
धूप में पार्किंग से बचें
सीधी धूप में खड़ी कार के अंदर बहुत ज्यादा गर्मी जमा हो जाती है, जिसे ठंडा करने में AC को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. ऐसे में कार को छांव में पार्क करें. अगर ऐसा संभव न हो, तो विंडशील्ड सनशेड का इस्तेमाल करें. इससे डैशबोर्ड और सीटें ज्यादा गर्म नहीं होतीं.
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