भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का बाजार अब सिर्फ शुरुआती दौर में नहीं है, बल्कि यह तेजी से बड़े औद्योगिक बदलाव की तरफ बढ़ रहा है. आने वाले वर्षों में देश में ईवी बैटरी की डिमांड में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है. उद्योग संगठन इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईईएसए) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2032 तक भारत में ईवी बैटरी की मांग करीब 10 गुना बढ़कर 200 गीगावॉट-घंटा तक पहुंच सकती है. फिलहाल 2025 में यह मांग लगभग 20 गीगावॉट-घंटा के आसपास बताई गई है. यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर आने वाले समय में बड़े इलेक्ट्रिक ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ बढ़ रहा है.
सिर्फ ईवी नहीं, पूरी सप्लाई चेन में बड़ा मौका
आईईएसए ने अपनी स्टडी में कहा है कि भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर केवल इलेक्ट्रिक वाहन बेचने में नहीं, बल्कि बैटरी, मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य कलपुर्जों के लोकल मैन्युफैक्चरिंग में है. अगर भारत सप्लाई चेन को मजबूत करने में सफल होता है, तो देश ग्लोबल ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईवी सेक्टर अब नीति आधारित शुरुआती चरण से निकलकर एक मजबूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम का रूप ले चुका है. इसमें बैटरी निर्माण से लेकर चार्जिंग टेक्नोलॉजी और कंपोनेंट सप्लाई तक कई नए अवसर बन रहे हैं.
दोपहिया ईवी अभी आगे, लेकिन कारों की डिमांड बढ़ाएगी रफ्तार
रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल भारतीय ईवी बाजार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की है. वर्ष 2025 में देश में 25 लाख से ज्यादा ईवी यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई, जिनमें लगभग 15 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स और करीब 7 लाख इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स शामिल रहे.
हालांकि आने वाले वर्षों में पैसेंजर व्हीकल्स और हल्के कमर्शियल वाहनों की डिमांड तेजी से बढ़ सकती है. माना जा रहा है कि फैमिली कार सेगमेंट और डिलीवरी नेटवर्क में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ने से बैटरी की जरूरत कई गुना बढ़ जाएगी.
लोकल बैटरी निर्माण पर रहेगा पूरा फोकस
आईईएसए के अध्यक्ष देबमाल्य सेन के अनुसार, भारत का ईवी बाजार बहुत तेजी से विस्तार कर रहा है और 2032 तक बैटरी डिमांड में 10 गुना उछाल देखने को मिल सकता है. उन्होंने कहा कि इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए देश को लोकल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, नई बैटरी टेक्नोलॉजी और मजबूत सप्लाई नेटवर्क पर तेजी से काम करना होगा.
सरकार भी पहले से पीएलआई स्कीम और लोकल सेल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर काम कर रही है. ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत में बैटरी प्लांट्स और ईवी कंपोनेंट इंडस्ट्री में बड़े निवेश देखने को मिल सकते हैं.
भारत बन सकता है ग्लोबल ईवी हब
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत समय रहते बैटरी निर्माण और रॉ मटेरियल सप्लाई चेन को मजबूत कर लेता है, तो वह केवल घरेलू बाजार ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी बड़ा एक्सपोर्ट सेंटर बन सकता है. चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही कई वैश्विक कंपनियां भारत को नए विकल्प के रूप में देख रही हैं.
आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. यही वजह है कि अब ऑटो कंपनियों से लेकर बैटरी मैन्युफैक्चरर्स तक, सभी भारत को भविष्य के बड़े बाजार के रूप में देख रहे हैं.
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