भारत में बनी कारों की मजबूत क्वॉलिटी और बेहतर सेफ्टी को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है, लेकिन अब टोयोटा की एक ऐसी कार सामने आई है जिसने ग्लोबल क्रैश टेस्ट में बेहद खराब प्रदर्शन किया है. अफ्रीकी बाजार में बिकने वाली टोयोटा स्टारलेट को ग्लोबल एनकैप क्रैश टेस्ट में जीरो स्टार रेटिंग मिली है. खास बात यह है कि यह कार भारत में तैयार होती है और मारुति सुजुकी बलेनो के रीबैज्ड वर्जन के तौर पर बेची जाती है. रिपोर्ट सामने आने के बाद से सेफ्टी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
टोयोटा स्टारलेट आखिर कौन सी कार है
टोयोटा स्टारलेट दरअसल मारुति सुजुकी बलेनो पर आधारित मॉडल है, जिसे टोयोटा अफ्रीका समेत कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने बैज के साथ बेचती है. टोयोटा और सुजुकी की साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां कुछ मॉडलों को रीबैज करके अलग-अलग बाजारों में उतारती हैं. भारत में जहां यही कार टोयोटा ग्लैंजा नाम से मिलती है, वहीं अफ्रीका में इसे स्टारलेट कहा जाता है.
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ग्लोबल क्रैश टेस्ट में क्यों फेल हुई कार
ग्लोबल एनकैप की रिपोर्ट के अनुसार टोयोटा स्टारलेट को एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन में जीरो स्टार मिले हैं, जबकि चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन में इसे तीन स्टार रेटिंग दी गई. टेस्ट के दौरान कार में बैठे यात्रियों के सिर और सीने की सुरक्षा कमजोर पाई गई. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि साइड इम्पैक्ट के दौरान कार पर्याप्त सुरक्षा देने में असफल रही.
हालांकि कार ने पूरी तरह खराब स्कोर नहीं किया. एडल्ट प्रोटेक्शन में इसे 49 में से 34 अंक और चाइल्ड प्रोटेक्शन में 29.33 अंक मिले, लेकिन सेफ्टी मानकों के हिसाब से यह स्कोर पर्याप्त नहीं माना गया.
साइड एयरबैग की कमी बनी बड़ी वजह
रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीकी बाजार में बिकने वाली टोयोटा स्टारलेट के टॉप वेरिएंट में भी साइड एयरबैग नहीं दिए जाते. कार में केवल ड्राइवर और फ्रंट पैसेंजर एयरबैग मिलते हैं. इसके अलावा ईएससी और आइसोफिक्स जैसे फीचर्स जरूर मौजूद हैं, लेकिन आधुनिक सेफ्टी फीचर्स की कमी इसका बड़ा नुकसान साबित हुई.
विशेषज्ञों का मानना है कि अब ग्राहक सिर्फ माइलेज और फीचर्स नहीं बल्कि सेफ्टी को भी प्राथमिकता दे रहे हैं. ऐसे में कंपनियों के लिए ग्लोबल स्तर पर बेहतर सुरक्षा देना बेहद जरूरी हो गया है.
भारत में बलेनो का प्रदर्शन रहा बेहतर
दिलचस्प बात यह है कि भारत में टेस्ट की गई मारुति सुजुकी बलेनो ने क्रैश टेस्ट में चार स्टार रेटिंग हासिल की थी. उस मॉडल में बेहतर हेड और नेक प्रोटेक्शन देखने को मिला था. इससे यह साफ होता है कि अलग-अलग बाजारों में मिलने वाले मॉडल्स के सेफ्टी फीचर्स और स्ट्रक्चर में बदलाव हो सकते हैं.
पहले भी सवालों में रही थी यह कार
यह पहली बार नहीं है जब स्टारलेट की सेफ्टी पर सवाल उठे हों. इससे पहले लैटिन एनकैप टेस्ट में भी इस कार का प्रदर्शन कमजोर रहा था. शुरुआती टेस्ट में इसे सिर्फ एक स्टार मिला था, जिसे बाद में कुछ अतिरिक्त फीचर्स जोड़ने के बाद दो स्टार तक अपग्रेड किया गया.
अब ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सभी बाजारों में एक जैसी सेफ्टी स्टैंडर्ड्स लागू होनी चाहिए.
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