Red Number Plate: क्या आपने कभी सड़कों पर किसी कार को लाल नंबर प्लेट के साथ देखा है और सोचा है कि इसका मतलब आखिर होता क्या है? अक्सर लोग ऐसी गाड़ियां खासकर शोरूम के आसपास या हाईवे पर देखते हैं. लेकिन इसके पीछे का असली नियम बहुत कम लोग जानते हैं. दरअसल, भारत के ट्रांसपोर्ट नियमों के अनुसार लाल नंबर प्लेट उन नई गाड़ियों को दी जाती है जिनकी अभी परमानेंट रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी नहीं हुई होती.
इसे एक तरह की टेम्पररी रजिस्ट्रेशन प्लेट माना जाता है. इससे नई खरीदी गई गाड़ी को कानूनी तौर पर सीमित समय के लिए सड़क पर चलाया जा सकता है. आमतौर पर यह सुविधा लगभग 1 महीने तक वैलिड होती है. इस दौरान RTO में सभी जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है. इसके बाद गाड़ी को फाइनल नंबर प्लेट जारी कर दी जाती है. आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं.
भारत में लाल नंबर प्लेट का कानूनी रूप से कौन यूज कर सकता है?
जब भी कोई नई गाड़ी खरीदी जाती है, तो उसे तुरंत परमानेंट नंबर प्लेट नहीं मिलती. ऐसे में डीलर की तरफ से उसे एक अस्थायी (temporary) रजिस्ट्रेशन दिया जाता है, और उसी के तहत लाल नंबर प्लेट लगाई जाती है. यह लाल प्लेट नई गाड़ियों के लिए ही होती है और इसे तभी इस्तेमाल किया जा सकता है जब वैध टेम्पररी रजिस्ट्रेशन मंजूर हुआ हो. गाड़ी की डिलीवरी के समय अक्सर डीलर ही यह पूरा प्रोसेस करवा देता है.
इस प्लेट पर आमतौर पर लाल बैकग्राउंड होता है और उस पर सफेद रंग में नंबर और अक्षर लिखे होते हैं. कुछ लग्जरी या इम्पोर्टेड गाड़ियों में तो फाइनल रजिस्ट्रेशन पूरा होने तक टेम्पररी स्टिकर भी लगाए जाते हैं. लेकिन ट्रैफिक एक्सपर्ट्स साफ चेतावनी देते हैं कि यह लाल नंबर प्लेट सिर्फ कुछ समय के लिए होती है, इसे लंबे समय तक यूज नहीं किया जा सकता.
जैसे ही इसकी वैलिडिटी खत्म होती है, गाड़ी मालिक को RTO से जारी परमानेंट नंबर प्लेट लगवाना जरूरी होता है. अगर कोई एक्सपायर्ड टेम्पररी प्लेट के साथ गाड़ी चलाता पकड़ा जाता है, तो उस पर जुर्माना, पेनल्टी या कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
टेम्पररी रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है?
टेम्पररी रजिस्ट्रेशन इसलिए जरूरी होता है क्योंकि भारत में बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ी को पब्लिक रोड पर चलाना गैरकानूनी है. लाल नंबर प्लेट इस बात का सबूत होती है कि गाड़ी खरीदार के नाम पर रिकॉर्ड हो चुकी है, लेकिन उसका फाइनल यानी परमानेंट रजिस्ट्रेशन अभी प्रोसेस में है. इससे ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग को भी आसानी होती है. वे तुरंत पहचान सकते हैं कि यह नई खरीदी गई गाड़ी है.
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