केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026–27 पेश करते हुए एक अहम घोषणा की है. अब मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए ब्याज पर आयकर नहीं लगेगा और इस पर टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा. इसका मतलब है कि पीड़ितों को पूरा मुआवज़ा सीधे मिलेगा, बिना किसी कटौती के.
क्या है नया प्रावधान
अब तक MACT द्वारा दिए गए ब्याज पर आयकर विभाग टीडीएस काट लेता था. कई बार पीड़ित आयकर दाता नहीं होते थे, जिससे उन्हें रिफंड पाने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ताथा. बजट 2026 में सरकार ने साफ कर दिया है कि यह ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा और टीडीएस की बाध्यता खत्म कर दी जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों से इस मुद्दे पर न्यायिक बहस चल रही थी. 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्यों दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे से टीडीएस काटा जा रहा है. 2024 में कोर्ट ने सरकार और आयकर विभाग से विस्तृत राय मांगी थी कि क्या 50,000 रुपये से अधिक ब्याज पर टीडीएस लागू होना चाहिए. मामला अभी विचाराधीन था, लेकिन बजट 2026 ने इस पर निर्णायक नीति बना दी.
पीड़ितों को सीधा फायदा
- पूरा मुआवजा बिना कटौती मिलेगा
- रिफंड के लिए आयकर विभाग के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे
- वित्तीय सुरक्षा और न्याय की प्रक्रिया तेज होगी
- सरकार ने सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी है.
सरकार का संदेश
यह कदम दिखाता है कि सरकार वित्तीय नीतियों को नागरिक कल्याण से जोड़ना चाहती है. दुर्घटना पीड़ितों को राहत देना केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का भी हिस्सा है.
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