भारत टैक्सी लॉन्च: सुरक्षा, सस्ती सवारी और ड्राइवरों का हक; जानिए खास बातें

भारत टैक्सी सहकारी मॉडल पर आधारित नया ऐप है जहां ड्राइवर हिस्सेदार हैं. बिना सर्ज प्राइसिंग, कम किराया और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं के साथ यह ऊबर-ओला को सीधी चुनौती देता है

भारत में कैब हाइलिंग सेक्टर (टैक्सी सर्विस) लंबे समय से ऊबर और ओला जैसे निजी खिलाड़ियों के कब्जे में रहा है. लेकिन अब तस्वीर बदलने जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली-एनसीआर से “भारत टैक्सी” की शुरुआत की है. यह ऐप सहकारी (कोऑपरेटिव) मॉडल पर आधारित है, जहां हर ड्राइवर यानी ‘सारथी’ कंपनी का हिस्सा होगा. बिना सर्ज प्राइसिंग और कम किराए के वादे के साथ यह प्लैटफॉर्म यात्रियों और ड्राइवरों दोनों के लिए नया विकल्प पेश कर रहा है.

कोऑपरेटिव मॉडल पर आधारित

भारत टैक्सी का संचालन सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है. इसे मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट के तहत पंजीकृत किया गया है और इसमें IFFCO, अमूल, NABARD जैसी बड़ी सहकारी संस्थाओं का सहयोग है. खास बात यह है कि हर ड्राइवर को शेयरधारक बनाया गया है. यानी वे केवल ऐप का हिस्सा नहीं बल्कि इसके मालिक भी हैं.

ड्राइवरों की कमाई होगी ज्यादा

प्लैटफॉर्म पर कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा. ड्राइवरों को केवल ₹30 का दैनिक शुल्क देना होगा और बाकी किराया सीधे उनकी जेब में जाएगा. इसके अलावा सहकारी सदस्य होने के नाते उन्हें मुनाफे में हिस्सा और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अधिकार मिलेगा. साथ ही स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और रिटायरमेंट सेविंग जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी शामिल हैं.

यात्रियों के लिए राहत

भारत टैक्सी ने शुरुआत से ही सर्ज प्राइसिंग खत्म करने का ऐलान किया है. यानी पीक ऑवर में भी किराया स्थिर रहेगा. अधिकारियों का दावा है कि कमीशन-फ्री मॉडल से यात्रियों को लगभग 30% तक सस्ती सवारी मिल सकती है. सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर 35 सपोर्ट बूथ बनाए गए हैं और ऐप में इमरजेंसी बटन भी दिया गया है.

ऊबर-ओला से अलग पहचान

जहां ऊबर और ओला में ड्राइवर केवल कॉन्ट्रैक्टर होते हैं, वहीं भारत टैक्सी में वे सह-मालिक हैं. यहां प्रति राइड कमीशन नहीं बल्कि तय शुल्क है. यही फर्क इसे निजी कंपनियों से अलग बनाता है और ड्राइवरों को ज्यादा स्वतंत्रता देता है.

बाजार में नई चुनौती

भारत टैक्सी का आगमन निजी एग्रीगेटर्स के लिए सीधी चुनौती है. ड्राइवरों की नाराजगी और यात्रियों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए यह सहकारी मॉडल एक नया विकल्प पेश करता है. दिल्ली-एनसीआर में 2.5 लाख से अधिक वाहन पहले ही जुड़ चुके हैं और आने वाले दो वर्षों में इसे देशभर में विस्तार देने की योजना है.

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By Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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