गर्मी अपने चरम पर पहुंचते ही कार के AC की कमजोर कूलिंग को लेकर शिकायतें बढ़ जाती हैं. ज्यादातर लोग तुरंत मान लेते हैं कि गैस कम हो गई है या AC में कोई बड़ी खराबी आ गई है, इसलिए वे सीधे वर्कशॉप का रुख करते हैं. लेकिन मैकेनिक कुछ और ही कहानी बताते हैं. उनका कहना है कि कई मामलों में AC बिल्कुल ठीक काम कर रहा होता है.
असली असर हमारी अपनी इस्तेमाल और मेंटेनेंस की आदतों का होता है. यानी, कई बार समस्या मशीन में नहीं, बल्कि उसे इस्तेमाल करने के तरीके में छिपी होती है, जो कूलिंग पर सीधा असर डालती है. आइए जानते हैं वे कौन-सी गलतियां हैं, जिन्हें AC चलाते समय आपको नहीं करनी चाहिए.
गाड़ी में बैठते ही AC फुल पर चला देना
अक्सर लोग धूप में खड़ी गाड़ी में बैठते ही AC को सीधे फुल कूलिंग पर चला देते हैं. यही सबसे बड़ी गलती होती है. जब कार का केबिन बहुत ज्यादा गर्म हो चुका होता है, तो अंदर फंसी गरम हवा पहले बाहर निकलनी जरूरी होती है. ऐसे में एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि कुछ सेकंड के लिए खिड़कियां खोलकर गर्म हवा बाहर निकालें, फिर AC ऑन करें. इससे कंप्रेसर पर बेवजह लोड नहीं पड़ता और कार जल्दी व बेहतर तरीके से ठंडी होती है.
रीसर्कुलेशन मोड (Recirculation Mode) का गलत इस्तेमाल
AC की कूलिंग धीमी पड़ने की एक बड़ी वजह रीसर्कुलेशन मोड (Recirculation Mode) का गलत इस्तेमाल भी है. यह फीचर दरअसल बाहर की गर्म हवा खींचने की बजाय केबिन की अंदरूनी हवा को ही घुमाने के लिए बनाया गया है. लेकिन कई लोग तेज गर्मी में भी AC को फ्रेश एयर मोड (Fresh Air Mode) पर ही चलाते रहते हैं. ऐसा करने से सिस्टम बार-बार बाहर की गर्म हवा को ठंडा करने में लगा रहता है, जिससे कूलिंग धीमी हो जाती है.
बेहतर तरीका यह है कि शुरुआत में थोड़ी देर के लिए केबिन को वेंटिलेट कर लें और उसके बाद रीसर्कुलेशन मोड ऑन कर दें. इससे केबिन जल्दी ठंडा होता है और टेम्परेचर भी ज्यादा समय तक आराम से बना रहता है.
केबिन एयर फिल्टर को नजरअंदाज करना
अगर आप केबिन एयर फिल्टर की अनदेखी करते हैं, तो AC की कूलिंग पर सीधा असर पड़ता है. फिल्टर में धूल-मिट्टी और कचरा जमा होने से एयर वेंट्स से हवा का फ्लो कम हो जाता है. नतीजा यह होता है कि AC सही काम कर रहा होता है, फिर भी ठंडक कम महसूस होती है. इसलिए कंपनियां तय सर्विस इंटरवल पर फिल्टर की जांच या बदलाव की सलाह देती हैं. और अगर आप धूल-भरे इलाके में ड्राइव करते हैं, तो इसे और ज्यादा बार चेक करना समझदारी है.
रेगुलर AC सर्विस को टालना
AC की समय-समय पर सर्विस न करवाना भी उसकी परफॉर्मेंस घटा देता है. छोटी-मोटी लीकेज की वजह से रेफ्रिजरेंट धीरे-धीरे कम हो सकता है, वहीं कंप्रेसर और कंडेंसर जैसे पार्ट्स भी समय के साथ घिसते हैं. अगर आप तब तक इंतजार करते हैं जब तक कूलिंग अचानक बहुत कम न हो जाए, तो मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है.
पार्किंग की आदतें
आप अपनी गाड़ी कहां पार्क करते हैं, इससे केबिन का टेम्परेचर काफी हद तक तय होता है. अगर कार लंबे समय तक तेज धूप में खड़ी रहती है, तो अंदर की सतहें गर्मी सोखकर उसे रोक लेती हैं और केबिन भट्टी जैसा गर्म हो जाता है. ऊपर से अगर इंटीरियर गहरे रंग का हो या शीशों में हीट-रिजेक्शन की सुविधा न हो, तो गर्मी और तेजी से जमा होती है. इसलिए कोशिश करें कि गाड़ी छाया में पार्क करें और रिफ्लेक्टिव सनशेड का इस्तेमाल करें.
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