कोरोना की वापसी

यूरोप की स्थिति पर भारत को लगातार नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि अमेरिका और ब्राजील के साथ भारत अभी बड़े पैमाने पर कोरोना संक्रमण की चपेट में है.

यूरोप के अनेक देशों में कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और स्पेन के विभिन्न क्षेत्रों में फिर से कड़े उपाय किये जा रहे हैं. कुछ स्थानों पर पारिवारिक बैठकों और आयोजनों से संक्रमण का प्रसार होने से चिंता बढ़ गयी है. अब तक दुनियाभर में लगभग साढ़े तीन करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई है. यूरोप में संक्रमितों की कुल संख्या 53 लाख से अधिक है और सवा दो लाख से अधिक जानें जा चुकी हैं.

रूस, स्पेन, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली सर्वाधिक प्रभावित देश हैं. यूरोप में और दूसरे महादेशों के कई देशों में सबसे बड़ी मुश्किल की बात यह है कि अभी संक्रमण के पहले चरण को ही ठीक से नियंत्रित नहीं किया जा सका है और लोग अब भी संक्रमित हो रहे हैं. यदि एक बार फिर वायरस का प्रकोप बढ़ता है, तो स्थिति संकटपूर्ण हो सकती है.

यह जरूर है कि अब डॉक्टर और अस्पताल बीमारियों के लक्षणों और उनके गंभीर होने की गति से अच्छी तरह से परिचित हैं तथा उनके पास चिकित्सा का भी अनुभव है, लेकिन ठीक से यह कह पाना आसान नहीं है कि बड़ी संख्या में संक्रमित व्यक्तियों की स्थिति बिगड़ने पर क्या किया जा सकता है? यूरोप की स्थिति पर भारत को लगातार नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि अमेरिका और ब्राजील के साथ भारत अभी बड़े पैमाने पर कोरोना संक्रमण की चपेट में है. अभी तक हमारे देश में संक्रमितों की संख्या 65 लाख से अधिक हो चुकी है और एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

हालांकि वायरस से छुटकारा पानेवालों की संख्या भी बढ़ रही है तथा मरनेवालों की दर भी घट रही है, लेकिन अगर संक्रमण की दूसरी लहर आती है, तो संकट गहरा हो सकता है. देश के कुछ राज्यों में स्थिति विकट है. केरल में फिर से कड़ाई की जा रही है. विभिन्न गतिविधियों में छूट का एक और चरण शुरू हो चुका है. आने वाले दिनों में चुनाव-उपचुनाव के साथ-साथ विभिन्न त्योहार भी आयेंगे. ऐसे में व्यक्तिगत और सामाजिक तौर पर हम सभी को सतर्क रहना है तथा पिछले छह माह से बार-बार बताये जा रहे दिशा-निर्देशों का पालन करना है.

किसी निश्चित दवा या टीका न होने की स्थिति में हमारे पास इसका कोई विकल्प भी नहीं है तथा लंबे समय तक ऐसा ही रहेगा. अभी तक वायरस ने गर्मी और बरसात में कहर ढाया है. जाड़े के दिनों में मौसमी संक्रमणों और बीमारियों के साथ कोविड-19 की उपस्थिति भयावह हो सकती है. अमेरिका में ऐसा हो रहा है और जल्दी ही हम वैसे मौसम का सामना करेंगे. इसलिए बचाव के नियमों और निर्देशों के पालन को हर स्तर पर प्राथमिकता देनी होगी तथा कोरोना महामारी से संक्रमण के मामलों की जांच एवं उपचार के लिए समुचित संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी.

Posted by : Pritish Sahay

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >