पुलिस की दबिश से सरोज ने किया आत्मसर्मपण

सीतामढ़ी/डुमरा कोर्टः उम्र महज 15 या 16 साल. कद-नाटा. उसके हरकत से लोग खौफ खाते हैं. पुलिस के लिए उसे दबोचना आंख मिचौली खेलना भर रह गया है. 10 माह के अंदर वह बाल अपराधी कई बार पकड़ाया और रिमांड होम भी भेजा गया, लेकिन पुलिस और लोगों को इससे चैन नहीं मिली. अपनी नापाक […]

सीतामढ़ी/डुमरा कोर्टः उम्र महज 15 या 16 साल. कद-नाटा. उसके हरकत से लोग खौफ खाते हैं. पुलिस के लिए उसे दबोचना आंख मिचौली खेलना भर रह गया है. 10 माह के अंदर वह बाल अपराधी कई बार पकड़ाया और रिमांड होम भी भेजा गया, लेकिन पुलिस और लोगों को इससे चैन नहीं मिली. अपनी नापाक हरकत से वह जुर्म की दुनिया में दहशत का पर्याय बन गया है.

तीन दिन पूर्व नगर के राजोपट्टी साहू चौक पर श्री राम बजाज के मालिक मनोज कुमार गुप्ता पर जानलेवा हमले में उसकी संलिप्तता का पता चला है. उसने स्वयं मीडियाकर्मियों को फोन कर उक्त हमले में अपनी संलिप्तता बतायी थी तथा यह भी कहा था कि रंगदारी नहीं देने पर उसने उक्त घटना को अंजाम दिया है. अब तक नाबालिग होने का फायदा उठा कर कानून के सख्त शिकंजे से वह बच जाता है. पुलिस को दबोचना और रिमांड होम का चक्कर लगाना कानूनन विवशता बन गयी है. उसकी क्राइम हिस्ट्री को खंगालने पर एक से बढ़ कर एक अपराध की लंबी फेहरिस्त मिलती है.

आधा दर्जन से अधिक हत्या, रंगदारी, फिरौती, जान से मारने की धमकी, आर्म्स एक्ट, विस्फोट समेत कई गंभीर कांडों का वह आरोपित है. उनमें कई हत्या को उसके द्वारा क्रूर तरीके से अंजाम दिया गया है. अपराधियों के बीच विगत वर्ष में छिड़ी गैंगवार में उसे मारपीट कर अधमरा कर दिया था. इलाज के बाद से फिर आपराधिक वारदातों को वह अंजाम देने लगा. दो माह पूर्व उसे बाइपास बस स्टैंड से नगर थाना पुलिस द्वारा रंगदारी मामले में गिरफ्तार किया गया था.

30 जनवरी को व्यवसायी पर हमले के बाद शनिवार को उसने किशोर न्याय परिषद सीतामढ़ी के नीरज कुमार के यहां डुमरा थाना कांड संख्या-50/13, रून्नीसैदपुर थाना कांड संख्या-433/13 एवं सीतामढ़ी थाना कांड संख्या-405/12 में आत्म सर्मपण कर दिया. जहां से उसे पुन: बाल सुधार गृह, मुजफ्फरपुर भेज दिया गया. रिमांड होम में जाने के बाद भी न तो पुलिस के लिए और न हीं लोगों के लिए राहत वाली बात है. रिमांड होम जाने के बाद भी वह एक से दो दिनों में फिर से बाहर आकर कब रंगदारी की मांग कर दे यह कहा नहीं जा सकता है.

सबसे हैरतअंगेज बात यह है कि जिला प्रशासन वर्ष 2012 व 13 में उसे कई बार गिरफ्तार कर सुधार गृह भेज चुकी है, पर उक्त तीनों मामलों में प्रशासन ने उसे उपस्थापित करना या तो भूल गयी अथवा उसकी जरूरत हीं नहीं समझा. रून्नीसैदपुर थाना कांड संख्या-433/13 वही मामला है, जब रून्नीसैदपुर पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान एक लाल रंग की बिना नंबर के अपाचे गाड़ी के साथ गिरफ्तार कर सुधार गृह भेजा था.

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