किसान की आय बढ़े बिना भारत विकसित नहीं बन सकता

Income of Farmers : समस्या यह है कि जिस क्षेत्र में देश का इतना बड़ा मानव संसाधन लगा है, वहां आय बहुत कम है. किसान आय पर राष्ट्रीय स्तर का नवीनतम उपलब्ध सर्वे नाबार्ड का ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वे है, जिसे 2024 में जारी किया गया.

Income of Farmers : भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी सच्चाई गांवों में छिपी है. शहरों में मेट्रो, एक्सप्रेसवे, बड़े अस्पताल और चमकदार बाजार दिखते हैं, लेकिन देश की बड़ी आबादी अब भी खेती और उससे जुड़े कामों पर निर्भर है. ताजा पीएलएफएस (PLFS) 2025 के अनुसार भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु के करीब 61.6 करोड़ लोग काम कर रहे हैं. इनमें से 43 प्रतिशत लोग कृषि क्षेत्र में लगे हैं. यानी लगभग 26.5 करोड़ कामगार सीधे खेती और उससे जुड़े कामों पर निर्भर हैं. यह संख्या किसी भी नीति-निर्माता को यह याद दिलाने के लिए काफी है कि भारत की असली आर्थिक शक्ति खेतों में खड़ी है.

समस्या यह है कि जिस क्षेत्र में देश का इतना बड़ा मानव संसाधन लगा है, वहां आय बहुत कम है. किसान आय पर राष्ट्रीय स्तर का नवीनतम उपलब्ध सर्वे नाबार्ड का ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वे है, जिसे 2024 में जारी किया गया. इसके अनुसार कृषि परिवारों की औसत मासिक आय 13,661 रुपये थी. इसमें भी खेती से आय केवल लगभग एक-तिहाई थी. बाकी आय मजदूरी, नौकरी, पशुपालन या छोटे व्यवसाय से आती है. इसका मतलब साफ है कि किसान केवल खेती करके सम्मानजनक जीवन नहीं चला पा रहा.

कम आय का असर केवल किसान की जेब पर नहीं पड़ता. इसका असर बच्चों की पढ़ाई, परिवार के पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य, घर की स्वच्छता, पीने के पानी, इलाज और जीवन की आकांक्षाओं पर पड़ता है. यही कारण है कि हमारे बहुत से गांव आज भी जीवन-स्तर के मामले में यूरोप के गांवों से बहुत पीछे दिखते हैं. वहां गांव का अर्थ पिछड़ापन नहीं, बल्कि साफ सड़क, बेहतर स्कूल, स्वास्थ्य सेवा, तकनीक, बाजार और सम्मानजनक आय है. भारत में भी गांव को दया का विषय नहीं, विकास का केंद्र बनाना होगा.

विकसित देशों से तुलना करते समय जमीन, मौसम, लागत और सरकारी सहायता के फर्क को समझना जरूरी है. अमेरिका में बड़े व्यावसायिक पारिवारिक खेतों की 2024 में खेती से मध्य आय लगभग 1.75 लाख डॉलर थी. नीदरलैंड में 2025 में कृषि और बागवानी कारोबार की औसत आय प्रति पूर्णकालिक पारिवारिक कामगार लगभग 1.29 लाख यूरो आंकी गई. भारत का छोटा किसान इस स्तर से बहुत दूर है, लेकिन इससे यह सीख मिलती है कि जब खेती को पानी, तकनीक, प्रसंस्करण, भंडारण, निर्यात और मजबूत बाजार से जोड़ा जाता है, तो किसान गरीब उत्पादक नहीं रहता; वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उद्यमी बनता है.

भारत के लिए तीन मॉडल विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं

पहला, इजरायल का जल प्रबंधन मॉडल

कम पानी और कठिन जलवायु के बावजूद इजरायल ने सूक्ष्म सिंचाई, पुनर्चक्रित पानी, नियंत्रित सिंचाई और जल अनुशासन से खेती को उत्पादक बनाया. राजस्थान, बुंदेलखंड, मराठवाड़ा, विदर्भ और गुजरात जैसे क्षेत्रों में यह सोच बेहद उपयोगी हो सकती है.

दूसरा, नीदरलैंड का उच्च मूल्य बागवानी मॉडल

वहां ग्रीनहाउस, बेहतर बीज, नियंत्रित तापमान, पैकेजिंग, कोल्ड चेन और निर्यात व्यवस्था ने छोटे देश को कृषि शक्ति बना दिया. भारत में यह मॉडल सब जगह नहीं, लेकिन सब्जी, फल, फूल, मसाले, औषधीय पौधे और शहरों के पास की खेती में लागू किया जा सकता है.

तीसरा, सहकारी और किसान उत्पादक संगठन (FPO) मॉडल

अमूल ने दिखाया कि जब किसान उत्पादन के साथ खरीद, प्रसंस्करण, ब्रांड और वितरण में हिस्सेदार बनता है, तो आय बढ़ती है. यही मॉडल दूध से आगे दाल, मिलेट, फल, सब्जी, मछली, मसाले और जैविक उत्पादों तक ले जाना होगा.

किसान आय बढ़ाने के लिए केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की चर्चा पर्याप्त नहीं है. असली जरूरत पूरी कृषि संरचना बदलने की है. हर खेत तक भरोसेमंद पानी, सूक्ष्म सिंचाई, तालाब, चेकडैम और भूजल पुनर्भरण चाहिए. अच्छी गुणवत्ता के बीज, समय पर खाद, मिट्टी जांच, जैविक कार्बन सुधार और फसल सलाह हर किसान तक पहुंचनी चाहिए.

कटाई के बाद नुकसान रोकने के लिए कोल्ड स्टोरेज, गोदाम, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और ग्रामीण परिवहन अनिवार्य हैं. छोटे किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर, ड्रोन सेवा, साझा मशीनरी और सस्ता कर्ज जरूरी है. किसान उत्पादक संगठन, ई-नाम, पारदर्शी मंडी व्यवस्था और स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयां किसान को बाजार में मजबूत बनाती हैं.

भारत की अर्थव्यवस्था तब तक संतुलित नहीं हो सकती जब तक गांव का किसान सम्मानजनक आय तक नहीं पहुंचता. विकसित भारत का अर्थ केवल बड़े शहरों की ऊंची इमारतें नहीं है. विकसित भारत का अर्थ है कि किसान का बच्चा अच्छी शिक्षा पाए, किसान परिवार अच्छे घर में रहे, गांव में स्वास्थ्य सुविधा हो, स्वच्छता हो, डिजिटल सुविधा हो और खेती घाटे का सौदा न रहे.

भारत को सचमुच आगे बढ़ना है तो विकास की शुरुआत पिरामिड के सबसे नीचे खड़े व्यक्ति से करनी होगी.

किसान को गरीब रखकर भारत अमीर नहीं बन सकता. खेत की आय बढ़ेगी, तभी गांव की मांग बढ़ेगी; गांव की मांग बढ़ेगी, तभी उद्योग, सेवा और बाजार स्थायी रूप से बढ़ेंगे. इसलिए किसान आय बढ़ाना केवल कृषि नीति नहीं, भारत की राष्ट्रीय विकास रणनीति का केंद्रीय प्रश्न है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >