सुपौल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर DM सख्त, नामांकन से लेकर FRS रजिस्ट्रेशन तक दिए बड़े निर्देश

Supaul News: सुपौल में जिलाधिकारी सावन कुमार ने मासिक समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण कमियों पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि शिक्षा की गुणवत्ता, नामांकन और तकनीकी पंजीकरण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट.

Supaul News: सुपौल में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता और उप विकास आयुक्त सारा अशरफ की उपस्थिति में आयोजित शिक्षा विभाग की मासिक समीक्षा बैठक में नामांकन अभियान, आधार और अपार कार्ड, एफआरएस रजिस्ट्रेशन तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तार से समीक्षा की गई. बैठक में कई मामलों में प्रगति धीमी पाए जाने पर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए.

कस्तूरबा विद्यालयों की रिक्त सीटें भरने पर जोर

बैठक की शुरुआत कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में नामांकन की समीक्षा से हुई. जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में 62 सीटें खाली हैं. इस पर जिलाधिकारी ने रिक्त सीटों को जल्द भरने और नामांकन प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया.

इसके साथ ही विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी समीक्षा की गई ताकि छात्राओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके.

नामांकन अभियान की प्रगति पर विशेष नजर

समीक्षा के दौरान बताया गया कि नए शैक्षणिक सत्र में कक्षा एक में 30,472 नए छात्रों का नामांकन हुआ है. हालांकि निर्धारित लक्ष्य और वास्तविक उपलब्धि के बीच अभी भी अंतर मौजूद है.

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और लक्ष्य को जल्द पूरा किया जाए.

आधार, अपार कार्ड और FRS रजिस्ट्रेशन बना चिंता का विषय

बैठक में मरौना प्रखंड में आधार केंद्र नहीं होने की समस्या उठाई गई. अधिकारियों ने बताया कि इससे बच्चों के आधार कार्ड और अपार कार्ड बनाने में कठिनाई हो रही है.

जिलाधिकारी ने पंचायत स्तर पर समन्वय स्थापित कर समस्या का समाधान निकालने का निर्देश दिया. वहीं समीक्षा में यह भी सामने आया कि जिले के 110 शिक्षकों और 1,67,184 छात्रों का एफआरएस (फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम) पर पंजीकरण अभी तक नहीं हुआ है. उन्होंने इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा.

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर कोई समझौता नहीं

बैठक में यू-डायस, समर कैंप और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से संबंधित अद्यतन प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं रहने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को फटकार लगाई.

उन्होंने स्पष्ट कहा कि आगामी समीक्षा बैठक में सभी प्रगति रिपोर्ट पूरी तैयारी के साथ प्रस्तुत की जाएं. साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता, तकनीकी पंजीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया, ताकि जिले के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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