वर्ल्ड मीडिया में CJP आंदोलन: गार्डियन ने कहा- पुलिस कार्रवाई के बाद भी नहीं रुके छात्र, Dawn बोला- विपक्ष के लिए मौका

जंतर-मंतर पर कार्रवाई के बाद भी CJP आंदोलन लगातार जारी है. भारत के साथ-साथ विदेशी मीडिया भी इसे प्रमुखता से कवर कर रहा है. पढ़िए BBC, NYT, The Guardian, Financial Times, Al Jazeera और Dawn ने इस आंदोलन को अलग-अलग नजरिए से देखा है.

World Media on CJP Protest : जंतर-मंतर पर पुलिस द्वारा 20 जुलाई को किए गए लाठीचार्ज और कार्रवाई के तीन दिन बीत जाने के बाद भी हजारों की संख्या में भीड़ देखने को मिल रही है. भारत में मेनस्ट्रीम मीडिया का खबर को एंगल देने का तरीका अलग है. वहीं निजी तौर पर यूट्यूब आदि में चलाई जा रही मीडिया द्वारा आंदोलन को पूरा सपोर्ट जताया जा रहा है. इस आंदोलन में हो रहे बड़े डेवलपमेंट की हर रिपोर्ट विदेशी मीडिया भी प्रमुखता से कवर कर रहा है. पढ़िए बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्डियन, अलजजीरा सहित अन्य विदेशी मीडिया हाउस की अब तक क्या प्रतिक्रिया रही है.

BBC: ये सिर्फ प्रदर्शन नहीं, Gen Z के विरोध का नया तरीका

BBC ने इस आंदोलन को सिर्फ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन मानकर नहीं देखा. उसकी रिपोर्ट का जोर इस बात पर है कि आज की Gen Z सड़क पर उतरने के साथ-साथ Instagram Reels, मीम्स और मजाक के जरिए भी अपना विरोध दर्ज कराती है. BBC के मुताबिक, ये हंसी-मजाक डर को छिपाने के लिए नहीं, बल्कि उससे लड़ने का तरीका है. रिपोर्ट में पुलिस की कार्रवाई, इंटरनेट बंद करने और सरकार का पक्ष भी है, लेकिन कुल मिलाकर फोकस इस बात पर है कि विरोध करने का तरीका बदल चुका है.

NYT: बेरोजगारी और गुस्से ने बनाया Cockroach आंदोलन

The New York Times की नजर में CJP सिर्फ एक छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि उन युवाओं की आवाज है जो नौकरी, पेपर लीक और सिस्टम से परेशान हैं. रिपोर्ट कहती है कि एक मजाक में शुरू हुआ 'Cockroach' कैंपेन देखते ही देखते लाखों युवाओं का आंदोलन बन गया. NYT का कहना है कि तेज आर्थिक विकास के दावों के बावजूद युवाओं में बेरोजगारी और नाराजगी बढ़ी है, जिसने इस आंदोलन को ताकत दी.

The Guardian: लाठी-आंसू गैस के बाद भी नहीं रुके छात्र

The Guardian ने अपनी रिपोर्ट में सबसे ज्यादा जोर पुलिस कार्रवाई पर दिया है. अखबार के मुताबिक, लाठीचार्ज, आंसू गैस और इंटरनेट बंद होने के बाद भी प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं की बड़ी राजनीतिक आवाज बनता दिख रहा है. आंदोलनकारियों के अनुभवों को भी रिपोर्ट में प्रमुखता से जगह मिली है.

Financial Times: शिक्षा का मुद्दा अब सरकार के लिए सियासी चुनौती

Financial Times का मानना है कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से शुरू हुआ मामला अब मोदी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है. रिपोर्ट में पुलिस कार्रवाई, सुरक्षा इंतजाम और सरकार की प्रतिक्रिया का विस्तार से जिक्र है. अखबार के मुताबिक, अब बात सिर्फ परीक्षा की नहीं, बल्कि जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की भी हो रही है.

Al Jazeera: 2014 के बाद मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी युवा चुनौती

Al Jazeera ने इस आंदोलन को मोदी सरकार के सामने पिछले एक दशक की सबसे बड़ी युवा चुनौती बताया है. रिपोर्ट में संसद के अंदर विपक्ष के हंगामे, देशभर में फैलते प्रदर्शनों, पुलिस कार्रवाई और एमनेस्टी इंटरनेशनल की आलोचना का जिक्र है. अखबार के मुताबिक, शिक्षा सुधार से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सरकार की जवाबदेही की बड़ी लड़ाई बन चुका है.

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Dawn: विपक्ष को दिखा युवाओं तक पहुंचने का मौका

पाकिस्तान के Dawn ने इस आंदोलन को विपक्ष के लिए एक बड़े राजनीतिक मौके के तौर पर देखा है. रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस कार्रवाई के बाद विपक्ष खुलकर छात्रों के साथ खड़ा हो गया, जिससे उसे युवा वोटरों तक पहुंच बनाने का मौका मिल सकता है. हालांकि अखबार ने यह भी कहा है कि अगर राजनीति ज्यादा हावी हुई, तो आंदोलन के असली मुद्दे पेपर लीक, शिक्षा सुधार और रोजगार पीछे छूट सकते हैं.


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लेखक के बारे में

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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