ईरान के इर्द-गिर्द पहले ही 2 जंगी जहाज हैं, तो फिर अमेरिका ने तीसरा- USS Tripoli क्यों भेजा?

USS Tripoli around Iran: अमेरिका ने ईरान के पास अपना तीसरा बड़ा जंगी जहाज यूएसएस त्रिपोली भेज दिया है. यह जापान से एक हफ्ते में यहां पहुंच सकता है. लेकिन अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट कैरियर ईरान की मिसाइलों से सुरक्षित दूरी बनाए हुए इस रीजन में मौजूद हैं, तो फिर अमेरिका को तीसरे की जरूरत क्यों पड़ी?

USS Tripoli around Iran: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करने का फैसला किया है. इसी कड़ी में अमेरिका ने 45,000 टन वजनी एम्फीबियस असॉल्ट शिप यूएसएस त्रिपोली (USS Tripoli- LHA-7) को जापान के सासेबो स्थित अग्रिम नौसैनिक अड्डे से मध्य पूर्व की ओर रवाना कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब क्षेत्र में पहले से ही तीन अमेरिकी विमानवाहक पोत मौजूद हैं, लेकिन हालात को देखते हुए अतिरिक्त सैन्य क्षमता की जरूरत महसूस की जा रही है.

श्रीलंकाई मूल के ऑस्ट्रेलियाई लेखक शनाका एंस्लेम परेरा ने अमेरिका के इस कदम को कई नजरिए से अहम बताया. शनाका ने कहा, अमेरिका-क्लास एम्फीबियस असॉल्ट शिप USS Tripoli अपने साथ 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट को लेकर जा रहा है. इस यूनिट में लगभग 2,500 मरीन सैनिक शामिल हैं, जिन्हें दुनिया की सबसे तेज प्रतिक्रिया देने वाली सैन्य इकाइयों में गिना जाता है. यह जापान से मिडिल ईस्ट जा रहा है, अनुमान है कि यह जहाज एक से दो सप्ताह में मध्य पूर्व पहुंच सकता है.

पहले से तैनात हैं तीन विमानवाहक पोत

मिडिल ईस्ट में अमेरिका पहले ही अपने तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात कर चुका है. इनमें यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड (CVN-78) लाल सागर में है, यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN-72) अरब सागर में है, यूएसएस हैरी एस ट्रूमैन (CVN-75) पूर्वी भूमध्य सागर में है. 

इन तीनों जहाजों के साथ 200 से अधिक विमान और लगभग 20,000 अमेरिकी नौसैनिक तैनात हैं. विश्लेषकों के अनुसार खाड़ी युद्ध के बाद यह क्षेत्र में अमेरिका की सबसे बड़ी नौसैनिक तैनाती मानी जा रही है.

यूएसएस त्रिपोली की खूबी क्या है? 

इस जहाज पर कई तरह के अत्याधुनिक विमान और हेलीकॉप्टर भी तैनात किए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं, लॉकहीड मार्टिन F-35B लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट. खास बात है कि एक साथ 20 F-35B तैनात हो सकता है. बेल बोइंग V-22 ऑस्प्रे टिल्ट-रोटर एयरक्राफ्ट, सिकोरस्की CH-53K किंग स्टैलियन भारी माल ढोने वाला हेलीकॉप्टर और बेल AH-1Z वाइपर अटैक हेलीकॉप्टर भी आ सकता है. इनकी मदद से मरीन सैनिकों को समुद्र से सीधे युद्ध क्षेत्र में उतारा जा सकता है. 

आखिर क्यों भेजा गया USS Tripoli?

हालांकि विमानवाहक पोत समुद्र से हवाई हमले करने में बेहद प्रभावी होते हैं, लेकिन उनकी भूमिका सीमित होती है. वे मुख्य रूप से तीन काम करते हैं- हवाई हमले, अपनी रक्षा और समुद्र से शक्ति का प्रदर्शन.

  • लेकिन कुछ ऐसे मिशन होते हैं जिन्हें विमानवाहक पोत अकेले पूरा नहीं कर सकते, जैसे:
  • समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाना (ईरान ने माइंस बिछाने की चेतावनी दी है)
  • तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना
  • विशेष बलों को तटीय या पहाड़ी इलाकों में उतारना
  • समुद्र से जमीन पर सैन्य कार्रवाई करना
  • यहीं पर USS Tripoli जैसे एम्फीबियस असॉल्ट जहाज की जरूरत पड़ती है.

‘लाइटनिंग कैरियर’ के रूप में भी इस्तेमाल

USS Tripoli की एक खासियत यह भी है कि इसे ‘लाइटनिंग कैरियर’ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका मतलब है कि यह छोटे विमानवाहक पोत की तरह काम कर सकता है.

इसके डेक से उड़ान भरने वाले लॉकहीड मार्टिन F-35B लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट छोटे रनवे से वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग कर सकते हैं. इनकी मदद से अमेरिका कुछ स्पेशल ऑपरेशन कर सकता है:

  • होर्मुज स्ट्रेट में हवाई प्रभुत्व स्थापित करना
  • तटीय मिसाइल ठिकानों पर सटीक हमले
  • जहाज-रोधी अभियानों को अंजाम देना
  • इन विमानों पर लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें भी तैनात की जा सकती हैं.

असली ताकत मरीन सैनिक

हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि USS Tripoli की सबसे बड़ी ताकत उसके फाइटर जेट नहीं बल्कि उस पर मौजूद मरीन सैनिक हैं. 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट में शामिल सैनिक कई तरह के विशेष अभियानों के लिए प्रशिक्षित होते हैं, जैसे:

  • समुद्र से तटीय हमला
  • भूमिगत ठिकानों में ऑपरेशन
  • बंधक बचाव मिशन
  • विशेष बलों को समर्थन देना
  • संकटग्रस्त इलाकों में त्वरित सैन्य कार्रवाई
  • यानी जरूरत पड़ने पर यह यूनिट जमीन पर उतरकर भी ऑपरेशन चला सकती है.

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बढ़ते तनाव के बीच बड़ा संकेत

इस तैनाती को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार हाल के सैन्य अभियानों के बाद ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमलों की क्षमता काफी हद तक कम हुई है.

उनके मुताबिक मिसाइल हमलों में लगभग 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में करीब 95 प्रतिशत की कमी आई है. फिर भी अमेरिका क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, बारूदी सुरंगों को हटाने और संभावित जमीनी अभियानों की तैयारी कर रहा है.

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क्या संकेत देता है यह कदम?

विश्लेषकों के अनुसार USS Tripoli की तैनाती यह संकेत देती है कि अमेरिका केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता. अगर जरूरत पड़ी तो वह समुद्र से जमीन पर उतरकर कार्रवाई करने के लिए भी तैयार है. यही वजह है कि विमानवाहक पोतों के साथ अब मरीन सैनिकों से लैस एम्फीबियस असॉल्ट शिप को भी क्षेत्र में भेजा गया है, क्योंकि कई बार युद्ध में जीत सिर्फ आसमान से नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर ही तय होती है.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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