कौन हैं रुबीना अमीनियन, जिन्हें इस्लामिक ईरान के दमन ने मिटा दिया, गोली से हुई मौत, सड़क किनारे गाड़ने पर किया मजबूर

Rubina Aminian shot in head during Iran Protest: बीते दो हफ्ते से ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इनमें अब तक 500 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई हैं. हालांकि, इन मौतों में कुछ की ही पहचान हो पाई है, इनमें से एक रुबीना अमीनियन हैं. इनकी मौत गोली लगने की वजह से हुई, जो बेहद नजदीक से सिर में सटाकर मारी गई. उनके परिवार को काफी मशक्कत के बाद उनका शव मिला, लेकिन प्रशासन ने उन्हें सड़क किनारे ही दफनाने पर मजबूर कर दिया.

Rubina Aminian shot in head during Iran Protest: ईरान में जैसे-जैसे सत्ता विरोधी प्रदर्शन तेज हो रहे हैं वैसे-वैसे शासन की कड़ी कार्रवाई भी सामने आ रही है. 28 दिसंबर से शुरू हुए इन आंदोलनों से देश-भर में अशांति फैली है. मानवाधिकार समूहों का अनुमान है कि इसमें 500 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें सैकड़ों प्रदर्शनकारी और दर्जनों सुरक्षा कर्मी शामिल हैं. अमेरिका-स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, कम से कम 538 लोगों की मौत हुई है, जिसमें 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं. समूह ने यह भी बताया कि 10,600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इन प्रदर्शनकारियों में एक युवा ईरानी छात्रा रुबीना अमीनियन की भी मौत हो गई है. ईरान में सरकार-विरोधी विरोध प्रदर्शनों की ताजा लहर में पहचानी जा सकने वाली कुछ गिनी-चुनी पीड़ितों में शामिल हैं. पिछले सप्ताह तेहरान में उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई.

रुबीना अमीनियन कौन थीं

रुबीना अमीनियन 22 या 23 वर्ष की कुर्द छात्रा थीं, जो मूल रूप से ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत के मरिवान शहर से थीं. उनका परिवार पश्चिमी ईरान के केरमानशाह में रहता था. वह तेहरान के शरियाती टेक्निकल एंड वोकेशनल कॉलेज फॉर गर्ल्स में टेक्सटाइल और फैशन डिजाइन की पढ़ाई कर रही थीं. यह एक केवल महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा संस्थान है, जहाँ तकनीकी विषयों, इंजीनियरिंग, कला और वास्तुकला से जुड़े कार्यक्रम पढ़ाए जाते हैं. यह कॉलेज राजधानी के खानी आबाद-ए-नौ इलाके में स्थित है, जो शहीद टोंडगुयान हाईवे और बहमान स्क्वायर के पास है. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, रुबीना जिंदगी के प्रति खुशी से भरी एक युवा महिला थीं, जिन्हें फैशन और कपड़ों की डिजाइनिंग से बेहद लगाव था और जिनके सपनों को इस्लामिक रिपब्लिक के हिंसक दमन ने दफन कर दिया.

रुबीना अमीनियन की हत्या कैसे हुई

रुबीना की हत्या गुरुवार, 8 जनवरी 2026 की शाम को हुई, जब वह कॉलेज से निकलकर तेहरान में सरकार-विरोधी विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुई थीं. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि उन्हें बहुत नजदीक से सिर के पीछे गोली मारी गई. ईरान ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट अनुसार, “रुबीना के परिवार के करीबी सूत्रों ने, प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा, ईरान ह्यूमन राइट्स को बताया कि मरिवान की इस युवा कुर्द महिला को पीछे से बहुत नजदीक से गोली मारी गई, जो सीधे उनके सिर में लगी.” 

ईरान के इस विरोध प्रदर्शनों के दौरान अधिकांश पीड़ित 18 से 22 वर्ष की उम्र के युवा थे, जिन्हें सरकारी बलों द्वारा सिर या गर्दन में गोली मारी गई. हाना ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने भी पुष्टि की कि रुबीना की मौत तेहरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई और उसने उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर “विश्वसनीय जानकारी” के आधार पर जांच शुरू की है. रुबीना उन गिने-चुने प्रदर्शनकारियों में से हैं जिनकी पहचान सार्वजनिक रूप से पुष्टि की गई है. 

परिवार ने उनका शव कैसे हासिल किया

रुबीना की मौत की खबर मिलने के बाद, उनका परिवार केरमानशाह से तेहरान गया ताकि शव की पहचान कर सके. परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, उन्हें कॉलेज के पास एक स्थान पर ले जाया गया, जहाँ उन्होंने दर्जनों और कुछ रिपोर्टों के अनुसार सैकड़ों युवाओं के शव देखे, जो विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए थे. ईरान ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार को कॉलेज के पास एक स्थान पर ले जाया गया, जहाँ उन्हें सैकड़ों युवाओं के शव दिखाए गए. अधिकांश पीड़ित 18 से 22 वर्ष के युवा थे, जिन्हें सरकारी बलों ने बहुत नजदीक से सिर और गर्दन में गोली मारी थी. शुरुआत में परिवार को रुबीना के शव की पहचान करने की अनुमति नहीं दी गई और बाद में उन्हें शव ले जाने की भी इजाजत नहीं मिली. लगातार प्रयासों के बाद ही परिजनों को रुबीना की पहचान की पुष्टि करने और उनका शव लेने की अनुमति मिली. इसके बाद वे सुरक्षा बलों के और हस्तक्षेप से बचने के लिए जल्दबाज़ी में केरमानशाह लौट आए. इसके बाद रुबीना की मां ने कथित तौर पर कहा कि वहां पर सिर्फ उनकी बेटी नहीं थी, उन्होंने अपनी आँखों से सैकड़ों शव देखे, जो विरोध प्रदर्शनों में मारे गए थे.

परिवार को सड़क किनारे दफनाने के लिए कैसे मजबूर किया गया

हाना ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, जब रुबीना का परिवार उनका शव लेकर केरमानशाह पहुँचा, तो उन्होंने पाया कि उनका घर खुफिया और सुरक्षा बलों से घिरा हुआ है. मानवाधिकार समूहों के अनुसार, परिवार को सार्वजनिक अंतिम संस्कार या शोक सभा आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई. कड़े सुरक्षा दबाव में, परिवार को रुबीना को केरमानशाह और पास के शहर काम्यारान के बीच सड़क किनारे दफनाने के लिए मजबूर किया गया, न कि किसी उचित कब्रिस्तान में. रिपोर्टों के अनुसार, कब्र उथली थी और एक सुनसान सड़क के किनारे बनाई गई. शोक सभाएँ आयोजित करने के प्रयास भी रोक दिए गए. जब परिवार मरिवान की मस्जिदों में गया, तो कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि ऐसी सभाओं की अनुमति नहीं है.

व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान की स्थिति

रुबीना अमीनियन की मौत देश-भर में फैले विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी अधिकारियों की बढ़ती हिंसक प्रतिक्रिया का प्रतीक बन गई है. 28 दिसंबर को तेहरान के व्यापारियों की ओर से शुरू किए गए यह प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए. शुरुआत में यह बढ़ती महंगाई के विरोध में शुरू हुए थे, लेकिन अब 1979 की क्रांति के बाद से ईरान पर शासन कर रही राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल गए हैं. इसे 2009 के बाद का सबसे बड़ा जन-आंदोलन बताया जा रहा है, जब कम्यूनिकेशन ब्लैकआउट के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई थी. इस बार के आंदोलनों पर विपक्षी कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने कहा कि उन्हें ईरान के अंदर मौजूद सूत्रों से बताया गया है कि सुरक्षा बलों ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को मार डाला है और नरसंहार को छिपाने के लिए शासन ने इंटरनेट बंद कर दिया है.

हाल के सालों में 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों ने ईरानी सरकार की चूलें हिला दी थीं. हालांकि, इस बार अमेरिका और इजरायल की ओर से भी लगातार टिप्पणी की जा रही है, जिससे ईरान असहज है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान की सत्ता को चेतावनी दी है कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा. लेकिन ईरान ने भी झुकने से इनकार कर दिया है, उसने कहा है कि अगर अमेरिका ने कुछ भी किया तो ईरान के निशाने पर अमेरिका सैन्य अड्डे होंगे. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इन मौतों और संभावित सैन्य विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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