रजा पहलवी कौन हैं? 13 साल की उम्र में पायलट बनने वाला प्रिंस, जिसके कहने पर ईरान में फैला विद्रोह, हिला ‘मुल्ला शासन’

Who is Reza Pahlavi Crown Prince of Iran: रजा पहलवी 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान छोड़ने वाले देश के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं. उन्होंने ईरानी जनता से अपील की है कि जब तक सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली खामेनेई के नेतृत्व वाली मौजूदा धार्मिक सत्ता व्यवस्था समाप्त नहीं हो जाती, तब तक संघर्ष जारी रखा जाए. रजा पहलवी एक प्रशिक्षित पायलट हैं और उन्होंने मात्र 13 वर्ष की उम्र में अपनी पहली एकल उड़ान भरी थी. उनके आह्वान पर ईरानी जनता सड़क पर है और खामनेई सरकार को गिराने पर आमादा दिख रही है.

Who is Reza Pahlavi Crown Prince of Iran: ईरान में गहराते आर्थिक हालात के बीच एक बार फिर बड़े पैमाने पर जनाक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है. इसे हाल के वर्षों का सबसे व्यापक सरकार-विरोधी आंदोलन बताया जा रहा है. इसी उथल-पुथल के बीच निर्वासन में रह रहे रजा पहलवी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए हैं. रजा पहलवी 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान छोड़ने वाले देश के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं. उन्होंने ईरानी जनता से अपील की है कि जब तक सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली खामेनेई के नेतृत्व वाली मौजूदा धार्मिक सत्ता व्यवस्था समाप्त नहीं हो जाती, तब तक संघर्ष जारी रखा जाए. उनकी इस अपील के बाद तेहरान में कुछ प्रदर्शनकारियों को पहलवी की वापसी के समर्थन में नारे लगाते हुए सुना गया.

रजा पहलवी कौन हैं?

रजा पहलवी का जन्म 31 अक्टूबर 1960 को तेहरान में हुआ था. वह ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी और महारानी फराह पहलवी (फराह दीबा) के सबसे बड़े पुत्र हैं. 1967 में अपने पिता के राज्याभिषेक के दौरान उन्हें आधिकारिक रूप से क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था. उनकी शुरुआती शिक्षा शाही परिवार के लिए निर्धारित महल परिसर के भीतर एक निजी स्कूल में हुई. रजा पहलवी एक प्रशिक्षित पायलट हैं और उन्होंने मात्र 13 वर्ष की उम्र में अपनी पहली एकल उड़ान भरी थी. 16-17 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली एकल फाइटर जेट उड़ान भी भरी थी.

1978 में वह इम्पीरियल ईरानी वायुसेना में पायलट प्रशिक्षण के लिए अमेरिका गए, लेकिन इसके तुरंत बाद ईरान में इस्लामिक क्रांति भड़क उठी. 17 वर्ष की आयु में, 1978 में, रजा पहलवी टेक्सास चले गए और रीस एयर फोर्स बेस में पायलट प्रशिक्षण लिया. यह प्रस्थान 1979 की इस्लामिक क्रांति से कुछ ही महीने पहले हुआ था. यह क्रांति उनके पिता के बढ़ते तानाशाही शासन के खिलाफ एक व्यापक जन आंदोलन थी, जिसने अंततः राजशाही के पतन और शाही परिवार को निर्वासन में जाने के लिए मजबूर कर दिया. इसके बाद से उन्हें अपने वयस्क जीवन का अधिकांश हिस्सा वॉशिंगटन डीसी क्षेत्र में निर्वासन में बिताना पड़ा. यहीं से वे लगातार ईरान में सत्ता परिवर्तन और एक धर्मनिरपेक्ष शासन की वकालत करते रहे हैं.

क्रांति के बाद ईरान में राजशाही व्यवस्था समाप्त कर दी गई और पहलवी परिवार ने अलग-अलग देशों में शरण ली. इस दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी थी कि उन्होंने खुद इस अनुभव की तुलना “किले में कैद जीवन” से की. 1980 में मिस्र में कैंसर से उनके पिता के निधन के बाद, रजा पहलवी ने काहिरा में एक समारोह आयोजित कर खुद को ईरान का नया शाह घोषित किया और “रजा शाह द्वितीय” की उपाधि अपनाई. बाद में उन्होंने खुद को निर्वासन में एक “किंग-इलेक्ट” यानी चुना हुआ राजा बताया.

विलियम्स कॉलेज में पढ़ाई शुरू करने के बाद, पिता की मृत्यु के चलते वे मोरक्को चले गए. अंततः उन्होंने 1985 में पत्राचार कार्यक्रम के माध्यम से यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफ़ोर्निया से राजनीति विज्ञान में स्नातक डिग्री हासिल की. उसी वर्ष वॉशिंगटन डीसी की एक यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात यास्मीन एतेमाद-अमीनी से हुई. दोनों ने 1986 में विवाह किया और उत्तरी वर्जीनिया में बस गए. दंपति की तीन बेटियां हैं.

शादी के बाद रजा पहलवी को अमेरिकी राजधानी के राजनीतिक माहौल से नजदीक से जुड़ने का अवसर मिला, जबकि उनकी पत्नी जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं. उसी साल उन्होंने ईरानी सरकारी मीडिया को दरकिनार करते हुए गुप्त रूप से ईरान की जनता के लिए 11 मिनट का एक टेलीविजन संदेश प्रसारित किया, जिसमें उन्होंने चर्चित शब्दों में कहा था, “मैं वापस लौटूंगा.” उन्होंने ईरान के अतीत, वर्तमान और एक लोकतांत्रिक भविष्य पर आधारित तीन किताबें भी लिखी हैं.

2010 के दशक में रजा पहलवी लगातार इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ सत्ता परिवर्तन की मांग करते रहे, हालांकि उनके प्रयास ईरान के भीतर तत्काल कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव लाने या व्यापक समर्थन जुटाने में सफल नहीं हो सके. इसके बावजूद, उन्हें इस्लामिक शासन के खिलाफ एक प्रमुख विपक्षी चेहरा माना जाता है, भले ही उनके पास ईरान में कोई आधिकारिक पद नहीं है. 2013 में उन्होंने विभिन्न विपक्षी समूहों को एक मंच पर लाने के लिए ईरानियन नेशनल काउंसिल की सह-स्थापना की. नवंबर 2014 में उन्होंने ‘ओफोग-ए-ईरान’ नामक एक टेलीविजन और रेडियो नेटवर्क भी शुरू किया, हालांकि अब वह इसके मालिक नहीं हैं.

रजा पहलवी पेश की अपनी काबिलियत 

भू-राजनीतिक विश्लेषकों के बीच लंबे समय से इस बात पर बहस रही है कि रजा पहलवी का वास्तविक प्रभाव कितना व्यापक है. कई विशेषज्ञों का मानना रहा है कि उनका समर्थन मुख्य रूप से निर्वासन में रह रहे, राजशाही के प्रति सहानुभूति रखने वाले प्रवासियों तक सीमित है. वहीं सवाल यह भी उठते रहे हैं कि क्या ईरान के भीतर युवा पीढ़ी के बीच उनका कोई ठोस जनाधार है. हालांकि मौजूदा हालात में उनकी अपील पर लोगों का सड़कों पर उतरना इस बहस को नया मोड़ देता दिख रहा है. रजा पहलवी ने ईरानी जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि ईरान की महान जनता, पूरी दुनिया की निगाहें आप पर टिकी हैं. सड़कों पर उतरिए, एकजुट रहिए और अपनी आवाज़ बुलंद कीजिए. कई स्थानों पर उनके समर्थन और मुल्ला शासन के विरोध में खुलकर नारेबाजी देखी गई, जो अतीत में मौत की सजा तक का कारण बन सकती थी.

तेहरान में प्रदर्शन और बदलता माहौल: कितने व्यापक हैं आंदोलन?

ईरान में जारी अशांति के बीच क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की खिड़कियों से नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए. गुरुवार को शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, हालात बेहद हिंसक हो चुके हैं. अब तक कम से कम 42 लोगों की मौत और 2,200 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी दर्ज की जा चुकी है. HRANA का कहना है कि शुक्रवार तक यह अशांति ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुकी थी और देशभर में 390 से अधिक स्थानों पर अलग-अलग प्रदर्शन हुए.

स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे प्रदर्शन के लिए पहलवी की अपील के बाद, तेहरान के विभिन्न इलाकों में लोगों ने खुलकर चुनौतीपूर्ण नारे लगाने शुरू कर दिए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, “तानाशाह को मौत” और “इस्लामिक रिपब्लिक को मौत” जैसे नारे गूंजे, जबकि राजशाही समर्थक नारे “पहलवी वापस आएगा” भी सुनाई दिए. सरकार द्वारा देश की संचार सेवाएं पूरी तरह बंद किए जाने से ठीक पहले हजारों लोग सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराते नजर आए.

हालात को नियंत्रित करने के प्रयास में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की सरकार ने कुछ समय के लिए इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद कर दीं. इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी क्लाउडफ्लेयर और डिजिटल अधिकार संगठन नेटब्लॉक्स ने कहा कि यह बाधा सरकारी हस्तक्षेप का नतीजा थी. निर्वासन में रह रहे क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने संचार सेवाएं बंद किए जाने की कड़ी निंदा की. उन्होंने इंटरनेट शटडाउन, लैंडलाइन सेवाएं काटने और यहां तक कि सैटेलाइट सिग्नल जाम करने की कोशिशों की आलोचना की. इसके साथ ही उन्होंने यूरोपीय नेताओं से अपील की कि वे ईरानी जनता के समर्थन और शासन को जवाबदेह ठहराने के मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह सख्त रुख अपनाएं.

प्रदर्शन क्यों भड़के?

ईरान में मौजूदा विरोध प्रदर्शनों की जड़ में गहरा आर्थिक संकट है, जिसने आम लोगों का जीवन बेहद कठिन बना दिया है. मांस, चावल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेज़ उछाल आया है. देश 40 से 55 प्रतिशत तक की सालाना महंगाई से जूझ रहा है. प्रदर्शनों की यह नई लहर दिसंबर 2025 के अंत में तब शुरू हुई, जब 28 दिसंबर को तेहरान के व्यापारियों ने गिरती मुद्रा और बढ़ती कीमतों के खिलाफ हड़ताल की. 40 प्रतिशत से अधिक महंगाई और रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचे रियाल ने धीरे-धीरे इस आर्थिक विरोध को एक व्यापक राजनीतिक विद्रोह में बदल दिया.

2022 के बाद यह पहला मौका है जब ईरान में इतने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. 2022 में महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसने सरकार की वैधता को लेकर एक राष्ट्रीय चुनौती खड़ी कर दी थी.

ट्रंप की चेतावनी

ईरान में बढ़ते प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी हालात को और गर्मा दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्या करता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा. ईरान ने इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. इसी बीच फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में रजा पहलवी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि दोनों के बीच जल्द ही बातचीत हो सकती है, जो ईरान के मौजूदा राजनीतिक संकट को एक नया अंतरराष्ट्रीय आयाम दे सकती है.

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