ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड शहर में पाकिस्तान वाणिज्य दूतावास के बाहर कश्मीरी कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबित, प्रोटेस्टर्स ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK ) में मानवाधिकारों के उल्लंघन, प्रदर्शनकारियों हुई गोलीबारी और उनपर हो रहे अत्याचार कड़ी निंदा की गई. उनका कहना था कि रावलाकोट और मीरपुर में अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की, जिसमें कई लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं.
घटनाक्रम पर बनी हुई है नजर
पीओके की इस हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है. ब्रिटेन में हुए विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर पहुंचा दिया है. फिलहाल, मौतों और हिंसा को लेकर दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं और स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है.
PoK में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हालात काफी हिंसक और तनावपूर्ण हिंसक हो गए. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने दावा किया कि सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में उसके 14 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं.
पीओके में हिंसा पर 14 मौतों का दावा
PoK में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हालात हिंसक हो गए. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने दावा किया कि सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में उसके 14 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है.
जेएएसी और प्रशासन के दावे आमने-सामने
जेएएसी का आरोप है कि उसका 'लॉन्ग मार्च' पूरी तरह शांतिपूर्ण था और प्रदर्शनकारी निहत्थे थे. संगठन का कहना है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की. वहीं, पीओके पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी.
यह भी पढ़ें - PoK में बवाल! चुनाव से पहले खूनी संघर्ष, 14 प्रदर्शनकारियों की मौत और दो दर्जन से ज्यादा घायल
