Chabahar Port : ईरान के चाबहार पोर्ट में भारत के निवेश पर अमेरिका ने तीसरी बार कार्रवाई की है. इसके बाद एक बार फिर इस प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है. चाबहार पोर्ट भारत के लिए सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि दूसरे देशों तक पहुंच बनाने का अहम रास्ता है. इसी वजह से भारत कई सालों से इस प्रोजेक्ट में निवेश कर रहा है. एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका का यह कदम भारत की लंबी योजना पर असर डालने की कोशिश है, लेकिन इससे चाबहार की अहमियत कम नहीं होगी.
भारत के लिए क्यों जरूरी है चाबहार पोर्ट?
चाबहार पोर्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए भारत बिना पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सामान भेज सकता है. इससे कारोबार आसान होता है और समय भी बचता है. यही नहीं, यह बंदरगाह भारत को यूरोप और दूसरे देशों तक पहुंच बनाने में भी मदद करता है. इसलिए सरकार इसे सिर्फ एक पोर्ट नहीं, बल्कि देश की व्यापार और विदेश नीति का अहम हिस्सा मानती है.
एक्सपर्ट बोले- भारत की बड़ी योजना को रोकने की कोशिश
पूर्व राजनयिक दीपक वोहरा का कहना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है. उनके मुताबिक, इसका मकसद भारत की उन योजनाओं को धीमा करना है, जिनसे देश की दुनिया में पकड़ मजबूत हो सकती है. उनका कहना है कि चाबहार पोर्ट भारत के कारोबार, ऊर्जा जरूरतों और दूसरे देशों से जुड़ने की योजना का अहम हिस्सा है. इसलिए इस प्रोजेक्ट पर बार-बार दबाव बनाया जा रहा है.
चुनौतियां बढ़ीं, लेकिन भारत के पास अब भी रास्ते हैं
एक्सपर्ट मानते हैं कि अमेरिकी कार्रवाई से इस प्रोजेक्ट की रफ्तार कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है, लेकिन इससे भारत पीछे हटने वाला नहीं है. भारत पहले भी मुश्किल हालात में इस परियोजना को आगे बढ़ाता रहा है. आने वाले समय में अगर भारत दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करता है और संतुलित विदेश नीति अपनाता है, तो चाबहार पोर्ट आगे भी भारत के लिए उतना ही अहम बना रहेगा.
