अमेरिका ने शुक्रवार (17 जुलाई) दोपहर (भारतीय समयानुसार शनिवार तड़के 12:30 बजे) ईरान पर एक बार फिर हवाई हमले किए. इसके साथ ही लगातार सातवीं रात भी अमेरिकी सेना की सैन्य कार्रवाई जारी रही, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ये हवाई हमले किए जा रहे हैं. उसका कहना है कि इनका मकसद ईरान की सेना की ताकत को कम करना है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले और तेज किए जा सकते हैं. उन्होंने ईरान के तटीय इलाकों और द्वीपों पर जमीनी कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया. अमेरिकी सेना के अधिकारियों का कहना है कि दक्षिणी ईरान में चल रहे अभियान का मकसद सभी मिलिट्री ऑप्शन खुले रखना है.
ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को और बढ़ा सकते हैं ट्रंप
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका इजरायल में दर्जनों अतिरिक्त एयर-टैंकर (ईंधन भरने वाले) विमान भेजने की तैयारी कर रहा है. माना जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को और बढ़ाने के ऑप्शन पर विचार कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इस हफ्ते की शुरुआत में सिचुएशन रूम की बैठक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई सैन्य विकल्पों पर चर्चा की.
पूरी तरह बंद कर दिया गया है होर्मुज : ईरान
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी हिस्से में बारूदी सुरंगों वाले इलाके से गुजर रहे दो तेल टैंकरों में आग लग गई. वहीं, ईरानी नौसेना ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात में होर्मुज बेहद खतरनाक है और पूरी तरह बंद कर दिया गया है.
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ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि होर्मुज में उसकी नौसेना ने अमेरिकी नौसेना के समर्थन से गुजरने की कोशिश कर रहे चार जहाजों को रोक दिया. आईआरजीसी के मुताबिक, ड्रोन ऑपरेशन की मदद से इन जहाजों को बीच रास्ते में ही रोक दिया गया. आईआरजीसी ने जहाज मालिकों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे उसके निर्देशों का पालन करें और अमेरिकी सुरक्षा के भरोसे में न रहें. उसने यह भी कहा कि कुछ खाड़ी देशों के नेताओं की तरह अमेरिकी सेना के समर्थन के झांसे में न आएं.
