US Iran War: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से जारी संघर्ष अब भीषण होता जा रहा है. हर दिन मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है, हमले का दायरा भी फैलता जा रहा है, लेकिन हालात शांत होने के बजाय और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं. लगातार बढ़ते हमलों के बीच अमेरिका में भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. इसी कड़ी में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने के लिए अमेरिकी सीनेट में लाया गया वॉर पावर्स रेजोल्यूशन लाया गया, लेकिन यह पारित नहीं हो सका. इस प्रस्ताव का उद्देश्य राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाना था, ताकि बड़े सैन्य अभियान शुरू करने से पहले कांग्रेस की मंजूरी लेना जरूरी हो.
बुधवार को (अमेरिकी समयानुसार) सीनेट में रिपब्लिकन सांसद राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थन में एकजुट हो गए और डेमोक्रेट्स द्वारा लाए गए प्रस्ताव को पराजित कर दिया. इस मुद्दे पर रिपब्लिकन सांसद खुलकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन में दिखाई दिए. यही कारण रहा कि अधिकांश रिपब्लिकन सदस्यों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. अंततः यह प्रस्ताव 47 के मुकाबले 53 वोटों से खारिज हो गया. यह ट्रंप के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत मानी जा रही है.
प्रस्ताव का उद्देश्य क्या था?
ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पहली बार इस मुद्दे पर सीनेट में मतदान कराया गया था. डेमोक्रेट्स इस प्रस्ताव के जरिए ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को सीमित करना चाहते थे, क्योंकि मध्य पूर्व में अमेरिका की बढ़ती भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे थे. वॉर पावर्स रेजोल्यूशन नाम के इस प्रस्ताव का मकसद राष्ट्रपति के सैन्य फैसलों पर कांग्रेस की निगरानी बढ़ाना था. अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता, तो ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य हमले से पहले कांग्रेस की मंजूरी लेना अनिवार्य हो जाता. हालांकि, मतदान ज्यादातर पार्टी लाइन के अनुसार हुआ और यह प्रस्ताव 47 के मुकाबले 53 वोटों से गिर गया.
पार्टी लाइन से अलग वोट देने वाले नेता
सीनेट में इस प्रस्ताव (बिल) को वर्जीनिया से डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन द्वारा पेश किए गया था. कई दिनों से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या कुछ रिपब्लिकन सांसद पहले की तरह पार्टी लाइन से हटकर राष्ट्रपति की आलोचना करेंगे. एसे में ट्रंप प्रशासन ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के समर्थन में कांग्रेस के सदस्यों को कई ब्रीफिंग देकर समर्थन जुटाने की कोशिश की.
मतदान के दौरान केवल रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जबकि डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन अकेले ऐसे डेमोक्रेट रहे जिन्होंने रिपब्लिकन के साथ जाकर प्रस्ताव का विरोध किया, जिससे जीओपी को इसे हराने में मदद मिली. डेमोक्रेट्स का तर्क था कि ट्रंप ने एक बार फिर कांग्रेस के अधिकारों को नजरअंदाज किया है, उनके पास आगे की कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है और यह उनके चुनावी वादों के खिलाफ भी है.
वोटिंग पर नेताओं की प्रतिक्रियाएं
सीनेट में डेमोक्रेटिक अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने कहा कि प्रशासन बार-बार अपने लक्ष्य बदल रहा है, जो इस बात का संकेत है कि स्पष्ट रणनीति की कमी है. दूसरी ओर रिपब्लिकन सांसदों ने तर्क दिया कि राष्ट्रपति ने कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत कार्रवाई की है. सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने वॉर पावर्स एक्ट को ‘राष्ट्रपति से अधिकार छीनकर कांग्रेस को देने वाला असंवैधानिक कदम’ बताया और कहा कि यदि कांग्रेस सैन्य कार्रवाई से असहमत है तो वह फंडिंग रोक सकती है.
सीनेटर मार्कवेन मुलिन ने कहा, ‘हमें 535 कमांडर-इन-चीफ की जरूरत नहीं है,’ और इस विधेयक का विरोध किया. रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं में टिम केन द्वारा बार-बार कांग्रेस की शक्तियां बढ़ाने की कोशिशों को लेकर थकान भी देखी गई.
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जंग तय समय से ज्यादा चल सकता है
रिपब्लिकन सांसदों ने मंगलवार को बंद कमरे में बैठक कर ईरान पर हमलों और आगामी वॉर पावर्स वोट पर चर्चा की. इसके बाद उन्हें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन ‘रेजिन’ केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से ब्रीफिंग दी गई. हेगसेथ ने संकेत दिया है कि यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है. उनके अनुसार यह युद्ध करीब आठ हफ्तों तक जारी रह सकता है, जो पहले अनुमानित समय से ज्यादा है.
ईरान पर हमले को लेकर US में 50% समर्थन
वहीं, फॉक्स न्यूज के एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी मतदाता लगभग बराबर बंटे हुए हैं, हालांकि बड़ी संख्या में लोग ईरान को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं. सर्वे के मुताबिक लगभग 80 प्रतिशत रिपब्लिकन मतदाता अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करते हैं, जबकि करीब 80 प्रतिशत डेमोक्रेट और 60 प्रतिशत निर्दलीय मतदाता इसका विरोध कर रहे हैं. सेना में सेवा दे चुके मतदाताओं में से 59 प्रतिशत ने ईरान पर अमेरिकी हमलों का समर्थन किया.
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सर्वे में यह भी पाया गया कि 61 प्रतिशत पंजीकृत मतदाता मानते हैं कि ईरान अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘वास्तविक खतरा’ है. मौजूदा अमेरिकी हमलों को लेकर समर्थन बराबर बंटा हुआ है. सर्वे के अनुसार, इजरायल के साथ मिलकर शुरू किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत किए गए हमलों को 50 प्रतिशत लोग समर्थन दे रहे हैं, जबकि 50 प्रतिशत इसका विरोध कर रहे हैं.
