US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर हमले तेज हो गए हैं. गुरुवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे के ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. तेज होते हमलो में सीजफायर और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है. जॉर्डन, कुवैत, इराक और मिस्र तक संघर्ष का असर दिखाई देने लगा है, जिससे पूरे इलाके में युद्ध की आशंका गहरा गई है. लगातार बढ़ते हमलों ने वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर टेंशन बढ़ा दी है.
जॉर्डन और कुवैत भी संघर्ष की चपेट में
जॉर्डन ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने लगातार दूसरे दिन ईरान से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया. सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. वहीं, कुवैत की सेना ने बताया कि ईरानी हमले में उत्तरी कुवैत स्थित एक चीनी कंपनी की इमारत को निशाना बनाया गया, जिसमें एक कर्मचारी की मौत हो गई. सेना के अनुसार, हमले से इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है.
अमेरिका ने ईरान के 12 से अधिक ठिकानों पर किया हमला
अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई अभियान पूरा किया है. 'यूएस सेंट्रल कमांड' (CENTCOM) के मुताबिक, दो घंटे से अधिक समय तक चले अभियान में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 12 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. इनमें सैन्य कमान केंद्र, मिसाइल और ड्रोन अड्डे, तटीय निगरानी केंद्र तथा रक्षा प्रतिष्ठान शामिल थे.
दो घंटे से अधिक समय तक चले अभियान में अमेरिकी सेना ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के 12 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. यूएस सेंट्रल कमांड
यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ घंटे बाद हुई, जिसमें उन्होंने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए हमले के जवाब में ईरान पर बहुत कड़ा प्रहार करने की बात कही थी.
ईरान ने भी हमलों की पुष्टि, कहा- तीन लोगों की हुई है मौत
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट स्थित केश्म द्वीप पर अमेरिकी हमलों में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि दो अन्य घायल हो गए. इससे पहले अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे. इन हमलों में कम से कम 20 लड़ाकों और ईरान के छह सैन्य सलाहकारों के मारे जाने का दावा किया गया.
मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन हमला
संघर्ष के बीच मिस्र भी अप्रत्यक्ष रूप से इसकी चपेट में आता दिखाई दे रहा है. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे के अनुसार, दमियाता बंदरगाह पर ड्रोन हमलों के कारण प्राकृतिक गैस ले जा रहे दो जहाजों में आग लग गई. मिस्र सरकार ने शुरुआती जांच के आधार पर कहा कि आग ड्रोन हमले के कारण लगी. हालांकि, अब तक किसी संगठन या देश ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है और घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है.
सऊदी अरब ने भी लगाए हमलों के आरोप
सऊदी अरब ने पिछले दो दिनों में उसके तेल प्रतिष्ठानों पर हुए ड्रोन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है. इसी बीच सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की.
समुद्री व्यापार पर बढ़ा खतरा
बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है. होर्मुज स्ट्रेट जो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, फिर से अस्थिर स्थिति में पहुंच गया है. उधर, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जहाजों की नाकेबंदी का ऐलान करते हुए लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में भी व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है. इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.
युद्ध रोकने के प्रयास तेज
हमलों से पहले अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल कराने की कोशिश कर रहे थे. एक अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों से संपर्क अभी भी जारी है और तनाव कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि, अब तक किसी ठोस प्रगति की पुष्टि नहीं हुई है. लगातार बढ़ते हमलों और क्षेत्रीय देशों के इसमें शामिल होने से पश्चिम एशिया में व्यापक युद्ध का खतरा पहले से अधिक गहरा गया है.
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