US-Iran Talks Failed: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई 21 घंटे की लंबी बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है. पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस मीटिंग में दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए. अब इस फेल्योर के पीछे एक फोन कॉल की चर्चा हो रही है, जिसे इस विफलता का कारण बताया जा रहा है.
मैराथन मीटिंग के बाद भी नहीं बनी बात
अमेरिकी दल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि वाशिंगटन ने ईरान को अपना ‘सबसे अच्छा और आखिरी ऑफर’ दिया था, लेकिन ईरान ने इसे ठुकरा दिया. वेंस ने साफ कहा कि इस डील का न होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है. करीब 21 घंटे चली इस चर्चा में कई अहम मुद्दों पर बात हुई, लेकिन अंत में सब फेल हो गया.
ट्रंप ने ईरान को ठहराया जिम्मेदार
मीटिंग खत्म होने के कुछ घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट लिखकर ईरान पर निशाना साधा. ट्रंप ने लिखा कि मीटिंग पूरी रात चली, लेकिन ईरान अपने न्यूक्लियर मंसूबों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. ट्रंप ने फिर दोहराया कि ईरान के पास कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं होगा.
ईरान ने नेतन्याहू की कॉल पर लगाया आरोप
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत टूटने की अलग ही वजह बताई है. प्रेस टीवी और अराघची के सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, जब बातचीत चल रही थी, तब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जेडी वेंस को फोन किया था. अराघची का दावा है कि इस एक कॉल के बाद अमेरिका का फोकस ईरान से हटकर इजरायल के हितों पर चला गया. उन्होंने कहा कि अमेरिका मेज पर वो हासिल करना चाहता था, जो वो जंग से नहीं जीत पाया.
आखिरी वक्त पर बदल गए नियम
अराघची ने एक्स पर लिखा कि 47 साल में पहली बार इतने ऊंचे स्तर पर बातचीत हो रही थी. ईरान ‘इस्लामाबाद MoU’ के बिल्कुल करीब था, लेकिन अचानक अमेरिका ने शर्तें बदल दीं और अपनी मांगों पर अड़ गया. उन्होंने कहा कि अच्छी नीयत का जवाब अच्छी नीयत से मिलता है और दुश्मनी का दुश्मनी से. ईरान के सरकारी मीडिया आईआरआईबी (IRIB) ने भी कहा कि ईरान ने अपनी तरफ से कई पहल कीं, लेकिन अमेरिका की ‘अनुचित’ मांगों की वजह से प्रोग्रेस रुक गई.
इसके साथ, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अल जजीरा के हवाले से कहा कि ट्रंप की धमकियों का ईरान पर कोई असर नहीं होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका लड़ने आएगा तो हम लड़ेंगे और अगर लॉजिक के साथ आएगा तो हम लॉजिक से बात करेंगे. गालिबाफ ने कहा कि हमने बहुत अच्छी पहल की थी, लेकिन अब अमेरिका को हमारे इरादे फिर से परखने होंगे.
इन मुद्दों पर फंसा पेंच
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत के दौरान ईरान की न्यूक्लियर गतिविधियों, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी पैसे और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विवाद बना रहा. ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि माहौल में बहुत ज्यादा अविश्वास और युद्ध की आशंका थी, इसलिए एक बार में नतीजा निकलना मुश्किल था.
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कच्चे तेल की कीमतों पर मंडराया खतरा
इस बातचीत के फेल होने से ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल है. युद्ध विराम की उम्मीद में ब्रेंट क्रूड की कीमतें जो 119 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आई थीं, अब फिर बढ़ सकती हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तनाव बढ़ा तो तेल की कीमतें फिर से तीन अंकों (100 डॉलर के पार) में पहुंच सकती हैं.
