ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची बोले- 'दुश्मनी का जवाब अब दुश्मनी से ही दिया जाएगा', अमेरिका से समझौता होते-होते टूटा

Iran FM Araghchi: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली मैराथन बैठक बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है. ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने वॉशिंगटन पर 'वादे से मुकरने' का आरोप लगाया है, वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस विफलता को ईरान के लिए बड़ा नुकसान बताया है.

Iran FM Araghchi: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हाई-प्रोफाइल बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है. ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देश समझौते के बिल्कुल करीब थे, लेकिन आखिरी वक्त पर बात बिगड़ गई. अराघची के मुताबिक, ईरानी डेलिगेशन पूरी ईमानदारी के साथ चर्चा कर रहा था, पर अमेरिका ने ‘मैक्सिमलिज्म’ (अत्यधिक मांग) और अपनी शर्तों को बार-बार बदलकर रास्ते में रुकावटें पैदा कीं.

अराघची ने एक्स पर निकाली भड़ास

ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 47 साल में पहली बार इतनी हाई-लेवल और लंबी चर्चा हुई थी. उन्होंने बताया कि ‘इस्लामाबाद MoU’ साइन होने ही वाला था, लेकिन अमेरिका ने पुराने अनुभवों से कोई सबक नहीं लिया. अराघची ने साफ शब्दों में कहा कि अगर अमेरिका अच्छी नीयत दिखाता तो जवाब भी वैसा ही मिलता, लेकिन ‘दुश्मनी का जवाब अब दुश्मनी से ही दिया जाएगा.’

जेडी वेंस बोले- यह ईरान के लिए बुरी खबर

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस लगभग 21 घंटे तक चली मैराथन बातचीत के बाद बिना किसी डील के वापस अमेरिका लौट गए हैं. वेंस ने रिपोर्टर्स से कहा कि कुछ मुद्दों पर तो सहमति बनी, लेकिन ईरान को मंजूर हो ऐसा कोई फाइनल समझौता नहीं हो पाया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि खाली हाथ लौटना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है. वेंस के अनुसार, वॉशिंगटन ने जो शर्तें रखी थीं, उन्हें ईरान ने स्वीकार नहीं किया.

इन 2 बड़े मुद्दों पर फंसा पेंच

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डेडलॉक यानी गतिरोध के पीछे दो मुख्य कारण हैं: पहला होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) और दूसरा ईरान के परमाणु अधिकार. बताया जा रहा है कि अमेरिका बातचीत की टेबल पर ऐसी शर्तें मनवाना चाह रहा था, जो वह युद्ध के मैदान में भी हासिल नहीं कर पाया. ईरानी मीडिया ने अमेरिकी रुख को ‘अवास्तविक’ और ‘जरूरत से ज्यादा मांग’ वाला बताया है, जिसकी वजह से कोई बेसिक फ्रेमवर्क तक तैयार नहीं हो सका.

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ट्रंप की धमकियों का असर नहीं: बागेर गालीबाफ

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने कहा कि नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का ईरान पर कोई असर नहीं होगा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका लड़ने आएगा तो हम लड़ेंगे और अगर लॉजिक के साथ आएगा तो हम भी लॉजिक से बात करेंगे. गालीबाफ ने जोर देकर कहा कि ईरान किसी के दबाव में नहीं झुकेगा और अपनी इच्छाशक्ति का लोहा एक बार फिर मनवाएगा.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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