इजरायल में बदलाव: पीएम नेतन्याहू ने बिना इंटेलिजेंस बैकग्राउंड वाले रोमन गोफमैन को बनाया मोसाद का नया चीफ

Roman Gofman: इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को 2026 में एक नया प्रमुख मिलेगा. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मेजर जनरल रोमन गोफमैन को अगला चीफ चुना है. दिलचस्प बात यह है कि सेना में लंबा करियर बिताने वाले गोफमैन के पास इंटेलिजेंस का कोई पुराना अनुभव नहीं है. वह जंग के मैदान में घायल भी हो चुके हैं.

Roman Gofman: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मेजर जनरल रोमन गोफमैन को अपनी खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ का नया डायरेक्टर नियुक्त किया है. सीनियर अपॉइंटमेंट्स की एडवाइजरी कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद रविवार को एक्स पर नेतन्याहू ने खुद इसकी पुष्टि की. रिटायर सुप्रीम कोर्ट प्रेसिडेंट अशर ग्रुनिस की अध्यक्षता वाली कमेटी ने गोफमैन के नाम पर मुहर लगा दी है.

2 जुलाई 2026 से संभालेंगे कार्यभार

प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, रोमन गोफमैन 2 जुलाई 2026 को अपना पद संभालेंगे. उनका कार्यकाल 5 साल का होगा. वह मौजूदा मोसाद चीफ डेविड बार्निया की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल जून 2026 में खत्म हो रहा है. नेतन्याहू ने गोफमैन को एक निडर और क्रिएटिव ऑफिसर बताया है, जो मुश्किल वक्त में ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने की काबिलियत रखते हैं.

बिना खुफिया अनुभव के मिली इतनी बड़ी जिम्मेदारी

टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, गोफमैन के पास पहले का कोई प्रोफेशनल इंटेलिजेंस बैकग्राउंड नहीं है. वह पिछले दो सालों से नेतन्याहू के मिलिट्री सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने पीएम के निर्देशों को इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) में लागू करने और कई खास असाइनमेंट पर पीएम के प्रतिनिधि के तौर पर यात्राएं भी की हैं. वह नेतन्याहू के काफी करीबी माने जाते हैं और उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थन करते हैं.

बेलारूस से आकर इजरायल में बने बड़े सैन्य अधिकारी

1976 में बेलारूस में जन्मे गोफमैन 14 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ इजरायल आए थे. 1995 में उन्होंने सेना के आर्मर्ड कॉर्प्स जॉइन किए. वह युद्ध के मैदान में एक डिवीजन कमांडर भी रहे हैं. 7 अक्टूबर 2023 को जब हमास ने हमला किया, तब वह त्सेलिम ट्रेनिंग बेस के कमांडर थे. उस दौरान सेडरोट के पास आतंकियों से लड़ते हुए वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

विवादित पॉलिसी डॉक्यूमेंट के कारण रहे चर्चा में

मिलिट्री सेक्रेटरी बनने से पहले गोफमैन ने एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट लिखा था, जिसमें उन्होंने सलाह दी थी कि हमास को हराने के बाद इजरायल को गाजा पट्टी पर अपना सैन्य नियंत्रण बनाए रखना चाहिए. इस प्रस्ताव पर काफी बहस हुई थी. इसके अलावा, गोफमैन ने वेस्ट बैंक के ‘एली येशिवा’ स्कूल से पढ़ाई की है, जो अपनी दक्षिणपंथी धार्मिक विचारधारा के लिए जाना जाता है.

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7 अक्टूबर की नाकामी  

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को दुनिया की बेहतरीन एजेंसियों में गिना जाता है. 7 अक्टूबर 2025 के हमले को न रोक पाने का दोष मोसाद पर नहीं मढ़ा गया, क्योंकि फिलिस्तीनी इलाके इसके कार्यक्षेत्र में नहीं आते. हालांकि, घरेलू एजेंसी शिन बेट और मिलिट्री इंटेलिजेंस ‘अमान’ के प्रमुखों ने जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया है. युद्ध के दौरान मोसाद ने कई बड़े विदेशी ऑपरेशन्स और टारगेटेड हत्याओं में अहम भूमिका निभाई है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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