भारत और दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा US, ईरानी विदेश मंत्री ने ट्रंप प्रशासन पर कसा तंज

Iran FM Taunts US on Russian Oil: ईरान के विदेश मंत्री ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल से अमेरिकी प्रशासन पर ताना मारा. उन्होंने कहा कि अमेरिका अब देशों से उसी रूसी तेल को खरीदने के लिए कह रहा है, जिसे पहले रोकने की कोशिश करता रहा है.

Iran FM Taunts US on Russian Oil: ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिका और इजरायल के युद्ध में केवल ये तीनों देश और मिडिल ईस्ट ही नहीं प्रभावित हो रहे. इस तनाव के चलते पूरी दुनिया तेल संकट में फंस गई है. अब अमेरिका इस ऑयल क्राइसिस को दूर करने के लिए अपने सबसे बड़े दुश्मन रूस का सहारा ढूंढ़ रहा है. लेकिन जैसे युद्ध में ईरान जमकर अमेरिकी हमलों का मुकाबला कर रहा है, वैसे ही नैरेटिव वॉर में भी करारा जवाब दे रहा है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को रूस के तेल को लेकर अमेरिका के रुख की आलोचना की. उन्होंने दावा किया कि पहले जिन देशों पर रूस से तेल आयात बंद करने का दबाव डाला गया था, अब वही अमेरिका उनसे रूसी कच्चा तेल खरीदने की गुजारिश कर रहा है.

अराघची ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि वॉशिंगटन ने महीनों तक भारत पर दबाव बनाया था कि वह रूसी तेल का आयात बंद कर दे, लेकिन अब ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में तनाव बढ़ने पर वही अमेरिका देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. ईरान के विदेश मंत्री ने एक्स पर लिखा, ‘अमेरिका ने महीनों तक भारत को रूस से तेल आयात बंद करने के लिए धमकाया. लेकिन ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्ध के बाद अब व्हाइट हाउस दुनिया से- जिसमें भारत भी शामिल है, रूसी कच्चा तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है.’

यूरोप पर भी साधा निशाना

ईरानी विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप ने ईरान के खिलाफ ‘अवैध युद्ध’ का समर्थन इस उम्मीद में किया कि इसके बदले अमेरिका उन्हें रूस के खिलाफ मदद देगा. उन्होंने कहा, ‘यूरोप को लगा कि ईरान के खिलाफ अवैध युद्ध का समर्थन करने से उन्हें रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन मिल जाएगा. यह बेहद शर्मनाक है.’ अराघची ने अपनी टिप्पणी के साथ फाइनेंशियल टाइम्स की एक खबर भी साझा की, जिसमें बताया गया था कि बढ़ती तेल कीमतों से रूस को भारी राजस्व लाभ मिल रहा है.

5 मार्च को भारत को 30 दिन के लिए समुद्र में फंसे रूसी तेल कार्गो खरीदने की अनुमति दी गई थी. इसका उद्देश्य चल रहे संकट के दौरान आयातकों को सीमित स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की सुविधा देना था. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम बेहद सीमित और अस्थायी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मकसद केवल बाजार को स्थिर करना है और इससे मॉस्को को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा.

नैरेटिव को भी मात देने रहा ईरान

अराघची ने फाइनेंशियल टाइम्स की जो रिपोर्ट साझा की है, उसमें कहा गया है कि मौजूदा हालात में रूस को तेल कारोबार से रोजाना करीब 150 मिलियन डॉलर (करीब 1,389 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त आमदनी हो रही है. फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, संघर्ष के पहले 12 दिनों के भीतर ही रूस ने तेल निर्यात से लगभग 1.3 अरब डॉलर से 1.9 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त कमाई कर ली है. रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि यदि तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो महीने के अंत तक मॉस्को को 3.3 अरब डॉलर से लेकर 5 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है.

अमेरिका ने क्यों अलाउ किया रूसी तेल?

ईरानी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को 30 दिन की छूट की घोषणा की. ईरान ने 4 मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा कर दी, जिसके वजह से तेल आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक बेंचमार्क क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई होती है.  

अमेरिका के इस फैसले के तहत उन देशों को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है, जो पहले से समुद्र में फंसे कार्गो के रूप में मौजूद है. यूएस ट्रेजरी के अनुसार, इस अस्थायी लाइसेंस के तहत उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी गई है, जो 12 मार्च तक जहाजों पर लोड किए जा चुके थे. यह अनुमति वॉशिंगटन समयानुसार 11 अप्रैल की मध्यरात्रि तक प्रभावी रहेगी. इस कदम का उद्देश्य है- कच्चे तेल की कीमतों को नीचे लाया जा सके.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को मिली अनुमति

इस बीच खबर है कि ईरान ने मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद भारत के झंडे वाले दो एलपीजी जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इस मामले की जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट दी है. रॉयटर्स ने दो अन्य सूत्रों और Lloyd’s List Intelligence के शिपिंग डेटा का हवाला देते हुए बताया कि सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर चल रहा एक टैंकर भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के बाद शनिवार को भारत पहुंचने की उम्मीद है.

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भारत को सुरक्षित मार्ग देने का भरोसा

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भी पुष्टि की कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच तेहरान भारत की ओर जाने वाले जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ता देगा. उन्होंने इसके पीछे दोनों देशों की पुरानी दोस्ती और साझा हितों को कारण बताया.

जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान भारत की ओर जाने वाले जहाजों को इस अहम समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजरने देगा, तो उन्होंने कहा, ‘हाँ, क्योंकि भारत और ईरान दोस्त हैं. हमें भविष्य दिखाई देता है. हम मानते हैं कि भारत और ईरान के बीच दोस्ती है और हमारे साझा हित हैं.’

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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