मिडिल ईस्ट में डर से US का फायदा, ट्रंप ने सऊदी-इजरायल को बेच दिए 16 अरब डॉलर के हथियार

US weapons sale to Israel and Saudi Arabia: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे तनाव के बीच अपने हथियार सेल की ब्रिक्री को मंजूरी दी है. इसमें दो सबसे बड़े ग्राहक इजरायल और सऊदी अरब बने हैं. ईरान और गाजा में तनाव से दोनों देश (ईरान और इजरायल) मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. हालांकि, अमेरिका जरूर अपनी सैन्य तैनाती इस क्षेत्र में बढ़ा रहा है, लेकिन वह इससे डील का फायदा भी उठा रहा है.

US weapons sale to Israel and Saudi Arabia: पश्चिमी एशिया में बढ़ रहे तनाव के बीच अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने दो प्रमुख सहयोगियों के लिए हथियार बाजार खोल दिया है. इस बाजार से हथियार खरीदे जाएंगे. 1-2 अरब नहीं बल्कि 16 अरब डॉलर के हथियार. ट्रंप प्रशासन ने जिन हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी है, उनमें हेलिकॉप्टर, सामरिक वाहन और पैट्रियट मिसाइलें शामिल हैं, जिनका उद्देश्य सहयोगी देशों की रक्षा क्षमता को मजबूत करना है. मिडिल ईस्ट में हालात फिर से गरमाते दिख रहे हैं. खासकर ईरान को लेकर और गाजा की स्थिति के कारण. ऐसे माहौल में अमेरिका ने इजरायल और सऊदी अरब को बड़े पैमाने पर हथियार बेचने की मंजूरी दी है.

इसके लिए अमेरिकी विदेश विभाग ने पहले ही कांग्रेस को औपचारिक सूचना दे दी थी. यह हाल के सालों की सबसे बड़ी विदेशी हथियार डील्स में से एक मानी जा रही है. फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस सौदे के तहत इजरायल को करीब 6.67 अरब डॉलर और सऊदी अरब को लगभग 9 अरब डॉलर के रक्षा उपकरण मिलेंगे. अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद अपने सहयोगी देशों को मजबूत बनाना है, ताकि वे खुद की रक्षा बेहतर तरीके से कर सकें. साथ ही, अमेरिका यह भी कह रहा है कि इन हथियारों से क्षेत्र का सैन्य संतुलन बिगाड़ने की मंशा नहीं है.

इजरायल को क्या मिलेगा?

इजरायल के पैकेज में चार तरह के रक्षा सौदे शामिल बताए जा रहे हैं, जिनका मकसद उसकी हवाई और जमीनी ताकत बढ़ाना है. सबसे बड़ा हिस्सा है 30 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर. ये ऐसे हेलिकॉप्टर होते हैं जो दुश्मन पर नजर रखने, जमीनी सेना को हवाई मदद देने और रक्षा अभियानों में काम आते हैं. ये आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं और कठिन हालात में भी ऑपरेशन कर सकते हैं. इसके अलावा इज़राइल को करीब 3,250 बख्तरबंद सैन्य वाहन (JLTV) मिलेंगे. ये वाहन सैनिकों को सुरक्षित तरीके से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और रसद (सप्लाई) के काम में मदद करेंगे. कुछ और उपकरण भी शामिल हैं, जैसे बख्तरबंद गाड़ियों के लिए पावर सिस्टम और कुछ हल्के हेलिकॉप्टर.

सऊदी अरब को क्या मिलेगा?

सऊदी अरब का पैकेज मुख्य रूप से हवाई और मिसाइल रक्षा पर केंद्रित है. उसे 730 पैट्रियट PAC-3 इंटरसेप्टर मिसाइलें मिलेंगी. पैट्रियट सिस्टम का इस्तेमाल दुश्मन की मिसाइलों और हवाई हमलों को हवा में ही रोकने के लिए किया जाता है. कई अमेरिकी सहयोगी देश पहले से इसका इस्तेमाल करते हैं. अमेरिका का कहना है कि इससे सऊदी अरब अपने अहम ठिकानों, तेल स्थलों और आम लोगों की बेहतर सुरक्षा कर पाएगा. साथ ही, यह पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगा.

इसका बड़ा मतलब क्या है?

इन हथियार सौदों का समय काफी अहम है. गाजा में भले ही संघर्षविराम की कोशिशें चल रही हों, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं. कई मुद्दे अब भी सुलझने बाकी हैं, जैसे तबाह इलाकों का पुनर्निर्माण और हथियारबंद समूहों का सवाल. दूसरी तरफ ईरान को लेकर तनाव बना हुआ है. उस पर आरोप है कि वह मिसाइलें विकसित कर रहा है और इराक, लेबनान, यमन और सीरिया जैसे देशों में अपने समर्थक गुटों को मदद दे रहा है. इससे पूरे इलाके में अस्थिरता बढ़ी है.

ऐसे में अमेरिका अपने दोस्तों की रक्षा ताकत बढ़ाकर दो काम करना चाहता है. पहला- दुश्मनों को हमले से रोकना और दूसरा- अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर सामूहिक सुरक्षा मजबूत करना. इज़राइल के लिए ये हथियार उसकी सैन्य तैयारी और तेजी से कार्रवाई की क्षमता बढ़ाएंगे. वहीं सऊदी अरब के लिए ये हवाई हमलों और मिसाइल खतरों से बचाव को मजबूत करेंगे. कुल मिलाकर, ये सौदे सिर्फ हथियारों की बिक्री नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका की मौजूदगी और अपने साथियों के प्रति उसकी कमिटमेंट का एक बड़ा संकेत भी हैं.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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