संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कोरोना वायरस संकट के दौरान एलजीबीटीआई समुदाय को लेकर चिंता जताई

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कोविड-19 महामारी के दौरान समलैंगिक और ट्रांसजेंडर समेत एलजीबीटीआई समुदाय के प्रति बढ़ती उदासीनता को लेकर चिंता जताते हुए इनके संरक्षण की जरूरत बताई है.

संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कोविड-19 महामारी के दौरान समलैंगिक और ट्रांसजेंडर समेत एलजीबीटीआई समुदाय के प्रति बढ़ती उदासीनता को लेकर चिंता जताते हुए इनके संरक्षण की जरूरत बताई है.

समलैंगिकता जैसी प्रवृत्तियों के प्रति समाज में नकारात्मक माहौल (होमोफोबिया, बायफोबिया और ट्रांसफोबिया) के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि यह दिन ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में आया है जब दुनिया को एलजीबीटीआई समुदाय को संरक्षण प्रदान करने की जरूरत है.

गुतारेस ने कहा कि इस समुदाय से जुड़े लोग वायरस तथा स्वास्थ्य संबंधी नये अवरोधों के कारण कलंक का दंश झेल रहे हैं जो पहले ही अपनी प्रवृत्तियों, अपने प्रेम संबंधों आदि को लेकर पूर्वाग्रह, हमलों के शिकार होते रहते हैं और कुछ की हत्या भी कर दी जाती है. उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की भी खबरें मिल रही हैं कि पुलिस एलजीबीटीआई समुदाय के लोगों और संगठनों को निशाना बनाने के लिए कोविड-19 के दिशानिर्देशों का दुरुपयोग कर रही है.

महासचिव ने कहा, ‘‘महामारी फैलने के साथ बढ़ते अन्याय के इस तरह के मामलों एवं अन्य घटनाक्रमों को संयुक्त राष्ट्र उजागर करता रहेगा तथा संकट से निपटने में सभी के लिए संरक्षण की जरूरत पर जोर देता रहेगा.” उन्होंने कहा, ‘‘आज हम सभी को भेदभाव के खिलाफ, सबके स्वतंत्रता के साथ जीने के अधिकारों के लिए और सम्मान तथा अधिकारों में समानता प्रदान करने के लिए एकजुट होना चाहिए.

होमोफोबिया, बायफोबिया और ट्रांसफोबिया के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस हर साल 17 मई को मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1990 में आज के ही दिन समलैंगिकता को रोगों की अंतरराष्ट्रीय सूची से हटाने का फैसला किया था.

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