घड़ी की टिक-टिक…जल्दी फैसला लो वरना वहां कुछ नहीं बचेगा, ट्रंप की ईरान को अल्टीमेट वार्निंग

Trump Warns Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. परमाणु वार्ता, यूरेनियम भंडार, प्रतिबंधों और युद्ध मुआवजे को लेकर अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द फैसला लेना होगा, उसके पास समय बहुत कम बचा है.

Trump Warns Iran: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी कूटनीतिक तनाव एक बार फिर तेज हो गया है. परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और युद्ध से जुड़े मुद्दों पर बातचीत ठप पड़ने के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. रविवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के लिए घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी है, और उन्हें अब तेजी से कदम उठाने होंगे. बहुत तेज़ी से. वरना उनका कुछ भी बाकी नहीं बचेगा. समय ही सबसे महत्वपूर्ण है! 

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने को लेकर मतभेद और गहरे हो गए हैं. ट्रंप की चेतावनी के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर सकता है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका 1 हफ्ते से भी कम समय में ईरान के ऊपर फिर से हमला कर सकता है. चीन की अपनी हालिया यात्रा से लौटे ट्रंप ने यह भी कहा कि चाइनीज प्रेसिडेंट शी जिनपिंग भी चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार न बनाए. हालांकि, यह उनका दावा है. 

राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को अपने शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों के साथ सिचुएशन रूम में अहम बैठक कर सकते हैं. इस बैठक में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा होने की संभावना है. उन्होंने हाल ही में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लंबी बातचीत की. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब आधे घंटे चली इस चर्चा में दोनों नेताओं ने ईरान की स्थिति और क्षेत्रीय तनाव पर विचार किया. बताया गया कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायली सेना हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.

अमेरिका ने रखीं नई शर्तें

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने बातचीत फिर से शुरू करने के लिए कई अहम शर्तें रखी हैं. इनमें ईरान से 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम सौंपने की मांग भी शामिल है. इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान केवल एक परमाणु केंद्र चालू रखे, युद्ध मुआवजे की मांग वापस ले, अधिकांश फ्रीज की गई विदेशी संपत्तियों पर दावा छोड़ दे और क्षेत्रीय संघर्ष पूरी वार्ता प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही समाप्त हो. इन शर्तों को लेकर दोनों देशों के बीच अब तक सहमति नहीं बन पाई है, जबकि सीजफायर हुए भी लगभग 40 दिन बीत चुके हैं. 

ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें

अमेरिका की मांगों के जवाब में ईरान ने भी बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रख दी हैं. ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान का कहना है कि वह तभी बातचीत करेगा जब, क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद हो, ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं, विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी की जाएं, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा मिले, होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जाए. लेकिन अब तक अमेरिका ईरान की इन मांगों से इनकार करता आाया है. 

वॉर, सीजफायर और धमकियों का सिलसिला बरकारार

दोनों देशों के बीच युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य शहरों पर मिसाइल और रॉकेट बरसाए. इसमें शीर्ष नेता अली खामेनेई समेत कई नेता मारे गए थे. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच 7 अप्रैल तक संघर्ष चला. 8 अप्रैल को आखिरकार भारी तबाही के बाद दोनों पक्षों ने सीजफायर पर सहमति जताई, जो अब तक धमकी और बातचीत के घटनाक्रम के साथ जारी है. 

फिलहाल बातचीत पूरी तरह रुकी

पिछले सप्ताह दोनों देशों ने एक-दूसरे के नए प्रस्तावों को खारिज कर दिया था. इसके बाद से युद्ध खत्म करने और परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिशें लगभग ठप पड़ गई हैं. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होती है या हालात और गंभीर होते हैं.

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राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अमेरिका-इजराइल पर लगाए आरोप

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल पर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि दोनों देश संघर्ष के दौरान ईरान के भीतर असुरक्षा फैलाना चाहते थे. पेजेशकियन ने यह बयान पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के साथ बैठक के दौरान दिया. ईरानी राष्ट्रपति ने दावा किया कि पड़ोसी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने दिया, जिससे कथित योजना विफल हो गई. उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक का आभार भी जताया.

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होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है. ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर निगरानी और नियंत्रण बढ़ा दिया है. वहीं अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ाने के लिए नौसैनिक घेराबंदी तेज कर दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर और भी गंभीर असर पड़ सकता है.

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By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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