ट्रंप के 'टैरिफ वार' से बिगड़ी बात! भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ब्रेक, क्या मार्च की डेडलाइन होगी फेल?

Trump Tariffs: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले ने राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ बांध दिए हैं, जिससे भारत-अमेरिका के बीच होने वाली अहम ट्रेड डील फिलहाल अटक गई है. टैरिफ युद्ध के बीच पीएम मोदी और ट्रंप की रणनीति में अब बड़े बदलाव की संभावना है.

Trump Tariffs: भारत और अमेरिका के बीच इस हफ्ते होने वाली तीन दिनों की हाई-लेवल मीटिंग टाल दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार से जो हालात बदले हैं, उससे उस ‘इंटरिम ट्रेड डील’ (अस्थायी समझौते) पर असर पड़ सकता है, जिसे भारत और अमेरिका ने मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था. असल में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पावर पर रोक लगा दी है, जिसके जरिए वे अपनी मर्जी से टैक्स (टैरिफ) बढ़ा रहे थे. अब ट्रंप प्रशासन को दूसरे कानूनी रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है.

ट्रंप और पीएम मोदी का बड़ा प्लान: अब क्या होगा?

पिछले साल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप मिले थे, तब उन्होंने एक बड़े व्यापार समझौते का लक्ष्य रखा था. इसी कड़ी में 6 फरवरी को दोनों देशों ने एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर मार्च में एक छोटा (इंटरिम) समझौता करने की बात कही थी. लेकिन अब अमेरिका में मची कानूनी हलचल की वजह से सारा कैलेंडर बिगड़ गया है. अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी नई रणनीति तय नहीं कर लेता, तब तक दो देशों के बीच कोई टिकाऊ समझौता होना मुश्किल है.

मार्च की डेडलाइन पर संकट

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मुख्य वार्ताकार (चीफ नेगोशिएटर) दर्पण जैन रविवार को अमेरिका जाने वाले थे, लेकिन अब उनका दौरा टल गया है. जानकारों के मुताबिक, दोनों पक्ष अब पहले नए हालातों को समझना चाहते हैं. अगले हफ्ते की इस मीटिंग में समझौते का कानूनी ड्राफ्ट फाइनल होना था, ताकि मार्च में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत आकर डील साइन कर सकें. फिलहाल, भारत के कॉमर्स मिनिस्ट्री ने बयान जारी कर कहा है कि वे अमेरिकी कोर्ट के फैसले और ट्रंप के अगले कदमों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं.

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टैरिफ का ‘पजल’: एक्सपोर्टर्स की बढ़ी धड़कनें

पिछले कुछ दिनों में टैक्स की दरों में जो उतार-चढ़ाव आया है, उसने सबको हैरान कर दिया है:

  • पहले: भारतीय सामानों पर टैक्स 50% तक पहुंच गया था.
  • फरवरी की शुरुआत: यह घटकर 25% हुआ और अमेरिका ने इसे 18% करने का वादा किया.
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद: यह गिरकर अचानक 10% पर आ गया.
  • शनिवार की नई चाल: अमेरिका ने ‘सेक्शन 122’ लगाकर इसे फिर से 15% कर दिया.

भारत के लिए इसमें क्या है अच्छी खबर?

एम्के ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज (Emkay Global Financial Services) के एनालिस्ट माधवी अरोड़ा और हर्षल पटेल के अनुसार, यह फैसला भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने दबाव बनाने की अपनी तुरंत वाली ताकत खो दी है. अब भारत अपनी ट्रेड डील को नए सिरे से और बेहतर शर्तों पर बातचीत कर सकता है. रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि भारत अब रूसी कच्चा तेल (रशियन क्रूड ऑयल) खरीदने के लिए तकनीकी रूप से स्वतंत्र है, हालांकि पीएम मोदी ट्रंप से रिश्ते बेहतर रखने के लिए कोई भी कदम सोच-समझकर ही उठाएंगे.

अमेरिका की अगली रणनीति: सेक्शन 338 पर नजर

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने साफ किया है कि वे हार नहीं मानेंगे. उन्होंने सोशल मीडिया (एक्स) पर कहा कि वे सेक्शन 232, 301 और 122 का इस्तेमाल जारी रखेंगे. वहीं, चर्चा यह भी है कि ट्रंप ‘सेक्शन 338’ का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे वे दोबारा 50% तक टैक्स लगा पाएंगे. दूसरी ओर, मशहूर वकील नील कत्याल, जिन्होंने कोर्ट में ट्रंप के खिलाफ केस जीता, उनका कहना है कि अगर ट्रंप को ऐसे फैसले लेने हैं तो उन्हें संसद (कांग्रेस) की मंजूरी लेनी चाहिए.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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