ट्रंप का प्लान: इस्लामाबाद में बातचीत फेल, अब ईरान की नौसैनिक घेराबंदी; वेनेजुएला जैसा एक्शन संभव

Trump Plan Iran Naval Blockade: इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की मीटिंग बेनतीजा खत्म होने के बाद अब युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने फारस की खाड़ी में दुनिया के सबसे घातक युद्धपोत तैनात कर नेवल ब्लॉकेड के संकेत दिए हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस घेराबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी.

Trump Plan Iran Naval Blockade: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही आमने-सामने की बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है. अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार, 12 अप्रैल 2026 को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों पक्ष किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके. वेंस ने साफ किया कि ईरान ने वाशिंगटन की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अमेरिकी और ईरानी डेलिगेशन वापस लौट गए. वेंस के मुताबिक, यह समझौता न होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है.

ट्रंप ने दिया नेवल ब्लॉकेड (नौसैनिक घेराबंदी) का संकेत

बातचीत फेल होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी. ट्रंप ने ‘जस्ट द न्यूज’ आउटलेट का एक आर्टिकल शेयर किया, जिसमें ईरान की नौसैनिक घेराबंदी करने का सुझाव दिया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान अमेरिकी मांगें नहीं मानता है, तो अमेरिका उसकी आर्थिक कमर तोड़ने के लिए समुद्री रास्तों को बंद कर सकता है. इससे ईरान का व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर बढ़ेगा कंट्रोल

लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट की नेशनल सिक्योरिटी एक्सपर्ट रेबेका ग्रांट ने ‘जस्ट द न्यूज’ को बताया कि अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह कंट्रोल करना काफी आसान है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में इस इलाके में करीब 10 जहाजों की हलचल देखी गई है, जिसमें रूस और चीन जाने वाले कार्गो भी शामिल हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब ओमान के पास के संकरे समुद्री रास्ते या खार्ग द्वीप से गुजरने वाले हर जहाज को अमेरिकी नौसेना की निगरानी से गुजरना होगा.

वेनेजुएला जैसा एक्शन संभव

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘यूएसएस जेराल्ड फोर्ड’ (USS Gerald Ford) अब फारस की खाड़ी में पहुंच चुका है. इसके साथ ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ और अन्य घातक युद्धपोत भी जुड़ गए हैं. इसी साल वेनेजुएला में की गई सफल नौसैनिक घेराबंदी का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि ट्रंप ईरान के खिलाफ भी वैसा ही सख्त कदम उठा सकते हैं. इससे ईरान के तेल एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर सीधा असर पड़ेगा.

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ईरान का पक्ष: अपने हितों से समझौता नहीं

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने रविवार को कहा कि बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिका ईरान के वैध अधिकारों को स्वीकार करे. बकाई के अनुसार, चर्चा के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य, न्यूक्लियर मुद्दे, युद्ध के हर्जाने और प्रतिबंध हटाने जैसे विषयों पर बात हुई. तस्नीम न्यूज एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान ने वाजिब प्रस्ताव दिए थे और अब गेंद अमेरिका के पाले में है.

क्षेत्र में तनाव और इजरायल का एक्शन

मिडल ईस्ट में सुरक्षा हालात लगातार बदल रहे हैं. ‘अल जजीरा ब्रेकिंग’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को इजरायल ने लेबनान की ओर से आए ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर दिया. वहीं, ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के अनुसार बेरूत के बाहरी इलाकों में धुएं के गुबार देखे गए हैं. इस बीच ईरान अपनी सभ्यता और हितों की रक्षा के लिए डिप्लोमेसी के साथ-साथ सभी जरूरी टूल्स इस्तेमाल करने की बात दोहरा रहा है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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