ट्रंप के पूर्व NSA का दावा: अमेरिकी एयरक्राफ्ट पर चीनी मिसाइलों से हुआ हमला, पाकिस्तान ने की मदद

Trump Former NSA Claims: डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) जनरल माइक फ्लिन ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. फ्लिन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी खबरें हैं कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोत (यूएसएस अब्राहम लिंकन) पर हमला करने के लिए जिन मिसाइलों का इस्तेमाल किया, वे चीन ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को भेजी थीं.

Trump Former NSA Claims: फ्लिन के मुताबिक, अगर यह खबर सच है, तो यह ‘युद्ध की कार्रवाई’ (Act of War) मानी जानी चाहिए और अमेरिका को चीन और पाकिस्तान को तुरंत कड़े शब्दों में चेतावनी देनी चाहिए. जनरल फ्लिन ने पाकिस्तान की ईमानदारी पर भी शक जताया है. 

उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान चोरी-छिपे ईरान को हथियार सप्लाई कर रहा है, तो वह अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने में ‘भरोसेमंद मध्यस्थ’ कैसे हो सकता है? फ्लिन का मानना है कि इस पूरे मामले में पाकिस्तान और चीन के साथ अमेरिका के जो भी सौदे या संबंध हैं, उन पर तुरंत विचार करने की जरूरत है. उन्होंने सुझाव दिया कि चीन के 5 लाख छात्रों को अमेरिकी कॉलेजों में पढ़ने की इजाजत भी नहीं मिलनी चाहिए.

मिसाइल प्रोग्राम को फिर खड़ा कर रहा चीन

अमेरिकी थिंक टैंक ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ (ISW) की रिपोर्ट में भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को फिर से मजबूत करने में मदद कर रहा है. पश्चिमी मीडिया और ISW का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से चीन ने ईरान को मिसाइल ईंधन (Fuel Precursor) की कई खेप भेजी हैं. अमेरिका और इजरायल की कोशिशों के बावजूद चीन की मदद से ईरान अपने तबाह हुए मिसाइल सिस्टम को फिर से एक्टिव कर रहा है.

अमेरिकी युद्धपोत ‘USS अब्राहम लिंकन’ पर हमला

ईरान की सेना ने दावा किया है कि उसने अपने तटीय क्रूज मिसाइलों से अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS अब्राहम लिंकन’ को निशाना बनाया है. ईरानी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ और न्यूज एजेंसी ‘IRNA’ ने इसके वीडियो और बयान भी जारी किए हैं. ISW की रिपोर्ट कहती है कि 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों में ईरान के कई अंडरग्राउंड मिसाइल बंकर और साइलो तबाह हो गए थे, लेकिन ईरान उन्हें कुछ ही घंटों में फिर से काम के लायक बना रहा है. हालांकि, अमेरिकी इंटेलिजेंस का मानना है कि कोऑर्डिनेशन की कमी की वजह से ईरान की मिसाइलें अभी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही हैं.

ये भी पढ़ें: ईरान का पाकिस्तान जाने से इनकार; कहा- अमेरिका से बातचीत की खबरें झूठी हैं

अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा को खतरा

जनरल फ्लिन ने अमेरिका के अंदरूनी हालात पर भी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान जरूर हुआ है, लेकिन खतरा टला नहीं है. उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान से अमेरिका की धरती को सीधा खतरा है और विदेशी ताकतें कभी भी एक्टिव हो सकती हैं. फ्लिन ने अमेरिकी जांच एजेंसियों से इस मुद्दे पर पूरी तरह अलर्ट रहने की अपील की है. उनका कहना है कि या तो अमेरिका को यह जंग पूरी मजबूती से जीतनी चाहिए या फिर इस उलझन से बाहर निकलकर खुद को फिर से तैयार करना चाहिए.

ये भी पढ़ें: पाकिस्तानी रक्षामंत्री के ‘कैंसर’ वाले बयान से भड़का इजराइल, पीएम नेतन्याहू ने दिया जवाब

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >