जंग के बीच ट्रंप ने कहा- युद्धविराम चाहता है ईरान, तेहरान बोला- झूठा और निराधार दावा

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि उनके अमेरिकी जनता को संबोधित करने से पहले ईरान के राष्ट्रपति युद्धविराम चाहते हैं. ईरान ने ट्रंप के इस दावे को गलत और निराधार बताया है.

Donald Trump: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा है कि ईरान के राष्ट्रपति युद्धविराम चाहते हैं. ट्रंप ने अपनी ट्रुथ सोशल पर कहा कि ईरान के नये राष्ट्रपति सीजफायर चाहते हैं. अपने पोस्ट में ट्रंप ने ईरान के नये शासन के लिए राष्ट्रपति शब्द का इस्तेमाल किया. हालांकि, ईरान में राष्ट्रपति बदले नहीं हैं.

ट्रंप ने कहा- सीजफायर के लिए रखी है शर्त

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सीजफायर की उन्होंने शर्त रखी है. उनकी शर्त के मुताबिक, युद्धविराम तभी होगा, जब होर्मुज खुला, सुरक्षित और बाधारहित होगा. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें विश्वास हो जाता है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा, तो वह दो से तीन सप्ताह में युद्ध से पीछे हट सकते हैं. भले ही तेहरान युद्धविराम के लिए सहमत न हो. उन्होंने लिखा कि तब तक हम ईरान को पूरी तरह तबाह कर रहे हैं, या जैसा लोग कहते हैं, उसे वापस पाषाण युग में भेज रहे हैं.

ईरान ने दावे को बताया निराधार और झूठा

अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे को ईरान ने खारिज कर दिया है. ईरान की ओर से कहा गया है कि ट्रंप का दावा झूठा, निराधार और भ्रामक है. तेहरान ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव या संदेश उनकी ओर से नहीं भेजा गया है. इससे पहले मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में लड़ाई जारी रखने की बात कही थी. उन्होंने ट्रंप को टारगेट करते हुए कहा था कि आप ईरान की जनता से धमकियों और समयसीमा की भाषा में बात नहीं कर सकते.

IRGC ने कहा- होर्मुज हमारे कंट्रोल में

ईरान की अर्धसैनिक फोर्स IRGC ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह उसके नियंत्रण में है. बयान में कहा गया कि इस अहम समुद्री रास्ते पर उनकी सेनाओं की मजबूत पकड़ है. साथ ही, अमेरिका के राष्ट्रपति के बयानों पर निशाना साधते हुए IRGC ने कहा कि यह जलडमरूमध्य दुश्मन देशों के लिए आसानी से नहीं खोला जाएगा.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों खुलवाना चाहता है अमेरिका

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है. यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है. सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे बड़े तेल और गैस उत्पादक देश इसी मार्ग पर निर्भर हैं. अगर यह रास्ता बंद हो जाता है, तो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बाधित हो सकती है. इस रूट के बंद होने की वजह से कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. अमेरिका में भी पेट्रोल और डीजल महंगा हो गया है.

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Published by: Pritish sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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