‘ऑस्ट्रेलिया को इंडिया नहीं बनने देंगे', नियो-नाजी ने उगला भारत विरोधी जहर

Thomas Sewell: ऑस्ट्रेलियाई चरमपंथी थॉमस सेवेल का भारत विरोधी बयान, कहा- 'नहीं बनने देंगे इंडिया'. वीडियो हुआ वायरल.

Thomas Sewell: ऑस्ट्रेलिया के एक कट्टरपंथी नेता थॉमस सेवेल ने कोर्ट के बाहर इंटरव्यू के दौरान भारत और सूडान को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है. थॉमस सेवेल, जिन्हें एक नियो-नाजी (Neo-Nazi) एक्टिविस्ट माना जाता है, उन्होंने कैमरे पर एक टीवी रिपोर्टर के साथ बदतमीजी की और मीडिया पर ‘व्हाइट रिप्लेसमेंट’ (सफेदपोश आबादी को बदलने) की सच्चाई छिपाने का आरोप लगाया.

भारत और सूडान को लेकर क्या कहा?

इंटरव्यू के दौरान सेवेल ने सीधे तौर पर नस्लभेदी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि ऑस्ट्रेलिया कोई ‘थर्ड वर्ल्ड’ देश बने. हम नहीं चाहते कि यह भारत या सूडान जैसा बन जाए. हम चाहते हैं कि यह ऑस्ट्रेलिया ही रहे और यही सबसे मुख्य मुद्दा है.

उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. लोगों ने न केवल उनके बयान की निंदा की, बल्कि इंटरव्यू लेने वाले रिपोर्टर की भी आलोचना की कि उन्होंने सेवेल को मौके पर ही करारा जवाब क्यों नहीं दिया.

‘व्हाइट रिप्लेसमेंट’ का राग अलापा

सेवेल ने दावा किया कि उनकी पूरी लड़ाई ‘व्हाइट रिप्लेसमेंट’ के खिलाफ है. उनके अनुसार, पश्चिमी देशों में मूल निवासियों की आबादी कम हो रही है और वे इसे उलटना (Reverse) चाहते हैं. जब रिपोर्टर ने कहा कि आम टैक्सपेयर्स उनके इस व्यवहार से खुश नहीं हैं, तो सेवेल भड़क गए. उन्होंने रिपोर्टर से कहा कि तुम टैक्सपेयर की तरफ से नहीं बोल रहे, तुम एक ऐसी कॉर्पोरेट कंपनी का हिस्सा हो जो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ है.

बिना बात के की गाली-गलौज

इंटरव्यू के दौरान जब कुछ राहगीरों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो सेवेल अपनी मर्यादा भूल गए. उन्होंने वहां मौजूद लोगों को ‘मोटा’ और ‘घिनौना’ कहकर उनका अपमान किया. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे कोर्ट में अपना गुनाह कबूल करेंगे, तो उन्होंने चिल्लाते हुए ‘नॉट गिल्टी’ (दोषी नहीं हूं) कहा और रिपोर्टर को अपशब्द कहे.

किन आरोपों का सामना कर रहे हैं सेवेल?

यह पूरा विवाद 2024 की एक रैली से जुड़ा है. उस समय सेवेल ने उन शरणार्थियों (Refugees) के खिलाफ प्रदर्शन किया था जो ऑस्ट्रेलिया में परमानेंट रेजिडेंसी (PR) की मांग कर रहे थे.

  • आरोप: उन पर ‘ऑफेंसिव बिहेवियर’ (अपमानजनक व्यवहार) के आरोप लगे हैं.
  • दावा: सेवेल का कहना है कि यह रैली उन शरणार्थियों के खिलाफ थी जो खुद को हकदार समझते हैं. उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर ‘बकवास आरोपों’ में फंसाया जा रहा है.

इमिग्रेशन मंत्री के दफ्तर के बाहर हुआ था हंगामा

जिस रैली की वजह से सेवेल पर केस चल रहा है, वह इमिग्रेशन मंत्री टोनी बर्क के दफ्तर के बाहर हुई थी. सेवेल का दावा है कि औसत ऑस्ट्रेलियाई नागरिक नहीं चाहता कि हजारों या लाखों अवैध भारतीय प्रवासी उनके देश में रहें. उनके अनुसार, उनका विरोध केवल उन शरणार्थियों के खिलाफ था जो जबरन रुकने की जिद कर रहे हैं.

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क्या होती है नियो-नाजी और नस्लवादी सोच?

आसान शब्दों में समझें तो ‘नियो-नाजी’ उन लोगों को कहा जाता है जो एडोल्फ हिटलर और उसकी नाजी विचारधारा को फिर से जिंदा करना चाहते हैं.

  • नस्लवाद: यह वह सोच है जहां किसी इंसान को उसके रंग, धर्म या जाति के आधार पर छोटा या बड़ा समझा जाता है.
  • विदेशी विरोध: ये समूह प्रवासियों, अल्पसंख्यकों और खासकर गैर-गोरे लोगों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं. हालांकि कई देशों में ऐसी विचारधारा बैन है, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए ये फिर से सिर उठा रही हैं.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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