अमेरिका-सऊदी के हमले से इराक में बढ़ा तनाव, ईरान के 4 IRGC जवानों की मौत का दावा

अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में कई ठिकानों पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की है. ईरानी मीडिया के मुताबिक इस हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के चार सदस्य मारे गए हैं. वहीं अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि करीब 20 ईरानी सलाहकार भी इस कार्रवाई में मारे गए.

US Saudi Iraq Strike : इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की ओर से किए गए संयुक्त सैन्य हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, उत्तरी इराक के दियाला प्रांत में रातभर चली बमबारी में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कम से कम चार सदस्य मारे गए. इनकी पहचान अली असगर अस्तानेह, अबोलफजल मोताकी, मुर्तजा अकबरी और अमीर अब्बास दरहमफोरूश के रूप में हुई है. सभी ईरान के काशान शहर के रहने वाले बताए गए हैं. हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि ये चारों किस मिशन पर तैनात थे.

अमेरिका का दावा- 20 ईरानी सलाहकार भी मारे गए

दूसरी ओर, अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि इस हमले में करीब 20 ईरानी सलाहकार, तकनीकी विशेषज्ञ और IRGC के सदस्य मारे गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन ठिकानों पर हमला किया गया, वहां ईरान समर्थित समूहों के मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन से जुड़े सलाहकार मौजूद थे. अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इन ठिकानों को जानबूझकर निशाना बनाया गया ताकि ईरान समर्थित मिलिशिया की सैन्य क्षमता को कमजोर किया जा सके.

PMF के 20 लड़ाकों की भी मौत, 32 घायल

इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) ने भी इस हमले में अपने कम से कम 20 लड़ाकों के मारे जाने और 32 अन्य के घायल होने की पुष्टि की है. संगठन के अनुसार, हमले बगदाद, दियाला, किरकुक और बसरा समेत सात प्रांतों में किए गए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि कार्रवाई के दौरान पूर्वी इराक में मौजूद लॉजिस्टिक और हथियारों से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया. अमेरिका का दावा है कि पिछले 72 घंटों में उसकी सेना और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 30 से ज्यादा ड्रोन हमले किए गए थे, जिनके पीछे ईरान समर्थित समूहों का हाथ था.

सऊदी ने ड्रोन हमलों का लगाया आरोप

इस सैन्य कार्रवाई से पहले सऊदी अरब ने कहा था कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने पूर्वी प्रांत में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर भेजे गए कई ड्रोन मार गिराए थे. सऊदी सरकार ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित संगठनों को जिम्मेदार ठहराया था. इसके बाद अमेरिका और सऊदी ने संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई.

इराक ने हमले को बताया संप्रभुता का उल्लंघन

इस पूरे घटनाक्रम पर इराक सरकार ने कड़ी नाराजगी जताई है. इराक की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अमेरिका और सऊदी की सैन्य कार्रवाई को "अस्वीकार्य आक्रमण" बताया है. परिषद का कहना है कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब इराकी अधिकारी अमेरिका और सऊदी के प्रतिनिधियों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत कर रहे थे. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह कार्रवाई इराकी अधिकारियों के समन्वय से की गई, लेकिन बगदाद ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसकी संप्रभुता से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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