रूस से तेल नहीं तो यूक्रेन को बिजली नहीं, इस यूरोपीय देश ने रोकी इमरजेंसी इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई

Ukraine Electricity Supply: रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के चार साल पूरे हो गए हैं. अब तक यूरोपीय देशों ने अपनी एकजुटता से यूक्रेन को भरपूर साथ दिया है, लेकिन इतना समय बीतने के बाद इसमें दरार आ रही है. स्लोवाकिया ने रूसी तेल के ट्रांजिट में आई खराबी के बाद यूक्रेन को इमरजेंसी इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई पर रोक लगा दी है.

Ukraine Electricity Supply: रूस से आने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति रुकने के विवाद के बीच स्लोवाकिया ने यूक्रेन को दी जा रही आपातकालीन बिजली सप्लाई बंद कर दी है. यह फैसला सोमवार को प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने लिया. फिको ने कहा कि जब तक द्रुझबा पाइपलाइन के जरिए स्लोवाकिया को रूसी तेल की आपूर्ति दोबारा शुरू नहीं होती, तब तक यह रोक जारी रहेगी. यह पाइपलाइन यूक्रेन से होकर गुजरती है. इससे पहले उन्होंने वीकेंड में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को चेतावनी भी दी थी.

फिको ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अगर अब यूक्रेन अपने बिजली ग्रिड को संभालने के लिए मदद मांगेगा, तो स्लोवाकिया कोई सहायता नहीं देगा. उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही तेल पारगमन (ट्रांजिट) बहाल होगा, बिजली सप्लाई फिर शुरू की जा सकती है. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समस्या बनी रही, तो ब्रातिस्लावा और कड़े कदम उठा सकता है. फिको ने यह भी कहा कि स्लोवाकिया, यूक्रेन की यूरोपीय संघ सदस्यता के अपने अब तक के समर्थनकारी रुख पर दोबारा विचार कर सकता है.

क्यों शुरू हुआ ये विवाद?

यह पूरा विवाद द्रुझबा पाइपलाइन से जुड़ा है. जनवरी के आखिर में यह पाइपलाइन बंद हो गई थी. यूक्रेन का कहना है कि एक रूसी ड्रोन हमले में इसका ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ था. कीव के अनुसार, मरम्मत का काम जारी है और तेल सप्लाई जल्द बहाल करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, स्लोवाकिया और पड़ोसी हंगरी ने इस लंबे व्यवधान के लिए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया है.

यूक्रेन बोला- बिजली रोकने की जानकारी नहीं

यूक्रेन की बिजली ग्रिड कंपनी उक्रएनर्जो ने कहा कि उसे स्लोवाकिया के फैसले की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. कंपनी के मुताबिक, इससे यूक्रेन की एकीकृत बिजली प्रणाली व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा.  ऑपरेटर के अनुसार, आखिरी बार स्लोवाकिया से आपात मदद एक महीने से ज्यादा पहले मांगी गई थी और वह भी सीमित मात्रा में थी. 

स्लोवाकिया पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश- फिको

फिको ने कहा कि तेल आपूर्ति रोकना स्लोवाकिया पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है. उन्होंने यूक्रेन के उस पहले के निर्णय की भी आलोचना की, जिसमें 1 जनवरी 2025 को पांच साल का समझौता समाप्त होने के बाद रूसी गैस पारगमन रोक दिया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि रूसी गैस पारगमन रुकने से स्लोवाकिया को हर साल करीब 50 करोड़ यूरो का नुकसान हो रहा है.

यूरोप ने लगाया था प्रतिबंध

रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद यूरोपीय संघ ने 2022 में अधिकांश रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि, जमीन से घिरे मध्य यूरोपीय देशों को वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था करने का समय देने के लिए द्रुझबा पाइपलाइन को इस प्रतिबंध से छूट दी गई थी. इनमें हंगरी भी शामिल है.

इस बीच, संघर्ष की चौथी बरसी से पहले रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध पैकेज पर ईयू सहमति नहीं बना सका. विक्टर ओरबान के नेतृत्व वाले हंगरी ने इस प्रस्ताव को रोक दिया. रिपोर्टों के अनुसार, हंगरी ने यूक्रेन को आगे दी जाने वाली ईयू की वित्तीय सहायता के समर्थन को भी तेल पाइपलाइन दोबारा खोलने से जोड़ दिया है.

कीव स्थित परामर्श संस्था ExPro के मुताबिक, इस महीने यूक्रेन द्वारा आयात की गई कुल बिजली में से 68 प्रतिशत हंगरी और स्लोवाकिया से आई है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें आपातकालीन आपूर्ति शामिल थी या नहीं.

ये भी पढ़ें:- रूस-यूक्रेन युद्ध 5वें साल में: मॉस्को पर नए प्रतिबंध नहीं लगा पाया EU, दो देशों ने लगाया अड़ंगा

ये भी पढ़ें:- गर्लफ्रेंड की जासूसी और US इंटेलिजेंस का जाल, ऐसे ढेर हुआ मेक्सिको का सबसे बड़ा डॉन ‘एल मेंचो’

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >