पाकिस्तान में सिंध की सियासत उबाल पर: ‘सिंध नहीं बंटेगा’ के नारे, हजारों सड़क पर

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाने की मांग के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. 23 अगस्त को हैदराबाद में ‘वहदत-ए-सिंध मार्च’ निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. इसी बीच पाकिस्तानी पत्रकार Veengas ने PPP और सिंध सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा है- क्या सिंध के बंटवारे का विरोध करने वालों के लिए ही पुलिस कार्रवाई है?

23 अगस्त को Pakistan के Sindh प्रांत के Hyderabad में ‘वहदत-ए-सिंध मार्च’ आयोजित किया गया। इसका मुख्य मुद्दा था- सिंध के विभाजन और नए प्रांतों या प्रशासनिक इकाइयों के गठन का विरोध.

सिंध एक्शन कमेटी से जुड़े दलों के कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला. प्रदर्शनकारियों ने सिंध की क्षेत्रीय एकता, जमीन, पानी और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की बात कही. मार्च Ponam Chowk से शुरू होकर Hyderabad Bypass के पास पहुंचा.

यानी मामला अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है.

सिंध की सड़कों पर इसका जवाब दिखाई देने लगा है.

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1. लेकिन असली विवाद PPP को लेकर क्यों है?

यहां पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी यानी PPP की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है.

PPP लंबे समय से सिंध की राजनीति की सबसे प्रभावशाली पार्टियों में रही है. लेकिन नए प्रांतों के सवाल पर पार्टी के हालिया बयानों को लेकर सिंधी राष्ट्रवादी समूहों में असंतोष बढ़ा है.

PPP चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने हाल में कहा कि पार्टी लोगों की राय का सम्मान करेगी और किसी भी नए प्रांत के गठन को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए. वहीं सिंध के वरिष्ठ मंत्री शरजील इनाम मेमन ने कहा है कि किसी नए प्रांत के लिए संबंधित प्रांतीय विधानसभा की मंजूरी जरूरी होगी.

दूसरी ओर, सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह पहले ही नए प्रांत के प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं और कह चुके हैं कि सिंध के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे.

तो फिर सवाल यह है-

अगर PPP सिंध के बंटवारे के खिलाफ है, तो विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी क्यों हो रही है?

यही सवाल अब सिंधी पत्रकार Veengas जैसे आवाजें उठा रही हैं.

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2. Veengas का आरोप- ‘सिंधी इतिहास नहीं भूलते’

पाकिस्तानी सिंधी पत्रकार और The Rise News की संस्थापक-संपादक Veengas ने सिंध में चल रहे विरोध को लेकर PPP और सिंध सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया है.

उनका तर्क है कि सिंधी लोग यह नहीं भूलते कि पाकिस्तान के अलग-अलग दौर के शासकों और तानाशाहों ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया.

Veengas ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि PPP सार्वजनिक रूप से लोगों की राय का सम्मान करने की बात करती है, तो सिंध में नए प्रांतों के विरोध में प्रदर्शन करने वालों पर पुलिस कार्रवाई क्यों हो रही है?

Veengas की पत्रकारिता का फोकस लंबे समय से सिंध की राजनीति, मानवाधिकार और हाशिए पर मौजूद समुदायों से जुड़े मुद्दों पर रहा है. वह The Rise News की संस्थापक और संपादक हैं, जिसे Stanford की John S. Knight Journalism Fellowships भी सिंध का पहला nonprofit bilingual digital news outlet बताती है.

3. ‘सिंध के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई?’- यही है सबसे बड़ा विवाद

हाल के दिनों में सिंध में नए प्रांतों के विरोध से जुड़े प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई की खबरें भी सामने आई हैं.

22 अगस्त को Awami Tehreek के 13 नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया. हिरासत में लिए गए अधिवक्ता साजिद महेसर ने सिंध सरकार पर ‘double standard’ का आरोप लगाया और कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से सिंध की एकता की बात करने वाले कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है.

इससे पहले भी लरकाना में सिंध के विभाजन के खिलाफ एक रैली पर पुलिस कार्रवाई और नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर विवाद सामने आया था.

हालांकि, इन आरोपों को सिंध सरकार या PPP की अंतिम रूप से प्रमाणित स्थिति मानना उचित नहीं होगा. सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि नए प्रांत का फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है.

यही विरोधाभास इस कहानी को और दिलचस्प बनाता है.

4. आखिर Sindh को बांटने की मांग उठ क्यों रही है?

नए प्रांतों की मांग का सबसे मुखर राजनीतिक चेहरा इस समय MQM-P है.

MQM-P का तर्क है कि पाकिस्तान की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था बड़ी आबादी और शहरी क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने में असफल रही है. पार्टी का कहना है कि नए प्रांत और मजबूत स्थानीय प्रशासन सत्ता और संसाधनों को लोगों के करीब ले जा सकते हैं.

लेकिन सिंधी राष्ट्रवादी संगठनों का तर्क बिल्कुल अलग है.

उनके लिए यह केवल administrative restructuring नहीं है.

यह सवाल है-

सिंध की जमीन किसकी होगी? संसाधनों पर अधिकार किसका होगा? पानी का बंटवारा कैसे होगा? और क्या ऐतिहासिक सिंध को राजनीतिक रूप से विभाजित किया जा सकता है?

20 अगस्त को Sindh Action Committee ने भी नए प्रशासनिक units के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा था कि संविधान में प्रांतीय सीमाओं में बदलाव के लिए संबंधित विधानसभा की दो-तिहाई मंजूरी जरूरी है.

5. MQM-P बनाम PPP… और बीच में सिंध

इस पूरे विवाद में पाकिस्तान की दो प्रमुख राजनीतिक ताकतों की स्थिति भी दिलचस्प है.

MQM-P: नए प्रांत/नई प्रशासनिक व्यवस्था की मांग.

PPP: संवैधानिक प्रक्रिया और जनता की राय की बात, लेकिन उसके सिंधी नेता नए प्रांत के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं.

Sindhi nationalist groups: किसी भी तरह के विभाजन का खुला विरोध.

यानी सिंध में बहस अब केवल PPP बनाम MQM-P नहीं रह गई है.

यह धीरे-धीरे ‘Sindh की territorial identity’ बनाम ‘administrative restructuring’ की बहस बनती जा रही है.

सबसे बड़ा सवाल: क्या सिंध का बंटवारा पाकिस्तान के लिए नया राजनीतिक संकट बन सकता है?

सिंध के विरोध प्रदर्शनों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.

क्योंकि यहां सिर्फ एक राजनीतिक मांग का विरोध नहीं हो रहा.

इसके साथ भाषा, इतिहास, जमीन, पानी, संसाधन, पहचान और संघीय ढांचेजैसे कई सवाल जुड़ गए हैं.

और Veengas का सवाल इसी वजह से महत्वपूर्ण हो जाता है-

अगर शांतिपूर्ण तरीके से सिंध के विभाजन का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, तो क्या ऐसे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई उस अधिकार को कमजोर नहीं करती?

फिलहाल PPP का आधिकारिक रुख संवैधानिक प्रक्रिया पर है और उसके सिंध के नेताओं ने नए प्रांत के प्रस्ताव का विरोध किया है. दूसरी ओर, MQM-P अपनी मांग को संवैधानिक और प्रशासनिक सुधार के रूप में पेश कर रही है.

लेकिन 23 अगस्त का हैदराबाद मार्च यह संकेत जरूर देता है कि सिंध में यह मुद्दा अब सड़कों पर पहुंच चुका है.

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लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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