बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दावा करते हुए कहा है कि वह इस साल दिसंबर तक अपने देश लौटेंगी, चाहे उन्हें गिरफ्तारी, जेल या मौत का ही सामना क्यों न करना पड़े. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से वह भारत में रह रही हैं.
छात्र आंदोलन के बाद छोड़नी पड़ी थी सत्ता
शेख हसीना को अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था. प्रदर्शनकारियों ने उनके सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद वह हेलीकॉप्टर से भारत आ गई थीं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी. बाद में ढाका की एक अदालत ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई, जिसे हसीना ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया.
मुझे पता है कि मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है, जेल भेजा जा सकता है या मेरी हत्या भी हो सकती है, लेकिन मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं, इसलिए मैं लौटना चाहती हूं.- " बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना"
भारत पर नहीं डाला किसी तरह का दबाव
हसीना ने कहा कि भारत में उन्हें पूरा सम्मान मिला है और भारतीय अधिकारियों ने कभी उनके प्रत्यर्पण पर उनसे कोई चर्चा नहीं की. उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश लौटने का फैसला पूरी तरह उनका अपना है. हालांकि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन नई दिल्ली ने कहा है कि इस अनुरोध पर विचार किया जा रहा है.
आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश
पूर्व प्रधानमंत्री हसीना ने अपने शासनकाल में मानवाधिकार उल्लंघन और विपक्ष पर कार्रवाई के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये सब राजनीतिक अभियान का हिस्सा हैं. उन्होंने दावा किया कि छात्र आंदोलन धीरे-धीरे सुनियोजित हिंसक अभियान में बदल गया था, जिसका मकसद उनकी सरकार को गिराना था. राजनीति में वापसी के सवाल पर उन्होंने कहा कि सत्ता मेरा लक्ष्य नहीं है, बल्कि लोगों की सेवा करना ही मेरा उद्देश्य है.
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