सऊदी अरब और अमेरिका ने 2025 में दी रिकॉर्ड फांसी, किंगडम में तो विदेशी बने सबसे बड़े शिकार, कारण क्या?

Saudi Arabia and US hit highest Executions in 2025: सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2025 में फांसी देने का रिकॉर्ड बना दिया है. जहां किंगडम ऑफ सऊदी अरब में 356 लोगों को फांसी के जरिए मौत की सजा दी गई, तो अमेरिका में 47 पुरुषों को फंदे पर लटकाया गया. यह दोनों देशों में बीते सालों में इस तरह दी जाने वाली मौतों में सबसे बड़ी संख्या है.

Saudi Arabia and US hit highest Executions in 2025: सऊदी अरब में मृत्युदंड के मामलों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है. खासतौर पर ड्रग्स से जुड़े अपराधों के खिलाफ शुरू किए गए कड़े अभियान के बाद फांसी की सजाओं में तेज उछाल देखने को मिला है. सऊदी अरब ने 2025 में कुल 356 लोगों को फांसी दी, जो देश के इतिहास में किसी एक वर्ष का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. वहीं अमेरिका में भी बीते साल में रिकॉर्ड लोगों को फांसी दी गई है. 2025 में संयुक्त राज्य अमेरिका में 47 पुरुषों को फांसी दी गई, जो 16 साल बाद सबसे अधिक संख्या है.

न्यूज एजेंसी एएफपी के हवाले से, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सऊदी अरब में 356 में से 243 फांसी ड्रग्स से जुड़े अपराधों के मामलों में दी गईं. “ड्रग्स के खिलाफ युद्ध” वाले अभियान के शुरुआती दौर में गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों को अब लंबी न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मौत की सजा सुनाई जा रही है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह रुझान सऊदी सरकार के सुधारों और उदार छवि के दावों पर सवाल खड़े करता है.

लगातार दूसरे साल फांसी की संख्या बढ़ी

यह लगातार दूसरा साल है जब सऊदी अरब ने फांसी के मामलों में नया रिकॉर्ड बनाया है. इससे पहले 2024 में 338 लोगों को मौत की सजा दी गई थी. बर्लिन स्थित मानवाधिकार संगठन, यूरोपीय सऊदी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने बताया कि 2025 पहली बार ऐसा साल रहा, जब एक कैलेंडर वर्ष में सऊदी नागरिकों की तुलना में अधिक विदेशी नागरिकों को मौत की सजा दी गई. एमनेस्टी इंटरनेशनल 1990 से सऊदी अरब में फांसी के मामलों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रख रहा है, जबकि उससे पहले के वर्षों के आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं. 

ड्रग्स के कारण विदेशी बने सबसे बड़ा निशाना

करीब तीन साल के अंतराल के बाद सऊदी अरब ने 2022 के अंत में ड्रग्स से जुड़े मामलों में मृत्युदंड फिर से लागू किया था. अरब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद सऊदी अरब अवैध उत्तेजक पदार्थ कैप्टागन के सबसे बड़े बाजारों में से एक माना जाता है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासनकाल में यह सीरिया का सबसे बड़ा निर्यात था. असद को दिसंबर 2024 में सत्ता से हटा दिया गया था. ड्रग्स के खिलाफ अभियान तेज होने के बाद सऊदी अधिकारियों ने हाईवे और सीमा चौकियों पर निगरानी कड़ी कर दी है. अब तक लाखों नशीली गोलियां जब्त की जा चुकी हैं और दर्जनों संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया गया है. 

इस सख्ती का सबसे अधिक असर विदेशी नागरिकों पर पड़ा है. यूरोपीय सऊदी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स की शोधकर्ता दुआ धैनी ने एएफपी से कहा कि ये रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि सऊदी अरब में मानवाधिकार सुधारों को लेकर किए गए वादे केवल दिखावटी हैं. उनके अनुसार, फांसी की सजाएं समाज में “डर और प्रताड़ना का माहौल” पैदा करती हैं, जिसका असर प्रवासी श्रमिकों, नाबालिगों और राजनीतिक विरोधियों तक पर पड़ता है. 

सऊदी के विजन पर फांसी का दाग

मृत्युदंड के व्यापक इस्तेमाल को लेकर सऊदी अरब को लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह नीति देश की आधुनिक और प्रगतिशील छवि पेश करने के प्रयासों के विपरीत है. विजन 2030 के तहत क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान एक अधिक खुले और सहिष्णु समाज का सपना दिखा रहे हैं, वहीं देश पर्यटन ढांचे और बड़े खेल आयोजनों में भारी निवेश कर रहा है. इसमें 2034 फुटबॉल वर्ल्ड कप भी शामिल है. इसके विपरीत मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि फांसी की सजा का लगातार इस्तेमाल इस सोच को कमजोर करता है. वहीं, सऊदी सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए मृत्युदंड जरूरी है और इसे सभी कानूनी अपील प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही लागू किया जाता है.

अमेरिका में 16 साल बाद बढ़ी फांसी की संख्या

केवल सऊदी अरब ही नहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका में भी 2025 के दौरान मृत्युदंड के मामलों में तेज इजाफा दर्ज किया गया. इस साल अमेरिका में 47 पुरुषों को फांसी दी गई, जो 2009 के बाद सबसे अधिक संख्या है. यह वृद्धि ऐसे दौर में देखने को मिली, जब कई राज्यों में मृत्युदंड को लेकर राजनीतिक समर्थन फिर से मजबूत हुआ और अंतिम चरण में अदालतों द्वारा दखल कम होता गया. इस संदर्भ में फ्लोरिडा सबसे आगे रहा, जहां 2025 में अकेले 19 लोगों को फांसी दी गई.

जनता का विरोध, फिर भी बढ़ी संख्या

डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के मुताबिक, यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा लिए जा रहे फैसले और आम जनता की सोच के बीच दूरी बढ़ती जा रही है. दिलचस्प बात यह है कि यह उछाल उस समय सामने आया है, जब जनमत सर्वे लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका में फांसी की सजा के प्रति सार्वजनिक समर्थन लंबे समय से घट रहा है. इसके बावजूद, कुछ अमेरिकी राज्यों ने नाइट्रोजन गैस और फायरिंग स्क्वाड जैसे नए या विवादित तरीकों को अपनाने की अनुमति दी या उनके इस्तेमाल का दायरा बढ़ा दिया.

गार्जियन की एक रिपोर्ट में कानूनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि फांसी की बढ़ती संख्या दरअसल नीति में आए बदलावों और संघीय अदालतों की निगरानी कमजोर पड़ने का नतीजा है. एक शिक्षाविद् ने मौजूदा मृत्युदंड व्यवस्था को ऐसी प्रणाली बताया, जो बिना किसी सुरक्षा जाल के संचालित हो रही है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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