यूरोपीय संघ (EU) ने रूस के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आयात पर और कड़े प्रतिबंध लागू करने जा रहा है. इन प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस तेजी से अपनी 'शैडो फ्लीट' यानी गुप्त गैस परिवहन बेड़े का विस्तार कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह महीनों में रूस ने 8 पुराने LNG टैंकर खरीदे हैं और अपने देश में बने दो नए जहाज भी इस बेड़े में शामिल किए हैं.
क्या होती है शैडो फ्लीट?
'शैडो फ्लीट' या 'डार्क फ्लीट' ऐसे पुराने कारोबारी जहाजों का समूह होता है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों और आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. इनमें जहाजों की लोकेशन छिपाना, बीच समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में माल स्थानांतरित करना और दूसरे देशों के झंडे का इस्तेमाल करना जैसी रणनीतियां शामिल होती हैं. इससे माल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाई जा सकती है.
रूस पहले ही 1,000 से अधिक तेल टैंकरों वाली शैडो फ्लीट का इस्तेमाल करता रहा है. अब वही मॉडल गैस निर्यात में भी अपनाया जा रहा है। जहाजों के सिग्नल बंद करना, समुद्र में माल की अदला-बदली करना और अलग-अलग देशों के झंडे का इस्तेमाल करना इस नेटवर्क की प्रमुख रणनीतियां हैं. माना जा रहा है कि आने वाले समय में रूस और यूरोपीय संघ के बीच ऊर्जा कारोबार को लेकर टकराव और तेज हो सकता है.
रूस को कैसे मिलेगा फायदा?
रूस का मानना है कि इस बेड़े की मदद से वह 2027 के बाद भी दुनिया के कई देशों तक अपनी LNG पहुंचा सकेगा. यूरोप लंबे समय से रूस की ऊर्जा आय कम करने की कोशिश कर रहा है ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाले आर्थिक संसाधनों पर असर पड़े. गैस क्षेत्र में इस तरह की शैडो फ्लीट बनाना पहले कभी नहीं देखा गया और यह रूस की नई रणनीतिक चाल है.
EU के नए प्रतिबंध क्या हैं?
आंकड़ों के अनुसार 2026 की पहली छमाही में यूरोपीय देशों ने रूस के यमाल LNG प्लांट से बड़ी मात्रा में गैस खरीदी. लेकिन अगले साल ( 2027 ) से यूरोपीय संघ रूसी LNG के आयात पर पूरी तरह रोक लगाएगा. साथ ही LNG टैंकरों की रूस को बिक्री की जानकारी ब्रुसेल्स को देना अनिवार्य कर दिया गया है. हालांकि, ग्रीस के दबाव के बाद EU ने तीसरे देशों तक LNG ढुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया.
25 गैस जहाजों तक पहुंचा बेड़ा
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के पास अब 25 LNG गैस वाहक जहाज हैं. इनमें से चार जहाज ऐसे केंद्रों से गैस ले जा चुके हैं, जो पहले से पश्चिमी प्रतिबंधों के दायरे में हैं. इन जहाजों का स्वामित्व अक्सर दुबई, हांगकांग और सिंगापुर में बनी शेल कंपनियों के पास होता है, जिससे उनकी वास्तविक पहचान छिपी रहती है.
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