रूस का 'एयर शैडो फ्लीट'! अफ्रीका में ऐसे बढ़ा रहा सैन्य ताकत

रूस अफ्रीका में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करने के लिए एक गुप्त 'एयर शैडो फ्लीट' का उपयोग कर रहा है. इस नेटवर्क में सरकारी और निजी एयरलाइंस शामिल हैं, जो सीरिया, लीबिया और तुर्की जैसे देशों के माध्यम से सामान और सैनिकों की आवाजाही करती हैं.

Russia Air Shadow Fleet : रूस अब अफ्रीका में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए विमानों के एक खास नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है. इसे रूस का 'एयर शैडो फ्लीट' कहा जा रहा है. यूरोक्टिव (Euractiv) की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंटर फॉर एडवांस्ड डिफेंस स्टडीज (C4ADS) की रिसर्च में जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच रूस से माली, बुर्किना फासो और नाइजर के लिए कम से कम 75 उड़ानों का पता चला है. इससे संकेत मिलता है कि रूस अफ्रीका में अपनी सेना के लिए सामान और लोगों की आवाजाही को एक तय प्लान के तहत चला रहा है.

क्या होता है एयर शैडो फ्लीट?

एयर शैडो फ्लीट (Air Shadow Fleet) विमानों का एक ऐसा गुप्त नेटवर्क है, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों या नजर, रडार और नियामकों से बचकर साजो-सामान और सैन्य बलों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता है. यह समुद्री ‘शैडो फ्लीट’ (छाया बेड़ा) की तर्ज पर काम करता है, जिसका उपयोग देश अक्सर तेल या प्रतिबंधित सामान छिपाकर ले जाने के लिए करते हैं.

सरकारी विमानों के साथ प्राइवेट एयरलाइंस भी शामिल

इस पूरे नेटवर्क में रूस की 224वीं फ्लाइट यूनिट सबसे ज्यादा एक्टिव बताई गई है. यह रूस के रक्षा मंत्रालय के कंट्रोल में है और अमेरिका ने इस पर पाबंदी लगा रखी है. इसके अलावा Sapsan Airlines, Liz Aviation और रूस का इमरजेंसी सिचुएशंस मंत्रालय भी इन उड़ानों में शामिल बताए गए हैं. खास बात यह है कि इन प्राइवेट एयरलाइंस और रूस के इमरजेंसी मंत्रालय पर अभी अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोपीय संघ ने पाबंदी नहीं लगाई है. यही वजह है कि यह नेटवर्क रूस के लिए काफी अहम माना जा रहा है.

Also read : Usain Bolt का 17 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा! 100 मीटर दौड़ में 9.32 सेकंड का नया कारनामा

सीरिया, लीबिया से लेकर तुर्की तक बन रहे रास्ते

रूस के सरकारी विमान अक्सर सीरिया और लीबिया में मौजूद रूसी ठिकानों के रास्ते अफ्रीका पहुंचते हैं. वहीं प्राइवेट विमान आम तौर पर तुर्की, अल्जीरिया और UAE जैसे देशों के एयरपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं. इनमें लीबिया अब सबसे अहम कड़ी बनता जा रहा है, क्योंकि रूस वहां अपने सैन्य ठिकानों को तेजी से मजबूत कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, रूस लीबिया के छह एयरबेस पर पैसा लगाने और वहां अपने लोगों को तैनात करने की तैयारी कर रहा है. इन एयरबेस पर रूसी विमान, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए जाने की बात सामने आई है.

बाल्टिक सागर में रूस का बड़ा युद्धपोत भी एक्टिव

इसी बीच रूस ने यूरोप को एक और बड़ा संकेत दिया है. रूस का आधुनिक युद्धपोत एडमिरल कसातोनोव जर्मनी के फेहमर्न द्वीप के पास देखा गया है. यह युद्धपोत लंबी दूरी तक हमला करने और दुश्मन की पनडुब्बियों पर नजर रखने के लिए बनाया गया है. इसमें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम Zircon हाइपरसोनिक मिसाइलें भी इस्तेमाल की जा सकती हैं. ऐसे समय में जब रूस और यूरोप के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, जर्मनी के पास इस युद्धपोत की मौजूदगी ने यूरोप की चिंता और बढ़ा दी है.

Also read : सोने की बालियों के लिए 60 साल की महिला की हत्या, पानी की टंकी में मिली लाश; CCTV से खुला राज


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >