Russia-Ukraine War: यूक्रेन में खेतों से फसल की जगह निकल रहे रॉकेट और बम, जानें क्या है मामला

यूक्रेन में खेतों में कहीं बिना फटे रॉकेट मिले रहे हैं तो कहीं मिट्टी में धंसे हुए रॉकेट नजर आ रहे हैं. श्रमिकों को खर-पतवार हटाने के दौरान कलस्टर बम मिला तो चारा भंडार की छत में बम फटने से हुए छेद नजर आ रहा है. यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में खेतीबारी का सारा काम थमा हुआ है.

यूक्रेन-रूस युद्ध को 200 से अधिक दिन हो गये हैं. लेकिन अब इसका साइड इफेक्ट भी सामने आने लगा है. एक तो कुछ दिन पहले खबर आयी थी कि यूक्रेन ने रूस पर भारी पड़ता नजर आ रहा है, तो दूसरी ओर खबर आ रही है कि रूस ने जिस तरह से यूक्रेन पर बम और रॉकेट बरसाये हैं, अब खेलों में फसल की जगह बम और रॉकेट निकल रहे हैं.

यूक्रेन में खेतों से निकल रहे बम

यूक्रेन में खेतों में कहीं बिना फटे रॉकेट मिले रहे हैं तो कहीं मिट्टी में धंसे हुए रॉकेट नजर आ रहे हैं. श्रमिकों को खर-पतवार हटाने के दौरान कलस्टर बम मिला तो चारा भंडार की छत में बम फटने से हुए छेद नजर आ रहा है. यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में खेतीबारी का सारा काम थमा हुआ है. यहां खेतों एवं भवनों को मोर्टारों, रॉकेटों, कलस्टर बमों से बार बार निशाना बनाया गया. स्थिति ऐसी है कि श्रमिक जमीन में बुआई या गेहूं जैसी फसलों की कटाई करने में असमर्थ हैं.

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खेतों दबे हैं बिना फटे गोला-बारूद, किसानों के सामने बड़ी समस्या

वेरेस फार्म में खेती का धंधा संभालने वाले विक्टर लुबिनेट्स ने कहा कि फसलों की बुआई-रोपाई एवं कटाई का काम बहाल करना मुश्किल होगा. उन्होंने कहा कि यदि लड़ाई खत्म हो जाती तो भी पहले खेतों से बिना फटा गोला-बारूद आदि हटाना होगा. वैसे युद्ध समाप्त होने के फिलहाल आसार नहीं हैं. विभिन्न हथियारों की आवाज से आसमान गूंज जाता है तथा बम एवं गोला-बारूद के फटने से धरती थर्रा जाती है. लुबिनेट्स ने कहा, मुझे इनकी आदत पड़ गयी है. पहले दो-चार दिन तो यह बहुत डरावना था लेकिन अब कोई भी व्यक्ति किसी भी चीज का आदी हो ही जाता है. उनके पीछे से धुंए का गुबार दिख रहा है. उन्होंने कहा, लेकिन हमें काम करना है. यदि हम ये सारी चीजें छोड़ देंगे तो बेआसरा हो जाएंगे, दूसरे किसान भी हताश हो जाएंगे, फिर ऐसे में क्या होगा?

कृषि यूक्रेन की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा

कृषि यूक्रेन की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक युद्ध से पहले कृषि का यूक्रेन के सकल राष्ट्रीय उत्पाद में करीब 20 फीसद हिस्सा तथा निर्यात राजस्व में 40 फीसद हिस्सा था. इस देश को अक्सर यूरोप के लिए अनाज का बड़ा स्रोत कहा जाता है और लाखों लोग अनाज की सस्ती आपूर्ति के लिए यूक्रेन पर आश्रित हैं. लेकिन फरवरी के आखिर में रूस के हमले से यूक्रेन की कृषि को भारी नुकसान पहुंचा है.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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