यूक्रेन के प्रेसिडेंट ने किया ऐसा काम, गुस्से से लाल हुआ पोलैंड; वापस लेगा जेलेंस्की को दिया गया सम्मान

Poland Revokes Zelenskyy Award: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अधिकारियों ने पोलैंड के सम्मान लौटाए. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) से जुड़े विवाद के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा, जिसके बाद पोलैंड के राष्ट्रपति ने ये पुरस्कार लेने की घोषणा की थी.

Poland Revokes Zelenskyy Award: यूक्रेन और उसके करीबी सहयोगी पोलैंड के बीच पुराने विवाद ने एक बार फिर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है. इसकी वजह से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और उनके शीर्ष अधिकारियों ने पोलैंड की ओर से दिए गए सम्मान वापस करने का फैसला किया है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब जेलेंस्की ने एक सैन्य यूनिट का नाम यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) के नाम पर रखने का फैसला किया. पोलैंड में इस संगठन को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश नागरिकों के नरसंहार से जोड़कर देखा जाता है.

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शनिवार को कहा कि उन्होंने पोलैंड का प्रतिष्ठित ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ सम्मान वापस कर दिया है. यह सम्मान उन्हें साल 2023 में पोलैंड के तत्कालीन राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने सुरक्षा, मजबूती और मानवाधिकारों की रक्षा में योगदान के लिए दिया था. जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘हम मानते थे कि 2023 में दिया गया ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल यूक्रेनी लोगों और हमारी सेना के लिए था. उस समय यही कहा गया था. आज मैंने यह सम्मान पोलैंड के राष्ट्रपति को वापस भेज दिया है.’

कई यूक्रेनी अधिकारियों ने भी लौटाए पुरस्कार

जेलेंस्की के अलावा यूक्रेन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पोलैंड से मिले सम्मान वापस करने की घोषणा की. इनमें यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव, पोलैंड में यूक्रेन के राजदूत वासिल बोडनार और विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा शामिल हैं.

UPA को लेकर इतिहास में क्या विवाद है?

26 मई को जारी एक आदेश में जेलेंस्की ने एक सैन्य यूनिट का नाम यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) के नाम पर रखा था. यह संगठन 1940 और 1950 के दशक में सक्रिय था. यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी और सोवियत संघ दोनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. हालांकि, इस संगठन पर वोल्हिनिया और ईस्टर्न गैलिसिया जैसे नाजी कब्जे वाले इलाकों में हजारों पोलिश नागरिकों की सामूहिक हत्या के आरोप भी लगे हैं.

यूक्रेनी पक्ष का कहना है कि उस दौर में UPA और पोलिश भूमिगत संगठनों के बीच बड़े स्तर पर संघर्ष और जवाबी हमले हुए थे, जिनमें यूक्रेनी और पोलिश दोनों नागरिक मारे गए. द्वितीय विश्व युद्ध की यही ऐतिहासिक विरासत अब यूक्रेन और पोलैंड के मौजूदा संबंधों में एक बार फिर तनाव का कारण बन गई है.

पोलिश प्रेसिडेंट ने कहा वापस लेंगे सम्मान

पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नवरोकी ने शुक्रवार को अपने लगभग 13 मिनट के संबोधन में कहा कि वह जेलेंस्की से ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेंगे. नवरोकी ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘पोलैंड के अधिकांश लोगों के लिए यूक्रेनी विद्रोही सेना अभी भी सबसे पहले उस संगठन के रूप में जानी जाती है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश गणराज्य के नागरिकों के खिलाफ क्रूर अपराधों के लिए जिम्मेदार था.’ 

यूक्रेन को समर्थन देना जारी रखेगा पोलैंड

यूपीए के नाम पर सैन्य यूनिट का नाम रखने के जेलेंस्की के फैसले की पोलैंड में काफी आलोचना हुई. यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पोलैंड रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन का एक बड़ा समर्थक रहा है और उसने लाखों यूक्रेनी शरणार्थियों को भी जगह दी है. 

पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी राष्ट्रवादी राजनीति के लिए जाने जाते हैं. आलोचक उनके ऊपर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने यूक्रेन विरोधी भावनाओं को राजनीतिक समर्थन जुटाने के लिए इस्तेमाल किया. हालांकि, नावरोकी ने कहा कि सम्मान वापस लेने के फैसले का मतलब यह नहीं है कि रूस के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई में पोलैंड का समर्थन कम हो जाएगा.

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यूक्रेन ने पोलैंड के फैसले को बताया रूस के लिए फायदा

यूक्रेनी अधिकारियों ने पोलैंड के इस कदम की आलोचना की. किरिलो बुदानोव ने इसे ‘हमारे लोगों के प्रति गैर मित्रवत कदम’ बताया. उन्होंने कहा कि यह फैसला ‘मॉस्को के आक्रामक के लिए एक तोहफा है, जिसका इस्तेमाल वह दोनों देशों के खिलाफ करेगा.’ वहीं, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने इसे ‘रणनीतिक गलती’ बताया, जबकि राजदूत वासिल बोडनार ने कहा कि रूस के हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन के लिए यह फैसला ‘विशेष रूप से दर्दनाक’ है.

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