PoJK Protest : पाक अधिकृत कश्मीर के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. ये प्रदर्शन बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर किए जा रहे हैं. साथ ही लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जनता के पास आजादी नहीं है, प्रशासन के हाथों कथित तौर पर कई लोग मारे गए. इसे लेकर वे जवाबदेही चाहते हैं. PoJK के मुजफ्फराबाद में जुलाई महीने के अंत से हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं.
क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
PoJK के खासकर मुजफ्फराबाद और सुधनोती में लोग प्रशासन के खिलाफ भड़के हुए हैं. वहां की जनता इसलिए सरकारी तंत्र पर ज्यादा हावी है क्योंकि उन्हें बेसिक सुविधाएं भी सही से मुहैया नहीं हो रही. महंगाई ने लोगों की जिन्दगी बदतर कर रखी है. बिजली, आटा, गेंहू जैसी रोज उपयोग की जाने वाली चीजें महंगी हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक लोगों की शिकायत रोजगार को लेकर भी है. योग्य लोगों को रोजगार नहीं दिया जा रहा. PoJK के कई इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की घोर कमी है. इसके अलावा लोग बेहतर परिवहन और इंटरनेट की व्यवस्था चाहते हैं; और इन चीजों पर प्रशासन ध्यान नहीं दे रही इसलिए लोगों का गुस्सा दिनों-दिन और अधिक भड़क रहा है.
हाजिरा मंधोल में छात्रों का प्रदर्शन
हाजिरा मंधोल में बड़ी संख्या में छात्रों और स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपने बुनियादी अधिकारों की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने पिछले प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के लिए जवाबदेही तय करने और उनके बलिदान को याद रखने की मांग की. उन्होंने PoJK से पाकिस्तानी सेना को तुरंत हटाने की भी मांग उठाई.
ब्रसेल्स में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन
ब्रसेल्स में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर UKPNP के नेता साजिद हुसैन ने प्रदर्शन करते हुए PoJK में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठाया. उन्होंने 5 जून को JKJAAC नेता सरदार उमर नज़ीर पर कथित हमले का जिक्र किया और कहा कि प्रदर्शनकारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं. हुसैन ने 4 अक्टूबर 2025 के समझौते को लागू करने की मांग करते हुए यूरोपीय संसद, यूरोपीय आयोग और अन्य यूरोपीय संस्थाओं से PoJK की स्थिति पर ध्यान देने की अपील की. उन्होंने पाकिस्तान से मानवाधिकारों का सम्मान करने और निर्दोष लोगों की कथित हत्याएं रोकने की मांग की.
रावलकोट में तनाव का असर
रावलकोट में हालिया प्रदर्शनों और झड़पों के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. Reuters की रिपोर्ट के अनुसार JAAC ने 30 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. वहीं, सड़क और इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित होने की खबरों के बीच पुंछ जिले की कई विधानसभा सीटों पर 10 अगस्त को होने वाली वोटिंग भी कानून-व्यवस्था की स्थिति के चलते टाल दी गई.
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